मुर्दों का इलाज, यह देश भर में चल रहा ‘बड़ा बाज़ार’ है

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मुर्दों का इलाज, पीलीभीत से लेकर देशभर तक, मरे हुए मरीजों पर इलाज का नाटक और पैसे की लूट — जानिए ऐसे दर्दनाक मेडिकल फ्रॉड की पूरी कहानी।

मुर्दों का इलाज, पीलीभीत से लेकर देशभर तक, मरे हुए मरीजों पर इलाज का नाटक और पैसे की लूट — जानिए ऐसे दर्दनाक मेडिकल फ्रॉड की पूरी कहानी।

मरे हुए जिस्म पर इलाज का नाटक: कब सुधरेगा भारत का संवेदनहीन स्वास्थ्य तंत्र?

अजय देव वर्मा

रॉकेट पोस्ट लाइव

मुर्दों का इलाज, मौत के बाद भी चालू है इलाज का कारोबार?

जब उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से यह दिल दहला देने वाली खबर सामने आई कि एक निजी अस्पताल ने मृत व्यक्ति पर इलाज का नाटक कर ₹3 लाख वसूल लिए, तो मेरे मन में एक सवाल गूंजा — क्या ये कोई पहली घटना है? या ये एक डरावना सिलसिला बन चुका है?

इसी सवाल के जवाब में मैंने देश के कई हिस्सों की मीडिया रिपोर्ट्स, स्थानीय खबरें और घटनाओं की पड़ताल की। तो जो सामने आया, वह और भी ज्यादा भयावह था। देशभर में ऐसी दर्जनों घटनाएं दर्ज हैं, जहाँ मरे हुए इंसानों पर इलाज दिखाकर परिजनों को आर्थिक और मानसिक रूप से लूटा गया।

मुर्दों का इलाज: पीलीभीत की ताज़ा घटना-मौत पर भी मुनाफाखोरी

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में हाल ही में एक निजी अस्पताल पर यह गंभीर आरोप लगा कि मरीज की पहले ही मौत हो चुकी थी, लेकिन उसे ICU में रखा गया और इलाज जारी बताया गया। परिजनों से ₹3 लाख वसूले गए। बाद में जब शव सौंपा गया और शक गहराया तो यह खुलासा हुआ कि शव पर इलाज का नाटक किया गया।

पीलीभीत की पुरानी घटना भी याद करें – जब सच्चाई चौंकाने वाली थी

यही पीलीभीत जिला, जहां गंगा-जमुनी तहज़ीब और शांतिपूर्ण जीवन शैली की पहचान रही है, वही जिला इससे पहले भी एक मेडिकल धोखाधड़ी का गवाह बन चुका है।

2019 की घटना:

एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को बहुत ही गंभीर हालत में उनके परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। जब अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को देखा, तो वह पूरी तरह बेहोश था और उसमें कोई जान नहीं बची थी। डॉक्टरों ने आपस में यह समझ लिया कि व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

लेकिन इसके बावजूद, डॉक्टरों ने यह सच्चाई परिजनों से छिपा ली। उल्टा, उन्हें यह कहकर दिलासा दिया गया कि “इलाज जारी है, मरीज की हार्टबीट और ऑक्सीजन लेवल ठीक है।”

परिजनों को विश्वास में रखकर मरीज को ICU में भर्ती कर लिया गया। वहां करीब 18 घंटे तक उसे मशीनों से जोड़े रखा गया, जिससे ऐसा लगे कि इलाज हो रहा है।

इसके बाद परिजनों को 1.8 लाख रुपये का भारी भरकम बिल थमा दिया गया, और तब उन्हें बताया गया कि मरीज की मौत हो चुकी है।

परिजनों को शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है। उन्होंने पुलिस को बुलाया। जब शव का पोस्टमार्टम हुआ, तो सच्चाई सामने आई — व्यक्ति की मौत अस्पताल पहुंचने से काफी पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल ने जानबूझकर इलाज का नाटक किया, केवल पैसे वसूलने के लिए मशीनें लगाईं और संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं

मुर्दों का इलाज: देशभर की घटनाएं, कब-कहां हुईं ऐसी दर्दनाक लूट की घटनाएं

जोधपुर, राजस्थान (2023): शव पर ICU चार्ज

एक अस्पताल में युवक की मौत इलाज के दौरान हो गई थी, लेकिन अस्पताल ने शव को ICU में 7 घंटे रखा और प्रति घंटे ICU चार्ज जोड़ा। टोटल बिल ₹85,000 हुआ।

 चेन्नई, तमिलनाडु (2022): मृत बच्चे पर इलाज जारी

निजी अस्पताल ने मृत नवजात शिशु को 12 घंटे तक वेंटिलेटर पर रखा और कहा कि “उम्मीद है अभी सांस चल रही है।” बाद में शव सौंपा गया और ₹1.25 लाख का बिल थमा दिया गया।

