Supreme Court on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट में ‘आवारा कुत्तों’ के मामले की सुनवाई शुरू – तर्क, पृष्ठभूमि और अगला कदम

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Supreme Court on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर तीन-न्यायाधीश बेंच से सुनवाई शुरू—जानिए विवादित आदेश, विरोध और अगले कदम।

Supreme Court on Stray Dogs: दिल्ली-एनसीआर से ‘आवारा कुत्तों’ को हटाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस – सरकार ने बताया ‘सुरक्षा का सवाल’, NGO ने कहा ‘तैयारी अधूरी

दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने देशभर में बहस छेड़ दी है। एक ओर लोग इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ज़रूरी मान रहे हैं, तो दूसरी ओर पशु-प्रेमी और एनजीओ इसे अमानवीय बता रहे हैं। इस बीच, आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई नई तीन-न्यायाधीशीय बेंच के सामने शुरू हुई, जिसमें अब तक कई अहम तर्क रखे गए हैं।

Supreme Court on Stray Dogs: आज की सुनवाई – मुख्य बातें

नई बेंच का गठन – तीन न्यायाधीशों की बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया शामिल हैं।

सुनवाई का दायरा – अदालत के समक्ष इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं हैं, जिनमें 11 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका भी शामिल है।

सरकार का पक्ष – सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि देश में हर साल करीब 37 लाख डॉग-बाइट के मामले सामने आते हैं। बच्चों की सुरक्षा खतरे में है और केवल नसबंदी से समस्या खत्म नहीं होगी।

पक्षकार का तर्क – एनजीओ ‘प्रोजेक्ट काइंडनेस’ की ओर से कपिल सिबल ने कहा कि आदेश बिना उचित अधोसंरचना के लागू करने की कोशिश है। बिना नोटिस और पर्याप्त तैयारी के इसे अमल में लाना अव्यवहारिक होगा।

बेंच का रुख – कोर्ट ने फिलहाल आदेश पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया है।

Supreme Court on Stray Dogs: पिछला आदेश – संक्षेप में

11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशीय बेंच ने दिल्ली-एनसीआर से सभी स्ट्रे डॉग्स को आठ हफ्तों में हटाकर सुरक्षित शेल्टर में रखने का आदेश दिया था।

आदेश में कहा गया था कि किसी भी कुत्ते को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।

शेल्टर में नसबंदी, टीकाकरण, डिवार्मिंग, CCTV निगरानी और डॉग-बाइट हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कहा था कि भावनात्मक जुड़ाव या पशु-अधिकार का भाव इस प्रक्रिया में बाधा नहीं बनना चाहिए।

आज की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई तत्काल राहत नहीं दी है। अब सबकी नज़रें उस फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार रहेगा या उसमें बदलाव होगा।

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