Pilibhit: चार दिनों की प्रीत जगत से चार दिनों के नाते—मुक्तिधाम संकीर्तन में ‘हरी बोल’ की गूंज से भीगी आंखें, आत्मा हुई परमात्मा से एकाकार
🕉️ चार दिनों की प्रीत जगत से चार दिनों के नाते हैं — मुक्तिधाम में श्री राधा नाम संकीर्तन से गूंज उठा Pilibhit 🕉️
अजय देव वर्मा , पीलीभीत
मानव मुक्ति के मार्ग पर श्रीराधा नाम का भावपूर्ण संकीर्तन
पीलीभीत शहर के देवाह नदी तट स्थित मुक्तिधाम में “श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल” के सौजन्य से “मानव मुक्ति संकीर्तन” का भव्य आयोजन हुआ। जब ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की गूंज के साथ हरी बोल… हरी बोल… का नाद उठा, तो ऐसा लगा मानो स्वर्ग की सीमाएं भी इस पुण्य धरा पर उतर आई हों।
चारों ओर भक्तिमय वातावरण, आंखों में आंसू और होंठों पर एक ही नाम — श्रीराधा गोपाल जयश्रीराम!
यही वह नाम है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर पल मनुष्य का सच्चा सहारा बनता है।
चार दिनों की प्रीत जगत से चार दिनों के नाते हैं…
“चार दिनों की प्रीत जगत से चार दिनों के नाते हैं,
जिनकी तू चिंता में जलता, वही तुझे जलाते हैं।”
यह श्लोक नहीं, बल्कि जीवन का गूढ़ सत्य है।
मनुष्य इस संसार में आता है कुछ पल के लिए, लेकिन मोह-माया में उलझकर सच्चे लक्ष्य से भटक जाता है।
गीता कहती है —
“न जायते म्रियते वा कदाचित्, नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।”
(आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है, वह तो सनातन, अविनाशी है।)
मुक्तिधाम में आज का दृश्य इसी श्लोक की सजीव अनुभूति करा रहा था।
हर भक्त के नेत्रों में नमी थी, पर भीतर गहरी शांति थी — जैसे आत्मा परमात्मा से संवाद कर रही हो।
मानव जीवन का सत्य — “गोविंद नाम सत्य है”
“गोविंद नाम सत्य है” — यह कोई मुहावरा नहीं, बल्कि मानव जीवन का सबसे पवित्र सत्य है।
जब व्यक्ति इस संसार से विदा होता है, तब धन, दौलत साथ नहीं जाते, जाता है बस मान-सम्मान,
और केवल दुआएं, भक्ति और कर्मों की सुगंध।
रामचरित मानस में भी तुलसीदासजी लिखा हैं —
“कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करइ सो तस फल चाखा।”
जो इस जग में पुण्य करते हैं, वही प्रभु की कृपा के पात्र बनते हैं।
आज मुक्तिधाम में यही भावना हर चेहरे पर झलक रही थी —
“जीवन का अंतिम स्पर्श केवल श्रीराधा गोपाल के नाम से ही शुद्ध होता है।”
मुक्तिधाम समिति का ईश्वरमय आयोजन
मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, मनोज पटेल, पीसीयू अध्यक्ष दर्जा राज्यमंत्री सुरेश गंगवार, समाजसेवी सतीश जायसवाल, प्रमोद पंत, डॉ. एस.के. अग्रवाल, पत्रकार अनिल सिंह, संदीप सिंह, प्रसून शुक्ला, हरिओम बाजपेई, नादान कमल यादव, नीरज रस्तोगी, परविंदर सिंह सहैनी, विश्वनाथ चंद्रा, अतुल अग्रवाल, रवि गहना, कृष्ण अवतार कंछल जैसे समाजसेवकों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
ढोलक पर श्याम वर्मा, स्वर लहरियों में दीपक गोयल, अर्पित शुक्ला, राजीव अग्रवाल, भोला शिवम अग्रवाल, शिवम सहगल, शिवम सैनी, अजय पांडेय ने भक्तिभाव से सभी को भावविभोर किया।
Pilibhit: मुक्तिधाम की दीवारें भी बोल उठीं…
मुक्तिधाम की प्रत्येक दीवार पर श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों के पोस्टर टंगे थे,
जो जैसे मानव जीवन को नया संदेश दे रहे हों —
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”
(तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता मत कर।)
हर श्लोक मानो कह रहा था —
जीवन क्षणभंगुर है, पर कर्म अमर हैं।
पुण्य का अर्थ और प्रभु की कृपा
पुण्य का अर्थ केवल दान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और दूसरों के प्रति संवेदना है।
जो लोग मुक्तिधाम जैसे स्थलों पर निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, वे वास्तव में ईश्वर के हाथों का विस्तार हैं।
उनकी यह सेवा केवल एक कर्म नहीं, बल्कि “मुक्ति का सेतु” है, जिस पर चलकर आत्मा परमात्मा तक पहुँचती है।
“भक्ति भाव बिनु न जग में कोई, पावइ परम गति जोई।”
खाली हाथ आते हैं, खाली हाथ जाते नहीं …
सच तो यह है कि इंसान इस धरती पर खाली हाथ आता जरूर है पर खाली हाथ जाता नहीं है।
जब वह ईश्वर के पास लौटता है, तब उसके साथ उसकी दुआएं, करुणा और कर्मों का उजाला जाता है।
यह उजाला ही उसकी पहचान बनता है — यही मुक्ति का सार है।
अच्छाई का मार्ग ही सच्चा धर्म
मुक्तिधाम में आज जो दृश्य था, वह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन का सत्य दर्शन था।
हर भक्त, हर गूंजता श्लोक, हर ताली जैसे कह रही थी —
“संसार अस्थायी है, पर सच्चे कर्म शाश्वत हैं।”
मनुष्य को चाहिए कि वह झूठ, अहंकार और द्वेष को त्यागकर प्रेम, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चले।
क्योंकि अंततः वही आत्मा धन्य होती है जो ईश्वर का नाम लेकर, दूसरों के हित में जीती है।
“सत्यमेव जयते, नानृतं।”
(सत्य ही विजयी होता है, असत्य नहीं।)
ईश्वर से प्रार्थना
रॉकेट पोस्ट लाइव परिवार ईश्वर से यही प्रार्थना करता है —
जो लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जिन्होंने अपने पुण्य कर्मों से समाज को धर्म और मुक्ति का संदेश दिया,
प्रभु उन्हें दीर्घायु, शांति और सद्भाव का वरदान दें।