Pilibhit: गोपाष्टमी — डीएम ने किया गौ पूजन, दिया ‘गौ सेवा’ का संदेश, जानिए इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता
Pilibhit: देवीपुरा गौशाला में हर्षोल्लास के साथ मनी गोपाष्टमी — जिलाधिकारी ने किया गौ पूजन, प्रशासन ने दिया ‘गौ सेवा’ का संदेश
पीलीभीत लोकआस्था, परंपरा और प्रशासनिक संवेदनशीलता का संगम उस समय देखने को मिला जब जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह स्वयं देवीपुरा गौशाला पहुंचे और गोपाष्टमी पर्व के अवसर पर हवन एवं गौ पूजन कर जनता को “गौ सेवा” का प्रत्यक्ष संदेश दिया।
धूप से सजी सुबह और भक्ति की सुगंध में डूबी गौशाला में जिलाधिकारी ने न केवल पूजन-अर्चन किया, बल्कि साफ-सफाई और गौशाला की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण भी किया।
गोपाष्टमी पर्व — धर्म, श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम
गोपाष्टमी, भारतीय संस्कृति में गौ पूजन का महापर्व माना जाता है।
कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मनाया जाने वाला यह पर्व, मान्यता अनुसार उस समय का प्रतीक है जब भगवान श्रीकृष्ण ने पहली बार गौ पालन की जिम्मेदारी संभाली थी।
कहा जाता है कि इसी दिन नंदबाबा ने श्रीकृष्ण को गायों की देखभाल के लिए भेजा था — तभी से इस दिन को “गोपाष्टमी” के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन गौ पूजन, हवन, दान और भंडारा करने से सात जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में समृद्धि एवं संतोष का वास होता है।
प्रशासन की संवेदनशील पहल — ‘गौ सेवा’ को बनाया जनआंदोलन
पीलीभीत प्रशासन ने इस धार्मिक अवसर को जनसहभागिता से जोड़ते हुए गौ संरक्षण और स्वच्छता को केंद्र में रखा।
जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने गौ माता को केला और गुड़ खिलाकर प्रतीक रूप में सेवा का भाव प्रकट किया और उपस्थित ग्रामीणों से कहा —
“गौ सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”
इस मौके पर उन्होंने गौशाला में स्वच्छता, चारे की गुणवत्ता और चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कहा कि गौवंश के लिए सभी मूलभूत सुविधाएँ हर समय उपलब्ध रहें।
भक्ति और उत्सव का माहौल — ग्रामीणों ने हर्षोल्लास से मनाया पर्व
गौशाला में इस अवसर पर हवन, आरती और भंडारे का आयोजन किया गया।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करते हुए “जय गोमाता” के जयघोष से वातावरण को पवित्र कर दिया।
कार्यक्रम में सोशल हेरीटेज फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को गौ माता की प्रतिमा भेंट की, जो प्रशासन और समाज के बीच सहयोग और संस्कृति के आदान-प्रदान का प्रतीक बना।
अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र कुमार श्रीवास,
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पी.के. त्यागी,
खण्ड विकास अधिकारी लियाकत अली,
ग्राम सचिव, सोशल हेरीटेज फाउंडेशन के प्रतिनिधि और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सभी ने जिलाधिकारी के साथ मिलकर गौ पूजन किया और “गौ सेवा – राष्ट्र सेवा” के भाव को जनसंदेश के रूप में दोहराया।
धार्मिक मान्यता और पर्यावरणीय दृष्टि
गोपाष्टमी पर्व न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के सम्मान का भी संदेश देता है।
गौवंश भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और यही कारण है कि प्रशासन ने इस पर्व के माध्यम से लोगों को स्थानीय गौशालाओं के संरक्षण, गोबर से जैविक खाद बनाने, और गौ पालन को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रशासन का संदेश
“गौ सेवा में निहित है आत्मा की शुद्धि, समाज की समरसता और पर्यावरण की रक्षा — यही गोपाष्टमी का सच्चा संदेश है।”
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