Mumbai Children Hostage Powai Studio: 17 मासूम बंधक बच्चे छुड़ाए गए, किडनैपर रोहित आर्या मारा गया

0
Mumbai Children Hostage Powai Studio: 17 मासूम बंधक बच्चे छुड़ाए गए, किडनैपर रोहित आर्या मारा गया

Mumbai Children Hostage Powai Studio: 17 मासूम बच्चों का डरावना कैद, रोहित आर्या की सनक ने हिला दी मुंबई

जहां मासूमियत को बनाया गया बंदी, वहीं पुलिस ने दिखाई अपनी बहादुरी — और एक कदम ने बदल दी 17 बच्चों की जिंदगी!

मुंबई पवई: यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन का भयावह थ्रिलर है। पवई के RA स्टूडियो में 17 मासूम बच्चों को बंधक बनाने वाला आरोपी रोहित आर्या मुंबई की सुरक्षा एजेंसियों और पूरे शहर को हिला कर रख गया। पांच दिनों तक चले इस खौफनाक घटनाक्रम ने न केवल बच्चों के परिवारों को आतंकित किया बल्कि प्रशासन और आम जनता के होश उड़ा दिए।

ऑडिशन का बहाना, मासूमियत का शिकार

बीते सप्ताह रोहित आर्या ने वेब सीरीज के ऑडिशन का झांसा देकर करीब 100 बच्चों को स्टूडियो बुलाया। प्रारंभ में अधिकांश बच्चों को बाहर भेज दिया गया, लेकिन 17 बच्चों को अंदर ही रोक लिया गया। दोपहर तक जब ये बच्चे घर नहीं लौटे, तो माता-पिता ने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस जब स्टूडियो पहुँची, तो देखा कि सभी दरवाजे अंदर से बंद हैं और खिड़कियों पर मोटे पर्दे व सेंसर लगे हैं। बच्चों की आवाज़ें अंदर से सुनाई दे रही थीं, परंतु आरोपी का कोई जवाब नहीं मिला।

 खिड़कियों में सेंसर, मिनी-कमांड सेंटर जैसी रणनीति

पुलिस ने जांच में पाया कि रोहित ने स्टूडियो की सभी खिड़कियों और दरवाजों पर सेंसर लगाए थे। किसी के आने-जाने या हलचल होने पर यह बीप करते थे। पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी ने जगह को मिनी-कमांड सेंटर में बदल दिया था। किसी भी कदम की हलचल उसके ध्यान में तुरंत आ जाती थी।

लेकिन यही सेंसर पुलिस के लिए मददगार साबित हुए। तकनीकी टीम ने सेंसर की फ्रीक्वेंसी ट्रेस की और डमी मूवमेंट करके रोहित का ध्यान भटकाया। बाथरूम की खिड़की, जहां सेंसर नहीं था, पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए इस्तेमाल किया।

बाथरूम से प्रवेश, 17 बच्चों की सकुशल रेस्क्यू

पुलिस ने बाथरूम की खिड़की तोड़कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। कई बच्चे सहमे हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें तुरंत संभाल लिया। इस ऑपरेशन के दौरान रोहित ने पैलेट गन से पुलिस पर फायरिंग की, कांच के शीशे टूट गए और कमरे में अफरा-तफरी मच गई। जवाबी कार्रवाई में QRT ने गोली चलाई, जिसमें रोहित आर्या गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे ट्रॉमा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

आरोपी रोहित आर्या की पृष्ठभूमि

जांच में पता चला कि रोहित नागपुर के एक स्कूल में प्रोफेसर रह चुका था। वह पहले “स्वच्छता अभियान” नामक प्रोजेक्ट के लिए सरकार से 1 करोड़ रुपये का फंड चाहता था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली। उसने दावा किया कि उसने अपने पैसों से 60–70 लाख रुपये खर्च किए। इस हताशा और मानसिक अस्थिरता ने उसे इस खौफनाक कदम पर मजबूर किया।

न मांगी कोई रकम, न कोई शर्त — फिर भी 17 बच्चों को बंधक

रोहित ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया और स्पष्ट किया कि वह आतंकवादी नहीं है, उसे पैसे नहीं चाहिए। उसका उद्देश्य केवल कुछ लोगों से बातचीत करना था। फिर भी उसने बच्चों को कैद में रखा, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या मानसिक अस्थिरता, व्यक्तिगत हताशा या किसी और की मदद ने उसे यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

मुंबई पुलिस का अद्भुत ऑपरेशन

पुलिस और QRT ने मिलकर रणनीति बनाई। बाथरूम की खिड़की से प्रवेश कर बच्चों को क्रमशः सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान आरोपी ने एयर गन से पुलिस पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे घायल किया।

सभी 17 बच्चे सकुशल हैं और परिवारों को सौंप दिए गए। पुलिस ने मौके से एयर गन, सेंसर डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं। फॉरेंसिक टीम यह जांच कर रही है कि क्या ये सेंसर और गैजेट्स उसने स्वयं बनाए या किसी की मदद ली।

अगले कदम और जांच

पुलिस फॉरेंसिक, डिजिटल और व्यवहारिक जांच में जुटी है। आरोपी की मानसिक स्थिति, पिछले आंदोलनों और सरकार के साथ उसके संघर्ष की पड़ताल की जा रही है। बच्चों की सुरक्षा और परिवारों की मानसिक सहायता के लिए साइकोलॉजिकल काउंसलिंग भी आयोजित की जा रही है।

मुंबई पवई किडनैपिंग कांड ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि कैसे व्यक्तिगत हताशा और मानसिक अस्थिरता मासूमियत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

Pilibhit: 10 करोड़ लेकर आढ़ती फरार, लुटे किसान – मंडी प्रशासन पर सवाल!

About The Author

Leave a Reply

Discover more from ROCKET POST LIVE

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading