Shahjahanpur: आस्था के नाम पर अराजकता, पुलिस के सामने खूनी संघर्ष, देखिए वीडियो
Shahjahanpur: पुलिस के सामने दुर्गा मेले में लाठी-डंडों की जंग, तीन गंभीर रूप से घायल
शाहजहाँपुर। जब आस्था और उल्लास का मेला अपने चरम पर होता है, तभी कुछ लोग अपनी हिंसक प्रवृत्ति के कारण आनंद को खून में बदल देते हैं। ऐसा ही दृश्य बीती रात थाना कटरा क्षेत्र के ग्राम पोसिल में दुर्गा मंदिर मेले में देखने को मिला। मेले में अचानक हुए वाद-विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया और पुलिस के सामने ही लाठी-डंडों की जंग शुरू हो गई।
विवाद की चिंगारी
जानकारी के अनुसार, ग्राम पोसिल निवासी विजय बहादुर सिंह और ग्राम रमापुर उत्तरी निवासी रजनीश कश्यप के बीच महिलाओं के पास जाने को लेकर वाद-विवाद हुआ। यह मामूली झगड़ा जल्दी ही खूनी संघर्ष में बदल गया। मेले में उपस्थित लोग भी इस हिंसा की चपेट में आ गए।
लाठी-डंडों की बरसात, कई गंभीर घायल
दोनों पक्षों ने मेले में जमकर लाठी-डंडे चलाए, जिसमें विजय बहादुर सिंह, रजनीश कश्यप और दुर्गेश उर्फ सुनील गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन गंभीर स्थिति को देखते हुए तीनों को राजकीय मेडिकल कॉलेज शाहजहाँपुर रेफर किया गया।
पुलिस की मूकदर्शक भूमिका
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे संघर्ष के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन किसी तरह की कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। कई लोग सोशल मीडिया पर इस मारपीट का वीडियो साझा कर रहे हैं, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिस मात्र मूकदर्शक बनी रही।
प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल
थाना प्रभारी निरीक्षक जुगल किशोर पाल ने कहा कि घायल को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है और दोनों पक्षों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी हिंसा सामने थी, तो पुलिस ने क्यों नहीं रोकथाम की? क्या हमारी आस्था और मेले की सुरक्षा केवल आंकड़ों में ही सुरक्षित है, या असल में लोगों की जान और संपत्ति खतरे में है?
शाहजहाँपुर के लोगों के लिए चेतावनी:
यह घटना साफ-साफ दर्शाती है कि आस्था और उत्सव के नाम पर कभी-कभी अराजकता हावी हो जाती है। पुलिस और प्रशासन की सुस्ती के कारण आम जनता अपने ही इलाके में सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती।
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