5000 ट्रेडमार्क और पेटेंट फंसे, कानपुर में निवेश पर पड़ सकता है असर
कानपुर के 5000 ट्रेडमार्क और पेटेंट फस गए हैं। इन ट्रेडमार्क और पेटेंट को संविदा अफसर ने 2 साल के अंदर पंजीकृत करते हुए मंजूरी दी थी। जिन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं था। क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया ने इन अफसर को सिर्फ सुनवाई और परीक्षण का ही अधिकार दिया था। इस मामले में सरकार ने 65 अफसर की टीम बनाई है। जो समीक्षा करेगी। भारत में 2 साल में लगभग 1लाख पेटेंट और 5.67 लाख ट्रेडमार्क पंजीकृत हुए हैं। करीब 100 करोड़ से ज्यादा के निवेश पर असर पड़ सकता है।

कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद, ट्रेडमार्क और पेटेंट कारोबारी के लिए बना मुसीबत
अपने प्रोडक्ट की ब्रांडिंग और उनकी एक खास पहचान बनाने के लिए कारोबारी उत्पाद के लिए ट्रेडमार्क और उनका पेटेंट कराते हैं। अब बीते 2 साल में हुए उनके रजिस्ट्रेशन पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। कोलकाता हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में इन सभी संविदा कर्मचारियों की ओर से पारित किए गए सभी आदेशों को आशक्त और शून्य करार घोषित कर दिया है। ट्रेडमार्क एवं पेटेंट ऑफिस में क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया (क्यूसीआई) से निविदा पर ऑफिसर चयन करने का अनुबन्ध किया था। जो अब खत्म कर दिया गया है।

आ रही है ये समस्याएं
लोगों ने पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलने के बाद ब्रांडिंग और मार्केटिंग में लाखों रुपए का निवेश कर दिया है। कई लोग पंजीकरण के बाद कुछ तरह की साझेदारी में भी शामिल हो चुके हैं। कई मुकदमे और विवाद पंजीकृत उपयोगकर्ता के नाम पर अदालत में चल रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि वर्तमान में जब सभी आदेश ही शून्य हो गए हैं तब उनकी समीक्षा का प्रश्न ही नहीं उठता, और ना ही अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान है।
पेटेंट और ट्रेडमार्क के रजिस्ट्रेशन पर संशय की स्थिति
ट्रेडमार्क और पेटेंट विशेषज्ञ नवदीप श्रीधर ने एक अखबार को बताया कि कंट्रोलर जनरल आफ पेटेंट्स एंड ट्रेडमार्क ने बीते 2 सालों में क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया के जरिए 790 संविदा कर्मियों की नियुक्ति की थी इस मद में विभाग ने लगभग 50 करोड रुपए उनकी सैलरी में खर्च किए। मार्च 2023 से मार्च 2024 के बीच लगभग 1 लाख पेटेंट और 5.67 लाख ट्रेडमार्क पंजीकृत हु कानपुर में लगभग 5000 ट्रेडमार्क पंजीकृत हुए हैं इससे उनके पंजीकरण पर संशय की स्थिति बनी हुई है। कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद आप इन सभी की फिर से समीक्षा होगी।