 दिल्ली (2020): वेंटिलेटर से शव हटाने से इनकार

एक व्यक्ति की मौत के बाद भी अस्पताल ने शव को ICU में रखा, वेंटिलेटर चार्ज और डॉक्टर विज़िट जोड़ता रहा। कुल वसूली ₹2 लाख पार कर गई।

भोपाल, मध्य प्रदेश (2021): मृत व्यक्ति परिजनों पर पर दो दिन का बिल

पार्किंग में खड़े एम्बुलेंस में मौत हो गई, लेकिन अस्पताल ने उसे ICU में ले जाकर 48 घंटे ‘इलाज’ दिखाया। ₹1.8 लाख का बिल बनाया गया।

पटना, बिहार (2018): पोस्टमार्टम में खुलासा

एक युवक की मौत अस्पताल लाने से पहले हो गई थी, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज दिखाकर बिल काटा। बाद में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया और सामने आया कि मौत 6 घंटे पहले हो चुकी थी।

 नागपुर, महाराष्ट्र (2019): 6 घंटे तक मृत शरीर पर इलाज

एक बुजुर्ग महिला की मौत अस्पताल पहुंचने के 10 मिनट बाद हो गई थी, लेकिन 6 घंटे तक ICU में रखा गया और ₹90,000 का बिल बना दिया गया।

 गाजियाबाद, यूपी (2020): एम्बुलेंस में ही ‘इलाज’

मरीज की एम्बुलेंस में ही मौत हो गई थी लेकिन एम्बुलेंस स्टाफ ने डॉक्टर से मिलवाने के नाम पर ₹20,000 ले लिए और ‘ऑक्सीजन सपोर्ट’ जारी रखने की बात कहकर बिल काट दिया।

नैतिकता और चिकित्सा पेशा: दोनों का पतन

इन घटनाओं से साफ है कि कुछ अस्पतालों के लिए इंसान की मौत भी एक ‘बिजनेस ऑपर्च्युनिटी’ बन चुकी है। मरीज अब ‘रोगी’ नहीं, कमाई का साधन बन चुका है। ऐसे संस्थानों के लिए न कोई इंसानियत बची है, न कोई डॉक्टर धर्म।

क्या कानून ऐसे मामलों को रोक सकते हैं?

स्वास्थ्य मंत्रालय और IMA जैसी संस्थाएं इन घटनाओं पर सिर्फ जांच के आदेश देती हैं। FIR दर्ज होना, लाइसेंस रद्द होना या जेल जाना जैसे मामले बहुत कम सामने आते हैं। यही वजह है कि ये घटनाएं दोहराई जाती हैं।

जनता क्या करे? – जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

इलाज के हर स्टेप का रसीद लें।

मृत व्यक्ति की स्थिति को लेकर तुरंत डॉक्टर से दस्तावेज में पुष्टि कराएं।

संदेह होने पर वीडियो रिकॉर्डिंग करें और पुलिस को सूचित करें।

अस्पतालों की बिलिंग और मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर पारदर्शिता मांगें।

मुर्दों का इलाज, अब भी चुप रहे तो अगला नंबर किसी अपने का हो सकता है

पीलीभीत की घटनाएं हों या देश के किसी और कोने की — एक बात साफ है कि मेडिकल माफिया अब मौत को भी भुनाने लगा है।
मरे हुए व्यक्ति के नाम पर अगर लाखों की लूट मुमकिन है, तो ये सिर्फ उस व्यवस्था की कमजोरी नहीं बल्कि हमारी चुप्पी का नतीजा भी है।

अब वक़्त है डरने का नहीं, सवाल उठाने का। क्योंकि हो सकता है अगली बार आप अस्पताल से इलाज नहीं, एक चालाक लूट का अनुभव लेकर लौटें।

“सच का सामना ज़रूरी है, लेकिन सम्मान भी उतना ही जरूरी”

इस लेख का उद्देश्य हरगिज़ यह नहीं है कि देश के सभी अस्पताल या डॉक्टरों की नीयत पर सवाल उठाया जाए। नहीं, ऐसा कतई नहीं है। हमारे देश में आज भी लाखों ऐसे डॉक्टर मौजूद हैं जो एक-एक जान बचाने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं। वो अपने आराम, अपने परिवार, और यहां तक कि अपनी जान की परवाह किए बिना मरीज़ों की सेवा में जुटे रहते हैं। कई बार ऐसे उदाहरण सामने आते हैं जब डॉक्टर खुद बीमार होकर भी दूसरों का इलाज करते हैं। ऐसे चिकित्सकों की ईमानदारी और सेवा-भावना इस देश की असली ताकत है। लेकिन इसी पवित्र पेशे में कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हो गए हैं, जो लालच और लापरवाही से इस पेशे को कलंकित कर रहे हैं। इस लेख का मकसद सिर्फ इतना है कि जो गलत है, उसका पर्दाफाश हो और जो सही है, उसे पूरे सम्मान और आदर के साथ सिर झुकाकर सलाम किया जाए।

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