Nitish Kumar की भावनात्मक अपील ‘खुल कर बोले’ खराब मौसम और चुनावी दांव के बीच जनता से सीधे संवाद
बिहार NDA टीम के कप्तान नीतीश कुमार की भावनात्मक अपील: ‘एक मौका और दीजिए’, खराब मौसम और चुनावी दांव के बीच जनता से सीधे संवाद
बारिश की बूँदें, तेज़ हवा और चुनावी सियासी हलचल — इन सबके बावजूद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनता से सीधे संवाद करने का मौका हाथ से जाने नहीं दिया। शनिवार को जारी उनके वीडियो संदेश में उन्होंने सिर्फ़ वोट की अपील नहीं की, बल्कि बीते दो दशकों की मेहनत, संघर्ष और बिहारियत की अस्मिता की कहानी भी हर बिहारी के सामने रख दी। उनका संदेश था स्पष्ट “एक मौका और दीजिए।”
वीडियो संदेश का पूरा घटनाक्रम
नीतीश कुमार ने वीडियो संदेश में कहा कि जब उन्हें बिहार की कमान मिली, तब स्थिति बेहद गंभीर थी। कानून-व्यवस्था चरमरा रही थी, महिलाओं की दशा दयनीय थी, और बिहारी कहलाना अपमान का विषय माना जाता था। उन्होंने बिहार की अस्मिता को बचाने और नए पहचान के लिए दिन-रात मेहनत की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किया। उनका संदेश केवल चुनावी अपील नहीं, बल्कि पिछले 20 वर्षों का राजनीतिक और भावनात्मक सार था।
बिहारी होना — अपमान से अस्मिता तक
नीतीश ने अपने पैगाम में 2005 की यादें ताज़ा कीं। उस समय बिहार की स्थिति दयनीय थी। कानून-व्यवस्था गड़बड़ थी, महिलाएं असुरक्षित थीं और विकास शब्द सिर्फ़ किताबों में था। उन्होंने खुद को बिहारियत की अस्मिता के रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, आज बिहार का नाम बेहतर बना है, उसका श्रेय ईमानदारी और मेहनत से किए गए कामों को जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके प्रयास जातीय और धार्मिक संतुलन के लिए थे। हिंदू, मुसलमान, सवर्ण, दलित, पिछड़ा या महादलित — सभी के उत्थान के लिए काम किया गया।
राजनीतिक रणनीति — पीएम मोदी की खुलकर तारीफ़ की
नीतीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार को हमेशा प्राथमिकता दी है। डबल इंजन की सरकार ने विकास की रफ्तार को बढ़ाया। विश्लेषकों के अनुसार, पीएम मोदी की तारीफ यह संकेत देती है कि जेडीयू पूरी तरह एनडीए के साथ चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संदेश विपक्षी गठबंधन को चुनौती देने और मतदाताओं को एकजुट रखने की रणनीति का हिस्सा है।
भावनात्मक अपील — अनुभव बनाम युवा ऊर्जा
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में भावनात्मक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने कामों को गिनाया और विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति में सुधार पर जोर दिया। बिहार की करीब 47% महिला मतदाता आबादी को साधने का यह एक स्पष्ट संकेत भी माना जा रहा है।
वहीं उनकी उम्र (74 वर्ष) और अनुभव को लेकर उन्होंने यह संदेश दिया कि अनुभव ही असली ताकत है। खराब मौसम में रोड शो और वीडियो संदेश से यह दिखाया गया कि वे चुनावी अखाड़े में पूरी तरह सक्षम हैं।
एक मौका और दीजिए — अंतिम भरोसे की पुकार
चुनाव के पहले चरण से कुछ ही दिन पहले यह अपील अहम है। नीतीश ने कहा कि अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए जनता उन्हें एक और मौका दे। यह संदेश उनके पूरे राजनीतिक और भावनात्मक सफर का सार है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ़ जनसंपर्क की रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक भरोसे को पक्का करने का प्रयास भी है।
नीतीश कुमार का यह वीडियो पैगाम बिहार के चुनावी माहौल में भावनात्मक, रणनीतिक और संवेदनशील तीनों पहलुओं का मिश्रण है। जनता और मतदाता तय करेंगे कि क्या यह अपील उन्हें विकास की निरंतरता और भरोसे का संकेत देती है, या पुराने वादों की पुनरावृत्ति मात्र है।
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