Pilibhit: मुजरिम पकड़ने गई पुलिस पर गंभीर आरोप, घटना CCTV में कैद
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पूरनपुर में रात के अंधेरे में दरोगा की ‘रिवाल्वर रेड’! CCTV में कैद हुई रहस्यमयी दबिश ने मचाई सनसनी
पूरनपुर की एक शांत सी दिखने वाली रात अचानक सनसनी में तब्दील हो गई, जब एक दरोगा सरकारी रिवॉल्वर थामे किसान नेता के घर की छत पर चढ़ता हुआ नजर आया। कोई चोरी पकड़ने का ऑपरेशन था या किसी और इरादे की कहानी? ये मंजर वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। वीडियो सामने आते ही पूरे इलाके में खलबली मच गई—किसान संगठन के नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ शिकायत लेकर सीओ दफ्तर पहुंचे और पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए। वहीं, पुलिस ने इसे अपराधी को दबोचने की कानूनी कार्रवाई बताया। अब इस घटना ने न सिर्फ लोगों में दहशत भर दी, बल्कि ये भी दिखा दिया कि आज के दौर में अपराधी और पुलिस दोनों एक-दूसरे पर शक की लकीर खींच कर जनता की अदालत में अपनी-अपनी कहानी सुना रहे हैं।
CCTV फुटेज में दरोगा और सहयोगी की गतिविधियां कैद, किसान नेता पहुंचे सीओ के पास
पूरनपुर के बारी बुझिया भोपतपुर गांव निवासी देवेंद्र सिंह, जो अन्नदाता किसान यूनियन युवा के जिला महासचिव हैं, उनके घर की छत पर एक दरोगा रिवाल्वर लेकर चढ़ा। सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है कि उसे एक व्यक्ति टॉर्च की रोशनी से इशारा कर रहा है। शुक्रवार को यूनियन के जिलाध्यक्ष गुरविंदर सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ सीओ प्रतीक दहिया से मुलाकात की और उन्हें पूरे घटनाक्रम का वीडियो सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की।
अपराधी के घर दबिश थी, वायरल वीडियो ‘पक्षपाती’ प्रयास है!
सीओ प्रतीक दहिया ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। वहीं, थानाध्यक्ष सेहरामऊ उत्तरी ने कहा कि सुनगढ़ी थाने की टीम के साथ चोरी के एक पुराने मुकदमे में वांछित ज्योति उर्फ जितेंद्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस गयी थी। आरोपी के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। यह भी कहा गया कि यह पूरा वीडियो आरोपी द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने की एक चालाकी है।
अपराधियों की नई चालें—पुलिस को बदनाम कर खुद को ‘मासूम’ दिखाना
आज के दौर में जब सोशल मीडिया एक बड़ा हथियार बन चुका है, अपराधी न सिर्फ पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कानूनी दांव-पेच सीख चुके हैं, बल्कि अब वे खुद को ‘पीड़ित’ दिखाने के लिए तकनीक और प्रचार का इस्तेमाल कर रहे हैं। कहीं वीडियो वायरल कर पुलिस की छवि खराब करना, तो कहीं झूठे आरोपों से दबाव बनाना—ये अब आम रणनीतियाँ बन चुकी हैं। पुलिस को हर कदम पर न केवल अपराधियों का सामना करना पड़ता है, बल्कि अपने काम की पारदर्शिता भी लगातार साबित करनी पड़ती है।
अब पुलिसिंग केवल अपराध पकड़ने की प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि एक साइकोलॉजिकल वॉरफेयर भी बन चुकी है, जहां अपराधी अपनी मासूमियत का मुखौटा पहनकर जनभावनाओं को हथियार बनाते हैं।
क्या अब अपराधी कैमरे से न्याय तय करेंगे? या कानून अपना काम करेगा?
पूरनपुर की यह घटना न केवल पुलिस की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अपराधी अब खुद को “विक्टिम” बना कर जनता की आंखों में धूल झोंकने में माहिर होते जा रहे हैं। यह समय है कि पुलिस और आमजन दोनों सतर्क रहें—ताकि अपराध और उसके ड्रामेबाज चेहरे एक बार फिर बेनकाब हों।
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