Pilibhit: 10 करोड़ लेकर आढ़ती फरार, लुटे किसान – मंडी प्रशासन पर सवाल!
Pilibhit: 10 करोड़ का ‘मंडी कांड’ ईमानदार मंडी पर लगा काला धब्बा, आढ़ती किसानों के खून-पसीने की पूंजी लेकर फरार!
जहाँ ईमानदारी की मिसाल थी — वहाँ बेईमानी का बाजार लग गया!
पीलीभीत की नवीन मंडी — जो पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी साख, पारदर्शिता और किसानों के भरोसे के लिए जानी जाती थी — आज शर्मसार है।
लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बरेली से लेकर उत्तराखंड के मझोला बेल्ट तक के किसान यहां अपनी उपज बेचने आते हैं, नकद भुगतान लेते थे और संतोष के साथ लौट जाते हैं ।
पर इस बार कहानी पलट गई — उसी मंडी की छवि पर अब 10 करोड़ रुपये की बेईमानी का काला धब्बा लग गया है।
आढ़ती ने किसानों का विश्वास नहीं, उनका जीवन लूट लिया!
मंडी के चर्चित आढ़ती फर्म मैसर्स बालमुकुन्द राममूर्ति का मालिक प्रियांशु अग्रवाल किसानों से फसल खरीदकर लगभग 10 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गया।
यह वही आढ़ती है, जो वर्षों से किसानों का “विश्वसनीय व्यापारी” कहलाता था।
लेकिन इस बार उसने न सिर्फ उनका अनाज खरीदा, बल्कि उनकी आस, उनकी मेहनत और उनके परिवार की उम्मीदों को भी लूट लिया।
शाहजहाँपुर के किसान संदीप कुमार और हरीश कुमार ने 07 अक्टूबर 2025 को इस फर्म को अपना धान बेचा।
कीमत तय हुई ₹1910 प्रति क्विंटल —
कुल 140.60 कुंतल धान, फिर 17 और 19 अक्टूबर को दोबारा 1280 कुंतल का सौदा।
15 दिन में भुगतान का वादा किया गया, पर हुआ क्या?
जब किसान रुपये लेने पहुँचे, तो पाया — दुकान पर ताला, मोबाइल स्विच ऑफ, और व्यापारी गायब!
किसानों की चीख — “हमने फसल बेची, पर घर चलाने के पैसे नहीं बचे!”
पीड़ित किसान अब टूट चुके हैं।
उनकी जुबान पर सिर्फ यही सवाल है —
“अगर मंडी में ही धोखा मिलेगा, तो हम किसान कहाँ जाएँ?”
किसान सफीक अहमद, निवासी बरा मझलिया ने बताया —
“हमारा ₹12 लाख 40 हजार रुपये आढ़ती प्रियांशु अग्रवाल पर बकाया है।
वह दुकान बंद करके भाग गया है। हमने जिलाधिकारी से शिकायत की है और सरकार से मांग है कि हमारा पैसा जल्द दिलवाया जाए,
वरना हम अपने परिवार और बच्चों सहित मंडी में धरना देंगे।”
इसी तरह किसान सागर कुमार, निवासी अभय राजपुर बोले —
“हमने 450 कुंटल धान बेचा था, ₹8,36,226 रुपये आढ़ती प्रियांशु पर बकाया है।”
किसान भगवान दास, निवासी खरगापुर ने कहा —
“हमारा ₹1,25,000 फंसा हुआ है, प्रियांशु अग्रवाल फरार हो गया है।”
किसान कमलेश, निवासी अभय राज पुर ने बताया —
“हमारा ₹1,10,000 रुपये बकाया है, हम हर दिन मंडी का चक्कर लगा रहे हैं।”
किसान ताराचंद, निवासी फुलहर बोले —
“हमारा ₹2,24,000 बकाया है, अब समझ नहीं आता किससे न्याय मांगे।”
किसान गंगाराम, निवासी अड़ौली ने कहा —
“हमारा ₹2,24,000 फंसा है, घर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं।”
किसान झम्मनलाल, निवासी अभयराजपुर ने कहा —
“हमारा ₹1,72,000 बकाया है, हर दिन उम्मीद टूटती जा रही है।”
किसान मुरारीलाल, बोले —
“हमारा ₹2,50,000 रुपये आढ़ती पर बकाया है, अब खेत में बीज डालने के भी पैसे नहीं बचे।”
और किसान सतनाम सिंह, ने रोते हुए कहा —
“हमारा ₹9 लाख बकाया है, प्रियांशु अग्रवाल दुकान बंद करके फरार हो गया। यह किसानों की लूट है।”
किसान प्रीतम राम, निवासी उदयपुर अभयराजपुर ने बताया —
“करीब ₹2,98,000 हमारे भी फंसे हुए हैं। सरकार अगर सुनवाई नहीं करेगी तो हम सब मंडी में ही धरना देंगे।”
मंडी सचिव की रिपोर्ट ने खोले कई राज — जांच में निकली भारी लापरवाही
मंडी सचिव प्रवीण कुमार अवस्थी के आदेशानुसार,
जहीर अहमद (मंडी सहायक) ने जांच की और 28 अक्टूबर 2025 को रिपोर्ट दी।
रिपोर्ट में साफ लिखा गया —
“फर्म पर कई दिनों से ताला है, मालिक किसानों का पैसा लेकर भाग गया है, मोबाइल स्विच ऑफ है, और मंडी राजस्व ₹53,321 की देनदारी शेष है।”
यानी मामला केवल किसानों का नहीं, मंडी राजस्व की चोरी का भी है!
