कलेक्ट्रेट में उपस्थिति की औचक जांच में 19 कार्मिक पाए गए अनुपस्थित, DM ने मांगा स्पष्टीकरण

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कानपुर नगर। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आज कलेक्ट्रेट में औचक उपस्थिति जांच की गई। प्रातः 10:20 बजे एडीएम सिटी राजेश कुमार ने उपस्थिति पंजिका का निरीक्षण किया, जिसमें कुल 19 कार्मिक अनुपस्थित पाए गए।

जांच में अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों में अराधना मिश्रा, वीरेन्द्र कुमार मिश्र, सुषमा पाण्डेय, धर्मेन्द्र कुमार, ललित किशोर वर्मा, इच्छापूर्ति अवस्थी, आनन्द प्रकाश, निशान्त निगम, संजय कुमार, विनोद सिंह, आकांक्षा सक्सेना, सोमिल दीक्षित, राजेश कुमार श्रीवास्तव, नेहा श्रीवास्तव और सुनील श्रीवास्तव शामिल हैं।

साथ ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में दुर्गा प्रसाद, छोटेलाल, मिथिलेश कुमारी और मिथिलेश परवीन भी अनुपस्थित पाए गए। इस प्रकार कुल 19 कर्मचारियों की गैरहाजिरी दर्ज की गई।

देखने को मिला जिलाधिकारी का कड़ा रुख

जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी का समय पर उपस्थित होना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अनुपस्थित कार्मिकों का एक दिन का वेतन काटा जाए और उनसे स्पष्टीकरण भी तलब किया जाए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कलेक्ट्रेट में कार्य की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए सभी कर्मचारियों को समय पालन और जिम्मेदारी के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका

औचक निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारी अपने कार्यालय में नहीं थे जबकि उन्हें समय पर उपस्थित रहना चाहिए था। इस दौरान यह ध्यान दिया गया कि कलेक्ट्रेट में नियमित उपस्थिति न केवल प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता को प्रभावित करती है बल्कि जनता को मिलने वाली सेवाओं पर भी असर डालती है।

एडीएम सिटी राजेश कुमार ने कहा कि “औचक जांच का उद्देश्य केवल अनुपस्थित कर्मचारियों को दंडित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन समय पर करें।” इस कदम से कलेक्ट्रेट के सभी कर्मचारियों में जागरूकता और अनुशासन की भावना बढ़ेगी, जिससे प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

अनुशासन और समयपालन का महत्व

जिलाधिकारी ने सभी कर्मचारियों से कहा कि समयपालन और अनुशासन किसी भी कार्यालय की सफलता के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कर्मचारी अगर समय से अनुपस्थित रहेंगे, तो प्रशासनिक प्रक्रिया बाधित होगी और जनहित कार्यों में देरी होगी। इसलिए, अधिकारियों और कर्मचारियों को हमेशा अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और किसी भी लापरवाही से बचना चाहिए।

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