World Rangers Day: भारत के वीर वनकर्मियों को सलाम, पढ़िए IFS अधिकारियों ने क्या कहा

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World Rangers Day: भारत के शहीद वनकर्मियों को श्रद्धांजलि। जानिए IFS अधिकारियों ने उनके बलिदान को लेकर क्या भाव साझा किए।

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देश के रक्षक: जंगलों की रक्षा करते हुए शहीद हुए भारत के वीर वनकर्मी

हर साल 31 जुलाई को पूरी दुनिया में वर्ल्ड रेंजर्स डे मनाया जाता है। यह दिन उन वन रक्षकों (Forest Rangers) की याद में समर्पित होता है जो जंगलों, वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं — कई बार अपनी जान गंवाकर भी।

भारत जैसे विशाल और जैव विविधता से समृद्ध देश में, ये वन रक्षक सिर्फ पेड़-पौधों या जानवरों की सुरक्षा नहीं करते, बल्कि प्राकृतिक संतुलन और मानव अस्तित्व को बनाए रखने की लड़ाई भी लड़ते हैं। आज हम उन वीर वनकर्मियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी — और उनके सम्मान में सोशल मीडिया पर उठी उन आवाज़ों को भी जो इस बलिदान को भुलाने नहीं देना चाहतीं।

 रंथंभौर (राजस्थान) – टाइगर हमले में शहीद रेंजर

मई 2025 में राजस्थान के रंथंभौर टाइगर रिजर्व में कार्यरत देवेंद्र चौधरी, जो एक अनुभवी वन रेंजर थे, ड्यूटी के दौरान एक टाइगर के हमले का शिकार हो गए। बाघिन ने उन्हें गर्दन से पकड़कर खींच लिया और जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इससे पहले भी उसी टाइगर ने एक 7 साल के बच्चे की जान ले ली थी। इन दो मौतों के बाद उस बाघिन को पकड़कर बाड़े में रखा गया, लेकिन यह सवाल फिर खड़ा हुआ कि क्या हमारे वनकर्मी सुरक्षित हैं?

सिमिलिपाल (ओडिशा) – तस्करों की गोलीबारी में शहादत

मई 2023 में सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में ड्यूटी पर तैनात वन गार्ड बिमल कुमार जेना को शिकारियों ने गोली मार दी। वह शिकार के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे और उन्हें मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया गया।

इसके कुछ ही हफ्तों बाद उसी क्षेत्र में कार्यरत रेंजर माथी हंसदा की भी तस्करों ने घात लगाकर हत्या कर दी। ये घटनाएं साबित करती हैं कि कई बार हमारे वन रक्षक सिर्फ जानवरों से नहीं, बल्कि इंसानों के लालच से भी लड़ते हैं।

 सटकोसिया (ओडिशा) – गश्त के दौरान बलिदान

मई 2025 में प्रहलाद प्रधान, एक समर्पित वन गार्ड, रात की गश्त पर थे जब उन पर सशस्त्र तस्करों ने हमला किया। उन्हें गोली मार दी गई और उनका शव जंगल में मिला। उनकी बहादुरी को सलाम करते हुए राज्य सरकार ने उनके परिवार को सम्मान और आर्थिक सहायता दी, लेकिन सवाल आज भी वही है — “क्या हमारी व्यवस्था वनकर्मियों की जान की कीमत समझती है?”

 बस्तर (छत्तीसगढ़) – माओवादियों ने की हत्या

सितंबर 2020 में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में वन रेंजर रातराम पटेल की माओवादियों ने बेरहमी से हत्या कर दी। वह गांव में मजदूरी का भुगतान देने गए थे, लेकिन माओवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया और छुरा मारकर मार डाला। यह घटना बताती है कि वन रक्षक केवल जंगल के खतरों से नहीं, बल्कि सामाजिक अस्थिरता के खतरों से भी जूझते हैं।

 जोरहट (असम) – हाथी के हमले में अधिकारी की मौत

सितंबर 2023 में असम के जोरहट जिले में वनकर्मी अतुल कलिता को एक जंगली हाथी ने उस समय कुचल दिया जब वह हाथियों के झुंड को गांव से दूर करने की कोशिश कर रहे थे। चार अन्य अधिकारी भी घायल हुए। यह घटना दर्शाती है कि वन्यजीव संरक्षण की ड्यूटी हमेशा रोमांचक नहीं होती — कई बार यह जानलेवा संघर्ष बन जाती है।

 IFS अधिकारियों की श्रद्धांजलि

इस दिन को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अपने भाव साझा किए।

IFS अधिकारी मनीष सिंह में लिखा 

भारत आज निरंतर वन क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है — कहीं पेड़ बढ़ रहे हैं, तो कहीं बाघों की संख्या उत्साहजनक ढंग से बढ़ी है। लेकिन ये आंकड़े सिर्फ कागज की उपलब्धि नहीं, बल्कि जंगल के भीतर काम करने वाले हजारों फॉरेस्ट रेंजरों, वनकर्मियों और अधिकारियों की दिन-रात की मेहनत, संघर्ष और समर्पण का परिणाम हैं। वे बारिश, धूप, जंगली जानवरों और मानव खतरों के बीच डटे रहते हैं, ताकि भारत की हरियाली महफूज़ रहे। IFS अधिकारी मनीष सिंह के शब्दों में — “यह उपलब्धि केवल योजनाओं की नहीं, बल्कि उन जांबाज़ रेंजरों की है, जो जंगल की खामोशी में अपना नाम लिखते हैं।” आज World Rangers Day पर यह दिन उन सभी वीरों को समर्पित है, जिनकी वजह से भारत आज वन संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

IFS अधिकारी Parveen Kaswan ने एक पोस्ट में लिखा

“यह दिन उन फॉरेस्ट फ्रंटलाइन स्टाफ को समर्पित है जो दूर-दराज़ के जंगलों में काम करते हैं — तस्करों, अकेलेपन, माइनिंग माफिया और बीमारियों से जूझते हुए।”

उनकी इस पोस्ट ने पूरे पर्यावरण प्रेमियों के बीच एक भावनात्मक लहर पैदा कर दी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ये रक्षक सीमाओं पर नहीं, जंगलों की हरियाली की रक्षा में लगे हैं।

एक अन्य अवसर पर उन्होंने लिखा:

“सैकड़ों ग्राउंड स्टाफ और अधिकारी ड्यूटी पर अपने प्राण गंवा चुके हैं। इन्हें श्रद्धांजलि देना हमारी जिम्मेदारी है।”

इन पोस्टों से न सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव बनता है, बल्कि वन कर्मियों के बलिदान को सामाजिक स्तर पर पहचान भी मिलती है।

रक्षक जो सुर्खियों में नहीं आते

देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों को हम सलाम करते हैं — और करें भी, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि जंगलों की रक्षा में लगे ये वनकर्मी भी किसी सैनिक से कम नहीं। ये बगैर बुलेटप्रूफ जैकेट, बगैर आधुनिक हथियारों के जंगलों में गश्त करते हैं।

आज वर्ल्ड रेंजर्स डे के अवसर पर हम सभी को न सिर्फ उन्हें श्रद्धांजलि देनी चाहिए, बल्कि यह संकल्प भी लेना चाहिए कि:

वन रक्षकों को बेहतर सुरक्षा मिले,

उनके परिवारों को आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा मिले,

और उनका बलिदान सिर्फ एक आंकड़ा बनकर न रह जाए।

जब तक वन हैं, जीवन है। और जब तक वन रक्षक हैं, तब तक वन बच सकते हैं।

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