Up Desk – साथियों एक बार फिर पूरा देश इस वर्ष 2023 में प्रभु श्री राम की भक्ति में सराबोर हो चुका है। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे सम्पूर्ण भारत में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की रामलीला का मंचन शुरू हो चुका है। जो शारदीय नवरात्री के प्रथम दिन से शुरू होकर रामनवमी को समापन के अंतिम क्षणों में आकर दशमी के दिन अहंकारी रावण के खात्मे के साथ समाप्त होगी। जिसे दशहरा के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म के अनुसार रामलीला का मंचन बहुत ही शुभ माना जाता है। जब आप इस आयोजन के पंडाल में बैठकर प्रभु श्री राम का रूप धारण किए कलाकारों के प्रदर्शन को देखेंगे तो लगता है कि हमें साक्षात् भगवान श्री राम की लीला को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। तो चलिए आज हम आपको प्रभु श्री राम की लीला पर आधारित कुछ ऐसी रामलीला का वर्णन करने जा रहे हैं जो पूरे देश में विख्यात हैं। बने रहिए हमारे साथ।
रामनगर की रामलीला
दोस्तों वैसे तो देश में कई जगहों पर होने वाली रामलीला का दृश्य भक्ति से परिपूर्ण होता है। लेकिन कुछ ऐसे स्थान है जहां आयोजित होने वाली रामलीला सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में विश्वविख्यात मानी जाती है। कुछ इसी में है रामनगर चौधरी स्टेट वाली रामलीला। जिसका मंचन 456 वर्षों से लगातार होता चला आ रहा है। जिसका शुभारम्भ इटावा के राजा जसवंत राव ने किया था। जिसको लेकर यह भी कहा जाता है कि औरंगजेब के खड़ी तलवार वाले शासनकाल में इस रामलीला का मंचन हुआ करता था।
कानपुर के परेड की रामलीला
इसी तरह कानपुर के परेड ग्राउंड में भी वर्षों से भव्य रामलीला का सफल मंचन होता चला आ रहा है। रामलीला का स्टेज बिलकुल अयोध्या रूपी सुंदर सा प्रतीत होता है और दूर-दराज से आए कलाकारों का प्रदर्शन हूबहू प्रभु श्री राम और माता सीता के साथ भैया लक्ष्मण और वीर हनुमान सहित पूरी वानर सेना के दर्शन कराता है। आपको बताते चलें कि कानपुर के परेड में होने वाली रामलीला की शुरुआत महाराजा प्रयाग नारायण तिवारी ने वर्ष 1877 में की थी। जिसके लिए उन्हें अंग्रेजों से इसकी इजाजत लेनी पड़ी थी और तब से आज तक परेड की रामलीला का मंचन होता चला आ रहा है। जिसमे मथुरा का चतुर्वेदी परिवार वर्ष 1946 से लगातार अभी तक अभिनय करता चला आ रहा है।
राम जन्म भूमि अयोध्या की रामलीला
अयोध्या की रामलीला का मंचन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की जन्मस्थली में होता है। यह रामलीला मेरी माँ फाउंडेशन की तरफ से आयोजित की जाती है। जिसमे बड़े-बड़े फिल्म स्टार अभिनय करते हैं। इस रामलीला के मंचन में साम्प्रदायिक सौहार्द की झलक भी देखने को मिलती है। जब फ़िल्मी कलाकारों में कोई रावण की भूमिका निभाता है तो कोई प्रभु श्री राम और लक्ष्मण तो कोई भरत के साथ वीर हनुमान की और तो कोई माता सीता का किरदार निभा कर पूरी रामलीला को सबके समक्ष प्रस्तुत कर देते हैं। मानो एक पल के लिए ऐसा लगता कि एक बार फिर से अयोध्या की धरती पर प्रभु श्री राम का अवतरण हो गया हो।
काशी की रामलीला
इसी तरह बनारस में होने वाली रामलीला पिछले 230 वर्षों से आयोजित होती चली आ रही है। जिसे महाराजा उदित नारायण सिंह ने बरुईपुर गांव में पहला आयोजन कराया था। तब से लेकर आज तक इस रामलीला में प्रभु श्री राम के अनेकों रूपों का मंचन किया जाता चला आ रहा है। जिसे देखने के लिए भक्तों की भीड़ हजारों की संख्या में पहुँच जाती है।
आपको बताते चलें कि सनातन धर्म से ओत-प्रोत माना जाने वाले अपने भारत में जगह-जगह रामलीला का मंचन इस बात को दर्शाता है कि आज भी भारत की भूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का मार्ग दर्शन लोगों को सद्बुद्धि प्रदान करता है। तो प्रेम से बोलिए जय श्री राम।