सावन में सौहार्द का संगम: पीलीभीत में दिखी हिंदुस्तान को सुकून देने वाली तस्वीर
सावन में सौहार्द का संगम: मुस्लिम समाज ने कांवड़ियों पर फूल बरसाकर हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश की। ये नज़ारा हिंदुस्तान को सुकून देने वाला बन गया।
सावन में भाईचारे की अमर गूंज: पीलीभीत से उठी हिंदुस्तान को सुकून देने वाली तस्वीर, फूलों की बरसात और कांवड़ियों के स्वागत ने रचा ऐसा नज़ारा कि देखने वालों की आंखें खुशी से नम हो गईं
सावन का पावन महीना, जब शिवभक्त कांवड़ लेकर गंगाजल के साथ शिवालयों की ओर जाते हैं, तभी पीलीभीत से एक ऐसी खबर आई है जो पूरे हिंदुस्तान के दिल को ठंडक पहुंचाती है और हमें याद दिलाती है कि यह देश केवल सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि रिश्तों, भाईचारे और प्रेम की धरती है।
यहां मुस्लिम समाज के लोगों ने कांवड़ियों पर फूल बरसाकर, उन्हें फल भेंट कर और खुले दिल से स्वागत कर, वह मिसाल पेश की है जो शायद आज के समय में सबसे ज्यादा ज़रूरी है। बदायूं के कछला घाट से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों का यह जत्था जब पीलीभीत के रोडवेज बस अड्डे पर पहुंचा, तब चारों ओर एक ऐसा नज़ारा बना जिसने हर आंख को नम कर दिया और हर दिल को गर्व से भर दिया।
एक पल के लिए धर्म की दीवारें पिघल गईं
फूलों की बारिश, शिवभक्तों की जयकार, और मुस्लिम समाज के लोगों की ओर से खुले दिल से किया गया स्वागत… यह दृश्य सिर्फ एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि यह याद दिलाने वाला पल था कि हिंदुस्तान की ताकत हमारे विविध रंगों में है। यहां सभी धर्म एक-दूसरे के पर्व में साथ खड़े होकर, सुकून और शांति का संदेश देते हैं।
नेताओं और समाज के हर वर्ग ने दिया समर्थन
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष आस्था अग्रवाल समेत बीजेपी कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर यह संदेश दिया कि राजनीति या मतभेदों से ऊपर उठकर, असली हिंदुस्तान वह है जहां इंसानियत सबसे पहले आती है।
क्यों है यह खबर पूरे देश के लिए खास?
आज जब दुनिया के कई हिस्सों में धर्म के नाम पर विभाजन की दीवारें खड़ी की जा रही हैं, तब पीलीभीत से आई यह तस्वीर बताती है कि हिंदुस्तान की आत्मा अभी भी ज़िंदा है। यह घटना सिर्फ कांवड़ियों और मुस्लिम समाज के बीच सौहार्द की मिसाल नहीं, बल्कि यह हर उस हिंदुस्तानी के लिए गर्व का कारण है जो शांति, प्रेम और भाईचारे को सर्वोच्च मानता है।
हम गर्व से कह सकते हैं – हम हिंदुस्तानी हैं!
यह खबर हमें यह एहसास दिलाती है कि चाहे हम किसी भी मज़हब से हों, हमारी पहचान सबसे पहले हिंदुस्तानी होने की है। सावन के पवित्र महीने में उठी यह सौहार्द की गूंज हमें याद दिलाती है कि जब हम साथ खड़े होते हैं, तभी असली भारत जीवित रहता है।