Muzaffarnagar: 35 जुर्म, 1 लाख का इनाम-खून और खौफ़ का सौदागर नईम कुरैशी मुठभेड़ में ढेर

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Muzaffarnagar: 35 जुर्म, 1 लाख का इनाम-खून और खौफ़ का सौदागर नईम कुरैशी मुठभेड़ में ढेर

Muzaffarnagar पुलिस मुठभेड़, 1 लाख का इनामी नईम कुरैशी ढेर, 35 मुकदमों का काला अध्याय हुआ समाप्त

मुज़फ्फरनगर की शाम गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी, जब एक लाख रुपये के इनामी बदमाश नईम कुरैशी का खौफ़नाक सफर आखिरकार मुठभेड़ में थम गया। खालापार निवासी इस खूंखार अपराधी पर हत्या, लूट और चोरी के 35 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। मीरापुर और जानसठ पुलिस की संयुक्त घेराबंदी में वह भाग नहीं सका। गोलियों की बरसात में उसकी सांसें थम गईं और साथ ही अपराध का एक बड़ा अध्याय भी समाप्त हो गया।

Muzaffarnagar: पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ के मैदान की कहानी 

रविवार की देर शाम पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि नईम कुरैशी अपने साथियों संग इलाके में सक्रिय है। इसके बाद दोनों थाना क्षेत्रों की टीमें तैयार हुईं और योजनाबद्ध तरीके से इलाके की घेराबंदी की गई।

जैसे ही पुलिस का सामना नईम से हुआ, उसने सरेंडर करने के बजाय गोलियां दागनी शुरू कर दीं। जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलीं और करीब 15–20 राउंड फायरिंग के बीच नईम जमीन पर गिर पड़ा। गंभीर रूप से घायल नईम को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मुठभेड़ में पुलिस का एक सिपाही कालूराम भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

हथियारों का ज़खीरा बरामद, बदमाशों का एक साथी भागने में सफल 

नईम के शव के पास से घातक हथियार, कारतूस और एक बाइक बरामद हुई है। यह साफ करता है कि वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। हालांकि मुठभेड़ के दौरान उसका एक साथी मौके से भागने में सफल रहा, जिसकी तलाश तेज़ कर दी गई है।

नईम कुरैशी का खून और खौफ़ से भरा आपराधिक इतिहास

नईम कुरैशी सिर्फ एक अपराधी नहीं बल्कि संगठित अपराध का चलता-फिरता चेहरा था।

हत्या, लूट और चोरी के 35 से अधिक मुकदमे उसके खिलाफ दर्ज थे।

उसका नाम कई संगीन वारदातों में दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों जगहों पर सामने आया।

खालापार का यह निवासी इलाके में दहशत का दूसरा नाम माना जाता था।

उसकी आपराधिक गतिविधियाँ इस कदर संगठित थीं कि वह लगातार फरार रहकर भी सक्रिय वारदातों को अंजाम देता था।

पुलिस की गोलियों का जबाब, अपराध की अब नहीं कोई जगह नहीं 

नईम कुरैशी की मौत सिर्फ एक बदमाश का अंत नहीं, बल्कि उस पूरी सोच पर प्रहार है जो मानती है कि अपराध और कानून साथ-साथ चल सकते हैं।

यह मुठभेड़ साफ इशारा है कि कानून को चुनौती देने वाले अब सड़कों पर नहीं बचेंगे

इनामी अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए अब इलाके में जोड़कर कार्रवाई की जा रही है।

नईम जैसे बदमाशों की मौत उन गैंगों के लिए सीधा संदेश है जो अब भी अपराध को पेशा बनाए बैठे हैं।

 नेटवर्क की तलाश और फोरेंसिक पड़ताल जारी 

नईम कुरैशी का अंत हुआ, लेकिन उसके पीछे छोड़ा गया आपराधिक नेटवर्क अब सबसे बड़ी चुनौती है। बरामद हथियारों और मोबाइल के फोरेंसिक परीक्षण से यह साफ होगा कि वह किन वारदातों की तैयारी कर रहा था। पुलिस अब उसके फरार साथियों और पूरे गैंग की जड़ तक पहुंचने में लगी है।

Muzaffarnagar: अपराध का अंत और कई सवाल?

मुज़फ्फरनगर की इस मुठभेड़ ने एक बड़े अपराधी का खात्मा कर दिया, लेकिन साथ ही कई सवाल भी छोड़ दिए हैं। क्या बाकी नेटवर्क को भी उतनी ही मजबूती से तोड़ा जाएगा? क्या फरार साथी भी जल्द गिरफ्त में होंगे? फिलहाल इतना साफ है कि गोलियों की गूंज ने यह संदेश दिया है—
जो कानून को चुनौती देगा, उसका सफर नईम कुरैशी की तरह बीच रास्ते ही खत्म होगा।

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