कानपुर: मां ने बेटी को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में लगाई गुहार, महिला दरोगा पर लगाया यह आरोप

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कानपुर, उत्तर प्रदेश। कानपुर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपनी बेटी के साथ न्याय की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वादी महिला का आरोप है कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ दो युवकों द्वारा गलत कार्य किया गया, लेकिन जब इसकी शिकायत थाने में की गई तो मामले की जांच कर रही महिला दरोगा ने न केवल कार्रवाई में लापरवाही बरती, बल्कि बेटी पर बयान बदलने का दबाव भी बनाया।

इस पूरे मामले को लेकर अब माननीय न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने भी कहा है कि न्याय पाने के लिए हर कानूनी कदम उठाया जाएगा।

पढ़िए क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार, कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के संजीव नगर निवासी एक महिला ने अपनी बेटी के साथ हुए अन्याय के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की है। शिकायत पत्र में बताया गया है कि भरोसा नगर निवासी ईशु यादव उनकी बेटी को गुमराह कर बर्रा बाईपास स्थित मनोज यादव के घर ले गया, जहां उसने गलत हरकत की।

वादी महिला ने इस घटना की शिकायत तत्काल थाना चकेरी में दर्ज कराई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज कर महिला दरोगा रीना यादव को जांच की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन, पीड़िता की मां के अनुसार, जांच के दौरान न्याय की उम्मीद के बजाय उन्हें और अधिक मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।

जांच में गंभीर लापरवाही का आरोप

वादी महिला का कहना है कि महिला दरोगा ने उनकी बेटी को पूछताछ के बहाने चार दिनों तक थाने में ही रखा। इस दौरान न तो परिवार को मिलने दिया गया और न ही किसी प्रकार की जानकारी दी गई।

बाद में जब मां अपनी बेटी से मिलने पहुंची तो उसने बताया कि उस पर बयान बदलने और मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

वादी का यह भी कहना है कि इस पूरे प्रकरण में महिला दरोगा ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की और न्याय प्रक्रिया में बाधा पहुंचाई।

महिला आयोग से भी की गई थी शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की मां ने महिला आयोग को भी शिकायत पत्र भेजा था, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने कानपुर कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई।

वादी महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनकी बेटी मानसिक और शारीरिक रूप से अत्यंत पीड़ा में है, इसलिए न्यायालय से उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

कोर्ट ने लिया संज्ञान, अधिवक्ता ने दी जानकारी

वादी पक्ष के अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य प्रतीक शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने प्रार्थना पत्र पर संज्ञान ले लिया है। उन्होंने कहा कि अब न्यायालय के निर्देशों के बाद इस मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिले। जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं और निष्पक्षता से कार्रवाई करें।”

जानिए अब आगे क्या होगा

अब मामला न्यायालय के संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है। इसके साथ ही, अगर जांच में महिला दरोगा की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस जांच की पारदर्शिता और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अब सभी की निगाहें न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

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