कानपुर के फौजी अभिजीत सिंह पाल ने हिमालय रैली में हासिल किया प्रथम स्थान, बढ़ाया परिवार और शहर का गौरव
कानपुर: “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।” इन शब्दों को सही साबित किया है कानपुर शहर के दबौली वेस्ट निवासी फौजी अभिजीत सिंह पाल (विनय पाल) ने। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और हिम्मत के बल पर न सिर्फ भारतीय सेना का नाम रोशन किया, बल्कि अपने शहर और परिवार का भी गौरव बढ़ाया।
दरअसल, अभिजीत सिंह पाल ने आर्मी टीम की ओर से आयोजित 5th Edition Rally of Himalaya में हिस्सा लिया। इस कठिन और रोमांचक प्रतियोगिता में उन्होंने अपनी Hero X Pulse मोटरसाइकिल के साथ भाग लेकर हिमाचल प्रदेश में प्रथम स्थान (1st Position) प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके साहस, धैर्य और अटूट आत्मविश्वास का परिणाम है।
कठिन परिश्रम और संघर्ष ने बनाया विजेता
अभिजीत पाल का जीवन संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल है। उनका जन्म कानपुर देहात के मैथा क्षेत्र के एक छोटे से गांव में हुआ। उनके पिता राम प्रकाश पाल भारतीय सेना में नायक पद पर कार्यरत रहे। पिता की देशभक्ति और अनुशासन ने अभिजीत के जीवन में गहरी छाप छोड़ी। यही कारण है कि बचपन से ही उन्होंने हर मुश्किल को अवसर में बदलने की ठान ली थी।
अभिजीत ने बताया कि फौज में रहकर उन्हें न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनने का अवसर मिला। सेना ने उन्हें यह सिखाया कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और संयम आवश्यक है। यही गुण उन्हें हर रेस में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
रैली ऑफ हिमालय: एक चुनौतीपूर्ण सफर
हिमालय की ऊंची चोटियों और कठिन रास्तों पर बाइक रेस करना आसान नहीं होता। ठंडी हवाएं, खतरनाक मोड़ और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी — इन सबके बीच अभिजीत ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने लगातार अभ्यास कर इस प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। उनकी सफलता ने न केवल सेना में उनके साथियों को गर्वित किया बल्कि कानपुर शहर और उत्तर प्रदेश का भी मान बढ़ाया।
राजनीति से भी जुड़ा है परिवार
अभिजीत सिंह पाल का परिवार केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा और राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। उनके चाचा जेपी पाल कांग्रेस पार्टी से दो बार पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में भी वे पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और कर्मठता के कारण राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
अभिजीत बताते हैं कि परिवार में अनुशासन और समाज सेवा दोनों की भावना हमेशा से रही है। पिता ने जहां उन्हें देश सेवा का संस्कार दिया, वहीं चाचा ने समाज और राजनीति में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। यही कारण है कि वे हर क्षेत्र में मेहनत और ईमानदारी को सर्वोपरि मानते हैं।
सफलता के बाद शुभकामनाओं की बाढ़
हिमालय रैली में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद अभिजीत पाल को शुभकामनाओं का सिलसिला थम नहीं रहा। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय समुदाय तक हर जगह लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। सेना के साथ-साथ उनके मोहल्ले और मित्र भी गर्व महसूस कर रहे हैं।
अभिजीत का कहना है कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार, दोस्तों और प्रशिक्षकों की है जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। वे आगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैलियों में भाग लेने का सपना देख रहे हैं ताकि भारत का नाम वैश्विक मंच पर और ऊंचा हो सके।
मिलता है प्रेरणा का यह संदेश
अभिजीत पाल की यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी सपने देखना नहीं छोड़ता। उन्होंने साबित किया है कि अगर लगन और विश्वास हो तो कोई भी ऊंचाई अजेय नहीं। उनका जीवन संदेश देता है — “कठिनाइयां सफलता की सीढ़ियां होती हैं, बस हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।”