Meerut: 1,460 दुकान मालिकों को नोटिस, व्यापारी अनिश्चितकालीन धरने पर

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Meerut: सेंट्रल मार्केट में 1,460 दुकानों को अवैध बताकर नोटिस, व्यापारियों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर सरकार से रेगुलराइजेशन की मांग की।

Meerut: धड़कते दिल, टूटते सपने — सेंट्रल मार्केट, मेरठ में व्यापारियों का अनिश्चितकालीन धरना

अवैध दुकानों पर कार्रवाई की तलवार, व्यापारियों में हड़कंप व आक्रोश

मेरठ: शहर के हृदयस्थल में स्थित सेंट्रल मार्केट में फिर एक बार जीवन-जुझारू व्यापारियों का संकट मोड़ पर आ गया है। अभी कुछ समय पहले भूखंड संख्या 661/6 पर स्थित अवैध कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलने का दर्द व्यापारी अभी भुला भी नहीं पाए थे, कि अब वहाँ आवास विकास परिषद (ए.वी.पी.) द्वारा 31 भूखंडों पर बनी करीब 1,460 अवैध दुकानों को नोटिस जारी कर दिया गया है — जिसका असर मार्किट को बंद करने तथा धरने पर बैठने तक पहुँच गया है।

कार्रवाई की पेशी — तलवार अब दूसरी ओर लटकी

जानकारी के अनुसार, ए.वी.पी. ने इन 31 भूखंडों पर स्थित दुकानों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी कर दिए हैं। इन दुकानों के स्वामी और दुकानें चलाने वाले व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से अपने व्यवसाय से जुड़ी पूंजी लगाई है, परिवार का जीवन अब इसी व्यवसाय पर टिका है। अब अचानक ऐसी स्थिति में उन्हें सामना करना पड़ रहा है कि उनके रोजगार, उनके परिवार का भविष्य और उनकी दुकानें सब कुछ अनिश्चितता के घेरे में आ गए हैं।

व्यापारियों का गुस्सा — बंद का आह्वान, सड़क पर धरना

क्रोधित व्यापारियों ने मार्केट बंद करने का अनिश्चितकालीन निर्णय लिया है। उन्होंने शांति मार्च निकालकर विरोध जताया है और सरकार से निम्न मांगें रखी हैं:

इन दुकानों को रेगुलराइज किया जाए, ताकि व्यवसाय सुरक्षित हो सके।

आवास विकास परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों व प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

स्वयं व्यापारियों को समय-सीमा दी जाए जिससे वे पुनर्व्यवस्था कर सकें।

मार्केट अध्यक्ष जितेंद्र अग्रवाल तथा व्यापारी नेता निमित जैन ने बताया कि “हजारों लोगों के रोजगार का संकट गहरा गया है। हमें न्याय के साथ-साथ व्यवहारिक समाधान चाहिए।”

पिछले हादसे की गूंज — चेतावनी कि ध्वस्तीकरण का मंज़र फिर दोहराया जा सकता है

कुछ दिन पहले ही उसी मार्किट के भूखंड 661/6 पर स्थित अवैध निर्माण को आवास विकास परिषद के बुलडोजर का सामना करना पड़ा था, जहाँ लगभग 22 दुकानों का ध्वस्तीकरण किया गया था। इस कार्रवाई ने व्यापारियों को चेताया था कि व्यवस्था अब ढीली नहीं रहने वाली।
इस बार-बार की कार्रवाई ने संकेत दिया है कि प्रशासन और नियामक संस्था अब “अनदेखी सहन नहीं करेगी” का सूर भेज चुकी है — और इसका असर इस वक्त मार्केट के व्यापारियों की चिंता बढ़ा  रहा है।

नीति-विचार व प्रणालीगत प्रश्न

यह केवल एक मार्केट  की समस्या नहीं है — यह संकेत है उस गहरे प्रश्न का जहाँ व्यापार, नियोजन, विधि-व्यवस्था व भ्रष्टाचार एक जटिल गाँठ बन चुके हैं।

कैसे इतने भूखंडों पर इतने वर्षों तक अवैध निर्माण टिक पाया?

क्या नियोजन-प्राधिकरण, भूमि स्वामी, दुकानदार — सब मिलकर व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ा रहे थे?

नियामक संस्थाओं की भूमिका कितनी निष्पक्ष थी?

अब इस कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा — सिर्फ ध्वस्तीकरण या पुनर्व्यवस्था?

कारोबार की दुनिया चेत रही है

जितेंद्र अग्रवाल कहते हैं: “हमने अपनी जीवन कुर्सी इस दुकान पर टिका रखी थी। अब इस तरह अचानक नोटिस आ जाना हमारे लिए झटका है।”
निमित जैन का कहना है: “सरकार से हमारा अनुरोध है, हमें समय दीजिए, हमें रेगुलराइज कीजिए — ध्वस्तीकरण से कोई समाधान नहीं निकलता।”

सेंट्रल मार्केट की यह घटना बस एक स्थल की तस्वीर नहीं, बल्कि वहाँ के व्यापार-जीवन, नियोजन की कमियाँ व सत्ता-गति का संघर्ष बयां करती है। जहाँ एक ओर प्रशासन ने तय कर लिया है कि अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर हजारों व्यक्ति अपनी आजीविका बचाने के लिए सड़क पर उतर आए हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और नियामक संस्था किस तरह इस संकट को न्यायसंगत व टिकाऊ समाधान में बदल पाएँगे — या फिर यह सिर्फ एक और ध्वस्तीकरण की अफसोस-कहानी बनकर रह जाएगी।

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