“सूर्य देवता” को कैसे किया जाता है “जल अर्पित” – घर में बनी रहेगी “खुशहाली”

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क्या आप जानते हैं कि भगवान सूर्य देव को किस प्रकार से जल अर्पित करना चाहिए। अगर नहीं तो आज हम आपको इस जानकारी से अवगत कराएंगे कि किस तरीके से सूर्य देव को जल चढ़ाया जाता है ताकि उनके तेज प्रकाश की कृपा आप पर बनी रहे, तो बने रहिए हमारे साथ और जानिए विशेष ज्ञान। 
 
आपको बता दें कि हम जब भी सूर्य देव को जल चढ़ाएं तो ओम सूर्याय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए, और जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्य उदय दिखाई दे तो दोनों हाथो से तांबे के लोटे में जल डाल कर सूर्य को ऐसे जल दें. कि सूर्य की किरणें पानी की धार से आपको साफ़ दिखाई दें। इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि जो जल आप सूर्य देव को अर्पण कर रहे है, वो आपके पैरो में नहीं आना चाहिए। ऐसे में अगर सम्भव हो सके तो एक बर्तन जरूर रख लें, ताकि जो जल आप अर्पण कर रहे हैं, वो आपके पैरों को न छू सके. इसके बाद उस बर्तन में एकत्रित हुआ जल आप किसी भी पौधे में डाल सकते हैं।
 
इसके इलावा यदि आपको सूर्य भगवान् के दर्शन न हों तो रोज की तरह पूर्व दिशा में मुँह करके किसी शुद्ध स्थान पर आप जल अर्पित कर सकते हैं. मगर जिस रास्ते से लोगों का आना जाना हो, वहां भूल कर भी जल अर्पित न करें। गौरतलब है, कि जल अर्पण करने के बाद दोनों हाथों से उस भूमि को स्पर्श करें और गला. आंख, कान को छूकर भगवान् सूर्य देव को झुक कर प्रणाम करें। इसके साथ ही अर्घ्य देते समय आपको किसी एक सूर्य मंत्र का मन ही मन में उच्चारण अवश्य करना चाहिए। फिर सीधे हाथ में जल लेकर उसे चारो तरफ छिड़कना चाहिए।
 

परिक्रमा करनी चाहिए 

इसके बाद जहाँ आप खड़े होकर जल अर्पित कर रहे हैं, उसी स्थान पर तीन बार घूम कर परिक्रमा कर लें, और जहाँ आपने खड़े होकर सूर्य देव की पूजा की है. वहां प्रणाम भी करें। वैसे आपको बता दें कि सूर्य देव का एक मंत्र तो यह है, “ॐ सूर्याय नम:” इसके इलावा सूर्य को जल चढाने का उद्देश्य केवल सूर्य देव को प्रसन्न करना या यश की प्राप्ति करना नहीं है इससे हमारे स्वास्थ्य को भी लाभ मिलता है. जब सुबह उठ कर ताज़ी हवा और सूर्य की किरणें हमारे शरीर में प्रवेश करती हैं, तो हमारा स्वास्थ्य भी हमेशा सही रहता है. इसके इलावा जब पानी की धारा में से सूर्य की किरणों को देखते है, तो इससे हमारी आँखों की रौशनी भी तेज होती है
 

क्या कहता है साइंस  

बता दे कि सूर्य की किरणों में विटामिन डी भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए जो व्यक्ति सुबह उठ कर सूर्य को जल देता है। वह तेजस्वी बनता है. साथ ही इससे त्वचा में आकषर्ण और चमक आ जाती है। एक तरफ जहाँ पेड़ पौधों को भोजन की प्राप्ति भी सूर्य की किरणों से होती है। वहीं दूसरी तरफ ऋषि मुनियों का कहना है, कि सूर्य हमारे शरीर से हानिकारक तत्वों को नष्ट कर देता है। बस सूर्य को जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इसे कभी भी सीधे न देखें बल्कि जल के बीच में से देखें।
 

यह समय होता है सही 

इसके इलावा सूर्य को 7 या 8 बजे तक जल चढ़ा दें। वो इसलिए क्यूकि देर से चढ़ाया गया जल हानिकारक भी हो सकता है. इसके साथ ही हमेशा ध्यान रखे कि जल में रक्त चंदन और लाल पुष्प हमेशा डालें. यदि यह न हो तो आप लाल मिर्च के कुछ बीज भी डाल सकते है. यह तंत्र विद्या के काम आते हैं।

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