Navratri Special 2023 – पढ़िए मां चंद्रघंटा की कथा – असुरों से रक्षा करती है माता रानी की पूजा अर्चना

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UP Desk – मां चन्द्रघण्टा असुरों के विनाश हेतु मां दुर्गा के तृतीय रूप में अवतरित होती हैं। जो भयंकर दैत्य सेनाओं का संहार करके देवताओं को उनका भाग्य दिलाती हैं। भक्तों को वांछित फल दिलाने वाली हैं माँ चंद्रघंटा। आप सम्पूर्ण जगत की पीड़ा का नाश करने वाली हैं। जिससे समस्त शात्रों का ज्ञान होता है, वह मेधा शक्ति माँ चंद्रघंटा में ही है। भव्य सागर से उतारने वाली भी माँ चंद्रघंटा ही हैं। माता का मुख मंद मुस्कान से सुशोभित, निर्मल, पूर्ण चन्द्रमा के बिम्ब का अनुकरण करने वाला और उत्तम सुवर्ण की मनोहर कान्ति से कमनीय है। तो भी उसे देखकर महिषासुर को क्रोध हुआ और सहसा उसने उस पर प्रहार कर दिया।
 
महिषासुर ने मानी थी अपनी हार 
 
यह बड़े आश्चर्य की बात है कि जब देवी का वही मुख क्रोध से युक्त होने पर उदयकाल के चन्द्रमा की भांति लाल और तनी हुई भौहों के कारण विकराल हो उठा। तब उसे देखकर जो महिषासुर के प्राण तुरंत निकल गए। यह उससे भी बढ़कर आश्चर्य की बात है, क्योंकि क्रोध में भरे हुए यमराज को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है। देवी आप प्रसन्न हों। परमात्मा स्वरूपा आपके प्रसन्न होने पर जगत् का अभ्युदय होता है और क्रोध में भर जाने पर आप तत्काल ही कितने कुलों का सर्वनाश कर डालती हैं। यह बात अभी अनुभव में आयी है, क्योंकि महिषासुर की यह विशाल सेना क्षण भर में आपके कोप से नष्ट हो गयी है।
 
इसलिए माँ को कहा गया माँ चंद्रघंटा 
 
कहते है कि देवी चन्द्रघण्टा ने राक्षस समूहों का संहार करने के लिए जैसे ही धनुष की टंकार को धरा व गगन में गुंजा दिया। वैसे ही मां के वाहन सिंह ने भी दहाड़ना आरम्भ कर दिया और माता ने फिर घण्टे के शब्द से उस ध्वनि को और बढ़ा दिया, जिससे धनुष की टंकार, सिंह की दहाड़ और घण्टे की ध्वनि से सम्पूर्ण दिशाएं गूंज उठी। उस भयंकर शब्द व अपने प्रताप से वह दैत्य समूहों का संहार कर विजय हुईं।
 
माता रानी का ध्यान योग्य मंत्र का जाप करें 
 
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। 
प्रसादं तनुते महा चन्द्रघण्टेति विश्रुता। 

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