पढ़िए काशी विश्वनाथ मंदिर के 11 रहस्यमयी तथ्य: जानिए क्यों बाबा विश्वनाथ के दर्शन से मिलती है मोक्ष की प्राप्ति

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काशी विश्वनाथ मंदिर: 11 रहस्यमयी तथ्य जो बताते हैं क्यों मिलती है यहां मोक्ष की प्राप्ति

वाराणसी में स्थित विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में अपनी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। यह वह स्थान है जहां भगवान शिव स्वयं मुक्ति का द्वार खोलते हैं। कहा जाता है कि जो भी श्रद्धा भाव से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करता है, उसे मोक्ष प्राप्त होता है।आइए जानते हैं काशी विश्वनाथ मंदिर के वे 11 अद्भुत और रहस्यमयी तथ्य, जो इस मंदिर को अद्वितीय बनाते हैं—

1. शिव और शक्ति का एक साथ विराजमान होना

काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग दो भागों में विभाजित है। दाहिने भाग में शक्ति स्वरूपा मां भगवती और बाएं भाग में भगवान शिव विराजमान हैं। इस अद्वितीय संयोजन को ‘वाम रूप’ कहा जाता है। यही कारण है कि काशी को “मुक्ति क्षेत्र” कहा जाता है।

2. मुक्ति का द्वार केवल काशी में

देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मोक्ष का मार्ग केवल काशी में खुलता है। कहा जाता है कि यहां मृत्यु के बाद मनुष्य को दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता। भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों को तारक मंत्र देकर तारते हैं।

3. श्रृंगार के समय मूर्तियां पश्चिममुखी होती हैं

मंदिर में श्रृंगार के समय सभी मूर्तियां पश्चिम दिशा की ओर मुख करती हैं। यह इस मंदिर की एक विशेष परंपरा है। यहां शिव और शक्ति का संयुक्त रूप दर्शन देता है, जो संसार में कहीं और नहीं मिलता।

4. गर्भगृह का शिखर श्री यंत्र से मंडित

मंदिर के गर्भगृह का शिखर श्री यंत्र से अलंकृत है। यह स्थान तांत्रिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यहां साधक श्री यंत्र-तंत्र सिद्धि के लिए ध्यान करते हैं।

5. तंत्र के चार प्रमुख द्वार

काशी विश्वनाथ दरबार में तंत्र दृष्टि से चार प्रमुख द्वार हैं – शांति द्वार, कला द्वार, प्रतिष्ठा द्वार और निवृत्ति द्वार। इन चारों द्वारों का अपना विशिष्ट तांत्रिक और आध्यात्मिक महत्व है। दुनिया में ऐसा कोई और स्थान नहीं जहां शिव-शक्ति और तंत्र तीनों का अद्भुत संगम हो।

6. ईशान कोण में स्थित ज्योतिर्लिंग

गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग ईशान कोण में विराजमान है। ईशान कोण का अर्थ होता है “विद्या और कला का पूर्ण केंद्र”। यहां दस महाविद्याओं का प्रतिनिधित्व होता है और भगवान शिव स्वयं ईशान रूप में पूजे जाते हैं।

7. दक्षिण मुखी प्रवेश द्वार का रहस्य

मंदिर का मुख्य द्वार दक्षिण मुखी है जबकि भगवान विश्वनाथ का मुख अघोर दिशा की ओर है। इसलिए श्रद्धालु जब मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले अघोर रूप के दर्शन करते हैं। कहा जाता है कि इस दर्शन मात्र से मनुष्य के पूर्वजन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं।

8. भूगोल में त्रिशूल पर विराजते बाबा

काशी विश्वनाथ का भूगोल भी अद्भुत है। बाबा त्रिकंटक (त्रिशूल) पर विराजमान माने जाते हैं। मैदागिन क्षेत्र को मंदाकिनी नदी और गौदोलिया क्षेत्र को गोदावरी नदी से जोड़ा जाता है। इन दोनों के बीच ज्ञानवापी क्षेत्र है, जहां ज्योतिर्लिंग स्थित है। इसीलिए कहा जाता है कि काशी में कभी प्रलय नहीं आ सकता, क्योंकि यह भगवान के त्रिशूल पर स्थित है।

9. गुरु और राजा रूप में बाबा

दिनभर बाबा विश्वनाथ गुरु रूप में काशी में भ्रमण करते हैं और रात्रि में नौ बजे जब उनकी श्रृंगार आरती होती है, तब वे राजा के रूप में सजते हैं। इसीलिए उन्हें “राजराजेश्वर” कहा जाता है।

10. अन्नपूर्णा देवी और बाबा की प्रतिज्ञा

बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा देवी ने प्रतिज्ञा की है कि काशी में कोई भी भूखा नहीं रहेगा। मां अन्नपूर्णा अन्न प्रदान करती हैं, जबकि बाबा मृत्यु के बाद मुक्ति प्रदान करते हइसीलिए उन्हें “ताड़केश्वर” भी कहा जाता है।

11. अघोर दर्शन से पापों का क्षय

बाबा विश्वनाथ के अघोर दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा औघड़ रूप में बारात निकालते हैं, जिसमें **देवता, पशु, पक्षी, मानव और अदृश्य शक्तियां** सभी शामिल होती हैं। यह दृश्य शिव की करुणा और सर्वसमावेशिता का प्रतीक है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का आध्यात्मिक संदेश

काशी विश्वनाथ मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि यह मोक्ष का द्वार है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु को यह अनुभव होता है कि जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति केवल ज्ञान और भक्ति के संगम से ही संभव है। बाबा विश्वनाथ हमें यह सिखाते हैं कि सच्ची आस्था और समर्पण से ही आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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