कानपुर: जिलाधिकारी ने आईजीआरएस प्रकरणों की समीक्षा की, असंतुष्ट फीडबैक पर जताई नाराजगी, दिए ये निर्देश
कानपुर नगर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने 9 सितम्बर को आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने असंतुष्ट फीडबैक की अधिक संख्या, बिना मौके पर जांच किए रिपोर्ट भेजने और शिकायतकर्ताओं से संपर्क न करने जैसी लापरवाहियों पर कड़ी नाराजगी जताई।
गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर
डीएम ने निर्देश दिया कि सभी जनपद स्तरीय अधिकारी और कार्यालयाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि आईजीआरएस प्रकरणों का निस्तारण शासन की मंशा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक तरीके से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक शिकायत का भौतिक सत्यापन आवश्यक है और रिपोर्ट भेजने से पहले शिकायतकर्ता से वार्ता करना अनिवार्य होगा।
साथ ही, निर्धारित समय सीमा का पालन भी हर हाल में होना चाहिए। यदि इस पर अमल नहीं किया गया तो शासन स्तर से कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
रिपोर्टिंग में पारदर्शिता की आवश्यकता
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि किसी भी कार्यालयाध्यक्ष को रिपोर्ट बनाने का कार्य केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने आदेश दिया कि रिपोर्ट के साथ मौके की जीपीएस युक्त तस्वीरें अनिवार्य रूप से संलग्न की जाएं। साथ ही, शिकायतकर्ता को फोन पर वास्तविक प्रगति की जानकारी देना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
फीडबैक का आंकड़ा
1 सितंबर से 8 सितम्बर तक प्राप्त फीडबैक में नगर निगम कानपुर से 1086 प्रकरण सामने आए, जिनमें से 563 असंतुष्ट पाए गए। इनमें 491 शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचा और 360 मामलों में किसी ने फोन पर भी संपर्क नहीं किया।
इसी अवधि में अधिशासी अभियंता (विद्युत) से जुड़े 345 प्रकरणों पर 153 असंतुष्ट फीडबैक दर्ज हुए। वहीं, अधिशासी अभियंता (जलकर) के 343 प्रकरणों में 122 और जल निगम (ग्रामीण) के 108 प्रकरणों में 64 असंतुष्ट पाए गए। इसके अतिरिक्त, सचिव कानपुर शहर के 112 में से 92, उपाध्यक्ष केडीए के 71 में से 61 और तहसीलदार (राजस्व व आपदा, बिल्हौर) के 71 में से 48 फीडबैक असंतोषजनक पाए गए।