Interfaith love marriage: लखीमपुर खीरी में दो सगी मुस्लिम बहनों ने हिंदू प्रेमियों के साथ विवाह रचाया

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Interfaith love marriage: दो सगी मुस्लिम बहनों ने सच्चे प्रेम के लिए हिंदू धर्म अपनाया और प्रेमियों के साथ मंदिर में विवाह रचा।

Interfaith love marriage: लखीमपुर खीरी की कहानी सच्चे प्रेम की मिसाल – दो बहनों ने अपनाया हिंदू धर्म और प्रेमियों संग रचाई मंदिर में शादी

प्रेम की शक्ति ने हर बाधा को पार किया

कभी-कभी जीवन में प्रेम की शक्ति इतनी प्रबल होती है कि वह हर सामाजिक, पारिवारिक और धार्मिक बाधा को पार कर लेता है। लखीमपुर खीरी जिले के बैरिया गांव में दो सगी बहनों की कहानी इसी प्रेम की अद्भुत मिसाल है। यह कहानी केवल विवाह की नहीं, बल्कि साहस, दृढ़ता और सच्ची भावनाओं की कहानी है। यहां दो सगी मुस्लिम बहनों ने हिन्दू जीवन साथी चुने, और अपने प्रेम के लिए हर बाधा को पार किया। यह कहानी हर पाठक के मन में प्रेम, साहस और विश्वास की गहरी छाप छोड़ती है।

Interfaith love marriage: बचपन की दोस्ती से जन्मा सच्चा प्रेम

बड़ी बहन रुखसाना, जिसने अब अपना नाम रूबी मौर्या रखा है, और उसकी छोटी बहन जैस्मिन, अब चांदनी मौर्या, अपने-अपने प्रेमियों के साथ वर्षों से गहरे प्रेम और विश्वास के बंधन में बंधी हुई थीं। रूबी मौर्या का प्रेम सर्वेश मौर्य के साथ बचपन से शुरू हुआ। उनके बचपन के स्कूल और पड़ोस की दोस्ती ने धीरे-धीरे एक सच्चे प्रेम में रूप ले लिया। वहीं, चांदनी मौर्या और रामप्रवेश मौर्य की मुलाकात स्थानीय सामाजिक कार्यक्रमों और पारिवारिक मेलजोल के दौरान हुई। दोनों की दोस्ती ने समय के साथ गहराई हासिल की और वह प्रेम का रूप ले लिया। वर्षों तक दोनों बहनों ने अपने प्रेमियों के साथ समझदारी, विश्वास और सम्मान के साथ रिश्ता निभाया, और अंततः उन्होंने अपने जीवन साथी चुनने का साहसिक निर्णय लिया।

Interfaith love marriage:धर्म परिवर्तन और नया नाम – नए जीवन की शुरुआत

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दोनों बहनों ने अपने प्रेम और भविष्य को स्थायी बनाने के लिए हिंदू धर्म अपनाने का निर्णय लिया। धर्म परिवर्तन के बाद बड़ी बहन रूबी मौर्या और छोटी बहन चांदनी मौर्या बने। यह नाम उनके नए जीवन, नए विश्वास और नए आत्मनिर्णय का प्रतीक बन गया।

मंदिर में संपन्न हुआ विवाह समारोह

प्रेम और विश्वास के इस साहसिक सफर को मंदिर की पवित्रता में अंजाम दिया गया। गांव के श्री ठाकुर जी पयहारी बाबा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार दोनों बहनों ने अपने-अपने प्रेमियों के साथ सात फेरे लिए। यह समारोह केवल विवाह का उत्सव नहीं था, बल्कि प्रेम और साहस का जीवंत उत्सव था।

Interfaith love marriage:ग्रामीणों का आशीर्वाद और सामाजिक समर्थन

विवाह समारोह में गांव के लोग और ग्रामीणों की भारी भीड़ ने हिस्सा लिया। लोगों ने दोनों जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए पुष्प वर्षा की। यह नजारा प्रेम, उल्लास और सामूहिक खुशी का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत कर रहा था।

परिवार विरोध और बहनों का दृढ़ निर्णय

परिवार के विरोध और सामाजिक दबावों के बावजूद दोनों बहनों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपने मायके वापस नहीं जाएंगी। यह निर्णय उनके प्रेम और आत्मनिर्णय का प्रतीक बन गया, जिसने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना दिया।

सच्चा प्रेम: साहस और आत्मनिर्णय का प्रतीक

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि साहस, दृढ़ता और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। रूबी और चांदनी मौर्या ने समाज और परिवार के विरोध को पार कर यह संदेश दिया कि प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता सबसे ऊपर होती है। यह घटना धार्मिक सहिष्णुता, मानव अधिकार और व्यक्तिगत आज़ादी का जीवंत उदाहरण बन गई है।

Interfaith love marriage:प्रेम और विश्वास की प्रेरणादायक कहानी

लखीमपुर खीरी की यह प्रेरक कहानी हर उस व्यक्ति के लिए एक मिसाल है जो अपने दिल की सुनने और सच्चे प्रेम के लिए साहस जुटाने का प्रयास करता है। रूबी और चांदनी की कहानी केवल विवाह की नहीं, बल्कि प्रेम, साहस और आत्मनिर्णय की कहानी है। उनके प्रेम ने साबित कर दिया कि जब दिल की आवाज़ और विश्वास एकसाथ चलते हैं, तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है और हर सपना सच हो सकता है।

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