“किसान आत्महत्या कांड” में फरार “आशु दिवाकर” पर हुआ एक लाख का “इनाम” – बीजेपी ने किया बहार
Kanpur News – किसान आत्महत्या एवं करोड़ों की जमीन हड़पने वाले भाजपा के नेता आशु दिवाकर उर्फ़ प्रियंजन के ऊपर एक लाख का इनाम घोषित कर दिया गया है। जिसके बाद से फरार आशु की तलाश तेजी से शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस विभाग के एक स्पेशल टीम को गिरफ़्तारी के लिए लगाया गया है। जिसके चलते आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई न कोई रहस्य्मय मोड़ देखने को मिल सकता है। जैसा हाल ही के बीते दिनों कानपुर में हुए आँख फोड़ू कांड में फसे भाजपा की महिला पार्षद के पति पर घोषित इनाम के बाद आत्मसमर्पण को देखा गया था।
आपको बताते चलें कि कानपुर के चकेरी इलाके में रहने वाले किसान बाबू सिंह की जमीन की रजिस्ट्री धोखे से लिखा ली गई थी। जिसमें भाजपा नेता (अब नहीं) आशु दिवाकर उर्फ़ प्रियरंजन और नोयडा के व्यापारी नेता राहुल जैन और कानपुर का मधुर पांडेय द्वारा रचा गया खेल था। जिसके जाल में फसे किसान बाबू सिंह ने तंग आकर ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी थी। -जिसके चलते परिजनों के आरोपों के आधार पर पुलिस ने धोखेबाजी और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा का इस्तेमाल करते हुए तीनों को आरोपी बना दिया था। जिसकी प्रथम जांच के दौरान नोएडा का व्यापारी नेता राहुल जैन और मधुर पांडेय की गिरफ़्तारी कर ली गई थी। लेकिन आशु दिवाकर उर्फ़ प्रियरंजन लगातार फरार बना हुआ है। जिसके चलते पुलिस विभाग ने शासन से अनुमति लेते हुए आशु दिवाकर के ऊपर पचास हजार का इनाम घोषित किया था। जिसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया है।
पार्टी से किया गया बहार
किसान आत्महत्या मामले की आग पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल चुकी थी। जिसकी वजह से पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी। जिसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने संगठन के जिम्मेदार नेताओं से गहन चर्चा की। बैठक के उपरांत आशु दिवाकर उर्फ प्रियरंजन को पार्टी से बहार निकल दिया गया था।
कहां छिपा होगा इनामिया आशु
आशु दिवाकर कहां छुपा होगा। किसका संरक्षण उसको मिला होगा। यह सवाल पुलिस को चुनौती देता नजर आ रहा है। कयास लगाया जा रहा है कि अपने राजनीतिक करियर के दौरान आशु ने कुछ अपनत्व वाले बड़े नेताओं (किसी पार्टी से सम्बंधित नहीं) का संरक्षण प्राप्त किया होगा। जिसकी वजह से पुलिस को उस तक पहुंचने में वक्त लग रहा होगा।