सुप्रीम कोर्ट का राहुल गांधी को बड़ा झटका: ‘वोट चोरी’ जांच वाली जनहित याचिका की खारिज, आगे पढ़ें क्या कहा

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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से उस समय बड़ा झटका लगा जब उनके ‘वोट चोरी’ (Vote Theft) वाले बयान पर जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों की जांच का अधिकार न्यायपालिका का नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग (ECI) का है। अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया या परिणामों से जुड़ी किसी भी शिकायत की जांच केवल ECI के अधिकार क्षेत्र में आती है, और इसमें कोर्ट का सीधा हस्तक्षेप उचित नहीं।

अदालत ने साफ किया — लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान जरूरी

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, तो उसे अपनी शिकायत निर्वाचन आयोग के समक्ष दर्ज करानी चाहिए, न कि सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि “न्यायपालिका का काम संविधान और कानून के दायरे में रहकर न्याय सुनिश्चित करना है। चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप लोकतंत्र के मूल ढांचे को प्रभावित कर सकता है।”

इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि किसी तरह की अनियमितता हुई है, तो वे अपनी शिकायत निर्वाचन आयोग को भेज सकते हैं, जो जांच करने में सक्षम संस्था है।

जानिए क्या थी याचिका की मांग?

दरअसल, कुछ दिनों पहले राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि देश में वोट चोरी की घटनाएं हो रही हैं, जिस पर एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जांच की मांग की थी।

याचिका में कहा गया था कि राहुल गांधी के आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि आम जनता का चुनाव प्रक्रिया में भरोसा कायम रहे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अप्रासंगिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया।

पढ़िए कोर्ट का तर्क — हर राजनीतिक बयान पर जांच नहीं हो सकती

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि देश में राजनीतिक बयानों की स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित है। “हर राजनीतिक टिप्पणी या आरोप को न्यायिक जांच का विषय नहीं बनाया जा सकता। ऐसे मामलों का मूल्यांकन चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं ही बेहतर ढंग से कर सकती हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर न्यायपालिका हर राजनीतिक बयान पर स्वतः संज्ञान लेने लगेगी, तो यह लोकतंत्र में संस्थागत संतुलन को प्रभावित करेगा।

राहुल गांधी के बयान पर हुआ विवाद

राहुल गांधी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि कुछ जगहों पर “वोट चोरी” की घटनाएं हुई हैं, और इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलचल मच गई थी। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इसे चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने वाला बयान बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी ने यह टिप्पणी जनता की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए की थी।

अदालत का संदेश — संस्थाओं पर भरोसा जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्वाचन आयोग की भूमिका भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को चुनाव प्रक्रिया में कोई शिकायत है, तो उन्हें पहले ECI का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

इस फैसले के साथ कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि न्यायपालिका राजनीति से जुड़ी बहसों में नहीं पड़ना चाहती। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब उसकी सभी संस्थाएं अपने-अपने संवैधानिक दायरे में काम करें।

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