Mumbai Building Collapse: 15 की मौत – कई घायल, केक काटने के 5 मिनट बाद गिरी बिल्डिंग, विरार में आधी रात को हुआ हादसा
Mumbai Building Collapse: जन्मदिन की ख़ुशियाँ मातम में बदलीं, 15 मासूम ज़िंदगियाँ मलबे में दबकर ख़ामोश
महाराष्ट्र के पालघर ज़िले के विरार इलाके में बुधवार की आधी रात को हुआ एक हादसा पूरे देश को दहला गया। एक चार मंज़िला अपार्टमेंट अचानक भरभराकर ढह गया। इस इमारत में उस समय एक परिवार अपनी बेटी का जन्मदिन मना रहा था। केक काटने के महज़ पाँच मिनट बाद ही पूरा पिछला हिस्सा जमींदोज़ हो गया और जश्न की महफ़िल पलभर में मातम में बदल गई। इस हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों की ज़िंदगी उजाड़ दी, बल्कि प्रशासन और अवैध निर्माण के गहरे गठजोड़ पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Mumbai Building Collapse: हादसे का समय और परिस्थिति
यह घटना 27 अगस्त 2025 की रात करीब 12:05 बजे घटी। विरार के चांदनसर इलाके में स्थित रामाबाई अपार्टमेंट में रहने वाले लोग रोज़मर्रा की तरह अपने घरों में थे। इसी दौरान अपार्टमेंट का पिछला हिस्सा अचानक धराशायी हो गया। आवाज़ इतनी भयानक थी कि आस-पास के लोग सड़कों पर निकल आए। बताया जाता है कि गिरते ही पूरा इलाका धूल और चीख-पुकार से भर गया।
इमारत का विवरण और अवैध निर्माण की हकीकत
रामाबाई अपार्टमेंट करीब 13 साल पुरानी चार मंज़िला इमारत थी। इसमें कुल लगभग 50 फ्लैट बने हुए थे, जिनमें से 12 फ्लैट उस हिस्से में थे जो ध्वस्त हो गया। यह इमारत पूरी तरह अवैध तरीके से बनाई गई थी। नगर निगम ने इसे लेकर पहले ही नोटिस जारी किया था, लेकिन किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि दर्जनों परिवार इसी जर्जर और अवैध इमारत में अपनी ज़िंदगी गुजारने को मजबूर रहे और आखिरकार यह मौत का घर साबित हुई।
Mumbai Building Collapse: जनहानि और घायलों की स्थिति
इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से कुछ का अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ लोगों को इलाज के बाद छुट्टी भी दी गई है। मरने वालों में मासूम बच्चे, महिलाएँ और पूरे परिवार शामिल हैं। यह मौतें किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं, बल्कि सीधी-सीधी लापरवाही और भ्रष्टाचार की देन हैं।
Mumbai Building Collapse: मासूम पीड़ितों की पहचान
सबसे मार्मिक पहलू उस परिवार का है, जो अपनी बेटी का पहला जन्मदिन मना रहा था। 24 वर्षीय मां और उसकी एक साल की मासूम बच्ची केक काटने के कुछ ही पल बाद इस मलबे में दबकर जान गंवा बैठीं। उनका पति, यानी बच्ची का पिता, हादसे के बाद से लापता है और उसकी तलाश जारी है।
अन्य मृतकों में महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं, जिनमें से कई पूरे-के-पूरे परिवार इस हादसे में ख़त्म हो गए। यह तस्वीरें देखकर और पीड़ितों की दास्तां सुनकर किसी का भी दिल दहल उठेगा।
Mumbai Building Collapse: बचाव और राहत कार्य
जैसे ही हादसे की खबर मिली, प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीमों और अग्निशमन दल को मौके पर भेजा। चारों तरफ़ से लोगों ने भी मदद की कोशिश की। लेकिन संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाके की वजह से भारी मशीनें तुरंत अंदर नहीं पहुँच पाईं। शुरूआत में हाथों से मलबा हटाया गया और बाद में मशीनों की मदद से राहत अभियान तेज़ किया गया।
रातभर राहत कार्य चलता रहा। आसपास की कई इमारतों को ख़ाली कराकर पीड़ित परिवारों को पास के सामुदायिक भवन में अस्थायी तौर पर शरण दी गई। वहां उन्हें भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
प्रशासन और कानून की कार्रवाई
इस हादसे के बाद प्रशासन ने बिल्डर को गिरफ्तार किया है और उस पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बिल्डर पर लापरवाही से मौत का कारण बनने और अवैध निर्माण के आरोप लगे हैं। साथ ही, नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अवैध निर्माण का नोटिस जारी करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। यह हादसा दरअसल भ्रष्टाचार और लापरवाही की उसी श्रृंखला का परिणाम है, जिसका खामियाज़ा मासूम परिवारों ने अपनी जान देकर चुकाया।
Mumbai Building Collapse: सामाजिक और प्रशासनिक सवाल
यह हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारे शहरों में किस तरह अवैध और असुरक्षित इमारतें खड़ी हो रही हैं। जब नगर निगम जैसे संस्थान कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साध लेते हैं, तो आम लोगों की ज़िंदगी खतरे में पड़ जाती है।
क्या जिम्मेदार अधिकारी भी इस मौत के सौदागर बिल्डरों के बराबर दोषी नहीं हैं?
क्या महज़ बिल्डर को गिरफ्तार कर देना काफी है या प्रशासनिक लापरवाही पर भी सख्त कार्रवाई ज़रूरी है?
कितने और परिवारों को अपनी ज़िंदगी दांव पर लगानी होगी, ताकि ऐसी घटनाओं से सबक लिया जा सके?
विरार का यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के गिरने की जीती-जागती मिसाल है। मासूम बच्चों और परिवारों की मौत हमें याद दिलाती है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही से बड़ी कोई त्रासदी नहीं होती। इस घटना ने खुशियों को मातम में बदल दिया और एक साथ 15 घरों के चिराग बुझा दिए। सवाल यही है कि क्या इस बार सरकार और प्रशासन इससे सबक लेगा, या फिर कुछ दिनों बाद यह खबर भी धुंधली होकर बाकी अवैध इमारतों की भीड़ में गुम हो जाएगी?
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