Pilibhit: दावों की पोल खुली, छतों पर जिंदगी गुजारने को मजबूर ग्रामीण, अब हरकत में आया प्रशासन

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Pilibhit: पीलीभीत में शारदा-देवहा नदियों के उफान से गाँव डूबे, लोग छतों पर जिंदगी काटने को मजबूर। दावों की पोल खुली तो अब हरकत में आया प्रशासन।

Pilibhit में बाढ़ का कहर: प्रशासन के दावों की पोल, छतों पर जिंदगी गुजारने को मजबूर ग्रामीण

पीलीभीत जिले में शारदा और देवहा नदियों के उफान ने बाढ़ की भयावह स्थिति पैदा कर दी है। लगातार बारिश और नदियों में पानी छोड़े जाने के कारण जिले के 45 गाँवों की लगभग 55 हजार की आबादी बुरी तरह प्रभावित है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों के दावे कर रहा है, लेकिन बीसलपुर तहसील के कितनापुर गाँव की तस्वीरें इन दावों की पोल खोलती नजर आती हैं। यहाँ लोग पिछले पाँच दिनों से चारों ओर से पानी से घिरे हुए हैं और प्रशासन की मदद की आस लगाए बैठे हैं।

Pilibhit:गाँव में हालात बेहद गंभीर

कितनापुर गाँव पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है। देवहा नदी के उफान से हालात ऐसे बने कि कई घरों में पानी भर गया। कुछ लोग मजबूरी में छतों पर शरण लिए हुए हैं तो कुछ ग्रामीण दूसरों के घरों में रहकर गुजारा कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अभी तक प्रशासन की ओर से इस गाँव में कोई राहत सामग्री नहीं पहुँचाई गई। न खाने-पीने की व्यवस्था है और न ही दवा या सुरक्षित ठिकाने की।

Pilibhit:ग्राम प्रधान का दर्द

ग्राम प्रधान ने स्थिति पर नाराजगी और निराशा जताते हुए कहा कि—
“हमारा गाँव कई दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है, लेकिन अब तक प्रशासन ने किसी भी तरह की मदद नहीं की। न राशन मिला, न ही दवा, और न ही बचाव दल यहाँ पहुँचा। ग्रामीण उधारी पर भोजन कर रहे हैं और खुद ही अपनी जान बचाने को मजबूर हैं।”

उनका कहना है कि लगातार अपील करने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा और गाँव को मानो नक्शे से गायब कर दिया गया हो।

Pilibhit:प्रशासन का जवाब, डीएम पीलीभीत का बयान

ग्राम प्रधान की अपील और मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
हमें ग्राम प्रधान द्वारा भेजे गए वीडियो बयान और मीडिया के माध्यम से गाँव की स्थिति की जानकारी मिली है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए मैंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मैं स्वयं पूरी टीम के साथ गाँव का दौरा करने जा रहा हूँ।

डीएम ने आगे कहा कि—
“ग्रामीणों की जो भी समस्याएँ हैं, उनका तुरंत समाधान किया जाएगा। हर हाल में बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाई जाएगी। बाढ़ पीड़ितों की मदद करना इस समय हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

यह घटना साफ दिखाती है कि एक ओर जहाँ प्रशासन कागज़ों पर राहत कार्यों की लंबी-चौड़ी सूची गिनाता है, वहीं ज़मीनी हकीकत कहीं अधिक भयावह है। गाँववाले कई दिनों से बाढ़ में फंसे हुए हैं और मूलभूत जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। ग्राम प्रधान की शिकायत प्रशासन की लापरवाही पर सीधा सवाल उठाती है। हालाँकि, डीएम का आश्वासन ग्रामीणों के लिए उम्मीद की किरण है कि अब जाकर उनकी समस्याओं का समाधान होगा।

कितनापुर गाँव की यह दास्तान सिर्फ एक गाँव की नहीं बल्कि उन तमाम बाढ़ प्रभावित इलाकों की आवाज़ है जहाँ लोग आज भी राहत और मदद की आस में हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल दावों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में हर बाढ़ पीड़ित तक मदद पहुँचाए। क्योंकि संकट की इस घड़ी में सरकारी तत्परता ही जनता का सहारा बन सकती है।

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