और फिर प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आई — लेकिन धीमी चाल से, जैसे किसी को बचाने की कोशिश हो रही हो।
मंडी समिति ने दिए आदेश — पर किसान बोले, “अब क्या फायदा?”
कृषि उत्पादन मंडी समिति, पीलीभीत ने तत्काल प्रभाव से
फर्म “बालमुकुन्द राममूर्ति” का लाइसेंस निलंबित कर दिया।
आदेश में लिखा गया —
“फर्म ने मंडी अधिनियम 1964 और नियमावली 1965 का उल्लंघन किया है।
मंडी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया है।
अतः लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है और फर्म को 15 दिन में स्टॉक का निस्तारण करना होगा।”
आदेश पर हस्ताक्षर हैं —
(प्रवीण कुमार अवस्थी, सचिव) और (विजय वर्धन तोमर, सभापति)
पर किसान सवाल उठा रहे हैं —
“अगर फर्म भाग चुकी है, तो 15 दिन में स्टॉक का निस्तारण कौन करेगा?”
मंडी प्रशासन पर भी सवाल — “कहाँ थी निगरानी जब 10 करोड़ की फसल बिक रही थी?”
किसानों का गुस्सा सिर्फ आढ़ती पर नहीं, मंडी प्रशासन पर भी भड़क उठा है।
किसानों का कहना है कि मंडी में बिना सचिव और निरीक्षक की निगरानी के इतना बड़ा लेन-देन संभव ही नहीं था।
फिर कैसे किसी व्यापारी ने तमाम के किसानों से करोड़ों की फसल खरीद ली और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी?
“मंडी सचिव, निरीक्षक और अध्यक्ष — सबकी आँखों के सामने यह धोखाधड़ी होती रही। अगर यही हाल रहा, तो किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे,”
किसानों ने अपने बयानों में कहा।
किसानों का फरियादी काफिला अब जिलाधिकारी के दरवाजे पर
जब मंडी प्रशासन से राहत नहीं मिली, तो थके-हारे किसान अब जिलाधिकारी कार्यालय पहुँच गए।
डीएम ने “जांच और कार्रवाई” का आश्वासन तो दिया है,
पर हकीकत यह है कि अब तक एक भी किसान को पैसा वापस नहीं मिला।
हर दिन किसान अपनी ही मेहनत की कीमत के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
हमारा पैसा नहीं मिला तो धरना देंगे — किसानों का अल्टीमेटम
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बलजिन्दर सिंह मान ने चेतावनी दी —
“अगर 7 दिन के अंदर किसानों को उनका पैसा नहीं मिला, तो हम मंडी गेट पर धरना देंगे।
ये किसानों की लूट है, और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सवाल जो मंडी प्रशासन से देश पूछ रहा है —मंडी में 10 करोड़ का कारोबार हुआ — कोई अधिकारी सोया क्यों था?
मंडी निरीक्षक जहीर अहमद ने जांच रिपोर्ट तो दी, लेकिन कार्रवाई क्यों देर से हुई?
क्या मंडी प्रशासन की भूमिका सिर्फ “रिपोर्ट बनाने” तक सीमित है?
किसानों के रुपये वसूलने की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई या नहीं?
क्या फरार आढ़ती की सम्पत्ति कुर्क करने की पहल हुई है?
यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, किसानों की आत्मा पर हमला है!
यह घटना केवल एक व्यापारी की हरकत नहीं —
यह किसानों की मेहनत, उनकी उम्मीदों और उनके विश्वास की डकैती है।
पीलीभीत मंडी, जो ईमानदारी की पहचान थी, अब प्रशासनिक सुस्ती और व्यापारी के लालच की वजह से कलंकित हो चुकी है।
किसान अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद कोई अधिकारी उनकी सुन लेगा —
पर सवाल यह है कि क्या सरकार इस 10 करोड़ के घोटाले पर कार्रवाई करेगी या फिर इसे भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?
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