सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: सनातन धर्म के प्रचार की बड़ी पहल
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: संचालन करते धीरेन्द्र शास्त्री जी
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अगुवाई में आयोजित सनातन हिंदू एकता पदयात्रा एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा बन गई है। नौ दिनों तक चलने वाली यह पदयात्रा सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समाज में एकता का संदेश देने का उद्देश्य रखती है। इस यात्रा ने हजारों लोगों को जोड़ते हुए हिंदू संस्कृति और परंपराओं का प्रचार किया है।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: यात्रा का शुभारंभ, बागेश्वर धाम से ओरछा तक का सफर
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: यह पदयात्रा 21 नवंबर को बागेश्वर धाम, छतरपुर (मध्य प्रदेश) से शुरू हुई। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 29 नवंबर को ओरछा में रामराजा मंदिर में इसका समापन होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सतत भजन-कीर्तन और सनातन धर्म के आदर्शों का प्रचार कर रहे हैं।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: यात्रा के मार्ग, किन-किन जिलों से होकर गुजरी
इस यात्रा का मार्ग विस्तृत और सुनियोजित है। यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से गुजरती है:
•बागेश्वर धाम (छतरपुर, एमपी): यात्रा का प्रारंभिक बिंदु।
•झांसी (यूपी): सकरार, जहां यात्रा का भव्य स्वागत हुआ।
•निवाड़ी (एमपी): यहां रात्रि विश्राम का आयोजन हुआ।
•ओरछा (एमपी): यात्रा का अंतिम पड़ाव।
रास्ते में हजारों गांव और कस्बों के लोग पदयात्रा में शामिल हुए और भव्य स्वागत किया।
झांसी में बुलडोजर पर पुष्प वर्षा: उत्साह और समर्थन का नजारा

जब यह पदयात्रा झांसी जिले के सकरार क्षेत्र में पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने बुलडोजर पर चढ़कर पुष्प वर्षा की। इस अनोखे स्वागत ने पदयात्रा को विशेष बना दिया। यह घटना दर्शाती है कि सनातन धर्म की एकता का संदेश कैसे लोगों के दिलों को छू रहा है।
पदयात्रा में शामिल श्रद्धालु: संख्या और उत्साह
पदयात्रा में लगभग 20,000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए हैं। इनमें न केवल बागेश्वर धाम और आसपास के क्षेत्रों के लोग हैं, बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में आए। यात्रा के हर पड़ाव पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।
पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य: सनातन धर्म और एकता का संदेश
इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के आदर्शों और मूल्यों को समाज में पुनर्स्थापित करना है। यह यात्रा:
•हिंदू धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाती है।
•समाज में धर्म, संस्कृति और परंपराओं के महत्व को उजागर करती है।
•लोगों को एकजुट होकर कार्य करने और आपसी भाईचारा बढ़ाने का संदेश देती है।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा: पंडित धीरेंद्र शास्त्री का संदेश

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस यात्रा के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म के आदर्शों पर चलने और समाज में एकता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। यह यात्रा समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश देने के लिए है।”
ओरछा में समापन: रामराजा मंदिर में होगा आयोजन
यात्रा का समापन 29 नवंबर को ओरछा के प्रसिद्ध रामराजा मंदिर में होगा। यहां विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इस समापन समारोह में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारतीय समाज में धर्म, संस्कृति, और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। यह यात्रा सनातन धर्म के आदर्शों को सशक्त बनाने और समाज में शांति और एकता का संदेश फैलाने का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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