Muzaffarnagar Brutal Killing: ग़ैर-समुदाय की भीड़ ने मोनू खटीक को पीट-पीटकर मार डाला, एक्शन मोड में पुलिस
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Muzaffarnagar Brutal Killing: ग़ैर-समुदाय की भीड़ ने मजदूर युवक को पीट-पीटकर मार डाला, करबला रोड की वीडियो वायरल
मुजफ्फरनगर ज़िले का बुढ़ाना कस्बा शनिवार को उस वक़्त दहल उठा, जब ग़ैर-समुदाय के लोगों की भीड़ ने एक निर्दोष मजदूर को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। मोनू खटीक, जो रोज़ की मेहनत-मजदूरी से अपने परिवार का पेट पालता था, को महज़ शक की बुनियाद पर भीड़ ने चोर बताकर इतना पीटा कि उसकी जान चली गई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कानून का राज खत्म हो चुका है और ग़ैर-समुदाय की भीड़ अब खुलेआम इंसाफ अपने हाथों में ले रही है?
Muzaffarnagar Brutal Killing: करबला रोड बना हिंसा का मैदान – ग़ैर-समुदाय के लोगों ने बेरहमी से पीटा
यह वारदात शुक्रवार की सुबह करबला रोड पर हुई, जहां ग़ैर-समुदाय के लोगों ने मोनू को पकड़कर जमकर पिटाई की। इस दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ग़ैर-समुदाय की भीड़ निर्दयता की हद पार करते हुए मोनू पर टूट पड़ी।
Muzaffarnagar Brutal Killing: परिवार का आक्रोश – “ग़ैर-समुदाय वालों ने मार डाला मेरा भाई”
मोनू के भाई कल्लू ने चीखते हुए कहा, “मारा-पीटा उन्होंने करबला रोड पर, ग़ैर-समुदाय के लोगों ने। मेरा भाई मजदूरी करने वाला, सीधा-साधा आदमी था। अब तो मर गया… हम इन पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।” परिवार की चीख-पुकार इस बर्बरता की गवाही दे रही है।
पुलिस की जांच – वीडियो के आधार पर होगी कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसपी ग्रामीण आदित्य बंसल ने कहा, “मोनू के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। वायरल वीडियो सामने आया है।जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी हिंसा का अधिकार नहीं है।”
Muzaffarnagar Brutal Killing: अफवाहों की आड़ में निर्दोष की हत्या
पिछले कुछ दिनों से मुजफ्फरनगर में “चोर पकड़ो” की अफवाहें लगातार फैल रही हैं। इन्हीं अफवाहों का शिकार बनकर मोनू जैसे निर्दोष मजदूर की जान चली गई। भीड़ ने शक को हक़ीक़त मानकर हत्या कर डाली।
Muzaffarnagar Brutal Killing: समाज और व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि समाज की सोच और व्यवस्था की नाकामी का सबूत है। क्या अब कोई भी ग़ैर-समुदाय की भीड़ किसी पर भी उंगली उठाकर उसकी जान ले सकती है? जब वीडियो और गवाह मौजूद हैं तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।