Pilibhit: खेत में मिला तेंदुआ का शव—गांव में दहशत और सवाल दोनों बढ़े!
Pilibhit: तेंदुए का शव मिलने से पूरे गांव में दहशत
सनसनीखेज सुबह, तेंदुए का शव गन्ने के खेत में मिला
पीलीभीत के बरखेड़ा क्षेत्र का पिपरा घास गांव मंगलवार सुबह ऐसे दृश्य का गवाह बना, जिसने पूरे इलाके में खौफ और दहशत फैला दी। सुबह करीब 5 बजे तालाब के किनारे स्थित गन्ने के खेत में तेंदुए का शव पाया गया। यह दृश्य न सिर्फ ग्रामीणों को हिला कर रख गया, बल्कि वन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर गया।
गांव में खौफ, बच्चे घरों में कैद
घटना की जानकारी मिलते ही गांव में भय का माहौल बन गया। लोग खेतों की ओर जाने से डरने लगे और बच्चों को सुरक्षित घरों में बंद कर दिया गया। खेतों और रास्तों में सन्नाटा छा गया । महिलाएं अपने बच्चों को संभालते हुए घरों में कैद हो गईं। ग्रामीणों का कहना था कि तेंदुआ बहुत कमजोर हालत में दिखाई दे रहा था—कभी सांस लेता, कभी स्थिर हो जाता।
घायल या हादसे का शिकार? ग्रामीणों की पहली नजर
कुछ ग्रामीणों ने तेंदुए को घास के बीच हलचल करते देखा। उन्हें तुरंत समझ आ गया कि यह कोई साधारण जानवर नहीं, बल्कि बड़ा, वयस्क और गंभीर रूप से घायल तेंदुआ है। कुछ लोगों ने दूरी बनाए रखते हुए वीडियो भी बनाया। ग्रामीणों का मानना था कि तेंदुआ या तो सड़क हादसे का शिकार हुआ या किसी अन्य शिकारी से लड़ाई में घायल हुआ।
सूचना देने के बावजूद वन विभाग की देरी ने बढ़ाया डर
ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। इससे गांव में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गए। लोगों को डर था कि अगर तेंदुआ अचानक उग्र हो जाता तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।
अंत में खुला सच, तेंदुआ मृत मिला
जब वन विभाग की टीम आखिरकार मौके पर पहुंची, तो उन्होंने पाया कि तेंदुआ पहले ही मृत हो चुका था। सामाजिक वानिकी के डीएफओ भारत कुमार ने बताया कि तेंदुआ पहले घायल दिख रहा था, लेकिन जब उसे पकड़ने की कोशिश की गई तो पता चला कि उसकी सांसें थम चुकी हैं। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और रिपोर्ट से मौत के कारण का पता चलेगा।
सवाल बना रह गया, तेंदुआ गांव तक कैसे पहुँचा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि तेंदुआ गांव तक कैसे पहुंचा। क्या वह जंगल से भटका या सड़क हादसे का शिकार हुआ? या यह इंसानों और जंगली जीवों के बीच बढ़ते संघर्ष का नया संकेत है? जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच की दूरी दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती तस्वीर
पीलीभीत के जंगलों में खेती का विस्तार, पानी की कमी और मानव दखल ने जानवरों को गांव की ओर धकेला है। इंसानी गतिविधियों की वजह से जानवर भटक सकते हैं, और ऐसे हालात भविष्य में टकराव बढ़ा सकते हैं।
ग्रामीणों की मांग, सुरक्षा और तेजी से कार्रवाई
ग्रामीण अब चाहते हैं कि गांव और खेतों में गश्त बढ़ाई जाए, रिस्पॉन्स टाइम सुधारा जाए और वन विभाग की मोबाइल यूनिट तुरंत मदद के लिए तैयार रहे। उनका कहना है कि अगर वन विभाग समय पर पहुंचता, तो शायद तेंदुए को बचाया जा सकता था और ग्रामीणों का भय कम होता।
सिर्फ एक तेंदुए की मौत नहीं, बड़ी चेतावनी है
यह घटना केवल एक तेंदुए की मौत नहीं है। यह संकेत है कि जंगलों और इंसानी बस्तियों के बीच की दीवारें कमजोर हो रही हैं। वन्यजीव संरक्षण, ग्रामीण सुरक्षा और विभागीय जिम्मेदारी—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में ऐसे टकराव और बढ़ सकते हैं, जिनका नुकसान न जानवर सह पाएंगे, न इंसान।
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