प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा का निधन, पीएम मोदी बने थे उनके राज्याभिषेक प्रस्तावक
मिर्जापुर। भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया ने एक महान विभूति खो दी है। द्मविभूषण शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्रा का मीरजापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी संगीत यात्रा और योगदान ने न केवल शास्त्रीय संगीत प्रेमियों बल्कि पूरे देश को प्रभावित किया।
पंडित मिश्रा का अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाएगा। उनके निधन की खबर सुनकर संगीत जगत और संस्कृति प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है।
शास्त्रीय संगीत में अमूल्य योगदान
पंडित छन्नूलाल मिश्रा का नाम शास्त्रीय संगीत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने अपनी आवाज़ और गायकी से कई शास्त्रीय रचनाओं को आम जनता तक पहुँचाया। उनका संगीत न केवल सजीव था बल्कि भावनाओं और संस्कारों का प्रतीक भी माना जाता था।
इसके साथ ही पंडित मिश्रा ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी गायकी से दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी गाई हुई कई रचनाएँ आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
हुआ पुरस्कार और सम्मान
अपने संगीत योगदान के लिए उन्हें द्मविभूषण जैसे उच्चतम सम्मान से नवाजा गया। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए उनके राज्याभिषेक प्रस्तावक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। यह उनके संगीत और सांस्कृतिक योगदान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक है।
पंडित मिश्रा की गायकी में जो भाव और शुद्धता थी, वह उन्हें आज भी युवा कलाकारों के लिए आदर्श बनाती है। उन्होंने अपने जीवन में संगीत को केवल कला नहीं बल्कि जीवन का संदेश बनाया।
पढ़िए जीवन और प्रारंभिक यात्रा
पंडित छन्नूलाल मिश्रा का जन्म और प्रारंभिक जीवन संगीत के बीच ही बीता। उन्होंने अपने गुरु से शास्त्रीय संगीत की परंपरा को सीखते हुए उसे जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। उनके जीवन में संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं था बल्कि संस्कृति और भारतीय परंपरा का संरक्षण भी था।
इसके अलावा, पंडित मिश्रा ने अपने संगीत के माध्यम से समाज में नैतिक और सांस्कृतिक संदेश भी फैलाए। उनके गीतों में भारतीय संस्कृति की गहराई और आध्यात्मिकता स्पष्ट झलकती थी।
बॉलीवुड में रहा बड़ा योगदान
पंडित मिश्रा ने केवल शास्त्रीय मंच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी गायकी से दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी मधुर आवाज़ ने कई फिल्मों के गीतों को यादगार बना दिया। यह दर्शाता है कि उनका संगीत पारंपरिक और आधुनिक दोनों ही क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावशाली था।
संगीत जगत में शोक की लहर
उनके निधन पर संगीतकार, कलाकार और जनता ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कई प्रमुख शास्त्रीय और आधुनिक कलाकारों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि पंडित मिश्रा का संगीत जीवन भर प्रेरणा देता रहेगा।
उनके निधन से शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक अमिट शून्य पैदा हो गया है। उनके द्वारा गाए गए गीत, शास्त्रीय रचनाएँ और उनकी गायकी आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल धरोहर के रूप में बनी रहेंगी।