पीलीभीत जलभराव: शहर में हाहाकार, एक रास्ता ही बचा, ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले बने ‘मौसमी व्यापारी’

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पीलीभीत। बारिश थमी जरूर है, लेकिन उसका कहर अब भी पीलीभीत शहरवासियों की सांसें रोक रहा है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि पूरा शहर मानो एक ‘जलनगर’ में तब्दील हो चुका है। कलेक्ट्रेट से लेकर टनकपुर हाइवे तक हर ओर पानी ही पानी है। बरहा रेलवे क्रॉसिंग से लेकर पीलीभीत स्टेशन तक रेल पटरियों के पास जलभराव ने आवागमन को मुश्किल बना दिया है। देवहा पुल से ईदगाह मार्ग तक पानी के बढ़ते सैलाब ने लोगों को फंसा दिया है। खाकरपुल से मझोला मार्ग तक की तस्वीर और भी डराने वाली है, क्योंकि सड़क पूरी तरह से डूब चुकी है।

सिर्फ एक रास्ता बचा शहर में एंट्री के लिए

शहर में प्रवेश करने के लिए अब सिर्फ असम चौराहा रोड ही खुला है, लेकिन हजारों लोगों के लिए यह एकमात्र रास्ता किसी बोतल की गर्दन जैसा साबित हो रहा है। हर किसी का गुजर पाना यहां से संभव नहीं। ऐसे में लोग मजबूरी में घंटों तक फंसे रहते हैं।

ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले बने ‘उम्मीद की सवारी’

जहां आम आदमी परेशान है, वहीं जिनके पास ट्रैक्टर-ट्रॉली है, उनके तो मानो ‘सोने के दिन’ आ गए हैं। इन लोगों ने इस आपदा को ‘अवसर’ में बदल लिया है। शहर में जलभराव के बीच साइकिल, बाइक और पैदल चलने वाले लोग अब ट्रैक्टर-ट्रॉली वालों के रहमोकरम पर हैं।

पैदल यात्रियों से 10 से 50 रुपए तक की सवारी वसूली जा रही है।

बाइक और साइकिल का किराया इससे अलग है।

रोजाना हजारों रुपए की कमाई हो रही है और मजबूर लोग चाहकर भी विरोध नहीं कर पा रहे।

आम जनता की बेबसी और प्रशासन की चुप्पी

लोगों का कहना है कि शहर की मुख्य सड़कों पर अगर प्रशासन ने पहले से नाले और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कर दी होती तो आज यह हालात न होते। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा संकट में हैं। हर कोई सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक पीलीभीत ऐसे ही जलभराव में डूबता रहेगा?

यह सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारी की पोल खोलती हुई तस्वीर है। पीलीभीत की जनता बुरी तरह से त्राहि-त्राहि कर रही है और जिम्मेदार अब भी खामोश हैं।

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