Mainpuri: भाई के सामने बहन के साथ बलात्कार, शर्मसार युवती ने की आत्महत्या, पुलिस के सामने आरोपी को भीड़ ने छुड़ा लिया
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मैनपुरी: रेप से शर्मसार होकर युवती ने की आत्महत्या, आरोपी को परिजन छुड़ाकर ले गए – सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
रॉकेट पोस्ट लाइव | ग्राम अहमलपुर, थाना बेवर, जनपद मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
Mainpuri: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक 24 वर्षीय दलित युवती द्वारा आत्महत्या की दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पीड़िता ने कथित रूप से बलात्कार से आहत होकर खुदकुशी कर ली। घटना ने न सिर्फ समाज को, बल्कि पुलिस तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है, जहां बलात्कारी को भीड़ के दम पर छुड़वा लिया गया और पीड़िता को न्याय के बदले मौत मिली।
यह केवल आत्महत्या नहीं है, यह एक पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान है — जहां एक बेटी की चीख, इंसाफ से पहले दम तोड़ देती है।
Mainpuri: घटना का क्रमबद्ध विवरण
घर में अकेली थी युवती, मां रिश्तेदारी में थी
ग्राम अहमलपुर की रहने वाली 24 वर्षीय गीता (परिवर्तित नाम) 5 अगस्त की रात घर पर अकेली थी। उसकी मां रिश्तेदारी में गई हुई थी, बड़ा भाई पानीपत में नौकरी करता है, और छोटा भाई बहन अंजलि को बिहार पुलिस की परीक्षा दिलाने गया था। ऐसे में घर पूरी तरह सुनसान था।
Mainpuri: आरोपी छत के रास्ते घुसा और किया बलात्कार
इसी अवसर का फायदा उठाते हुए पड़ोस में रहने वाला प्रशांत पांडे, रात्रि लगभग 11:30 बजे, छत के रास्ते घर में घुस गया। गीता के परिजनों के अनुसार, प्रशांत ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। युवती की चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में रहने वाला उसका चचेरा भाई सूरज, अन्य लोगों की मदद से छत से जाल हटाकर अंदर घुसा और युवती को आरोपी के चंगुल से छुड़वाया। इस दौरान प्रशांत और ग्रामीणों में हाथापाई भी हुई।
लोगों ने आरोपी को पकड़ा, पर पुलिस के सामने छुड़ाकर ले गए
गांव के लोगों ने प्रशांत को पकड़कर एक कमरे में बंद कर दिया और पुलिस को सूचना दी। लेकिन इसी दौरान प्रशांत के परिजन कुछ अन्य लोगों के साथ पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में ही आरोपी को जबरन छुड़ाकर ले गए। यह घटना पूरी तरह से कानून व्यवस्था की पोल खोलती है।
Mainpuri: युवती ने आत्महत्या कर ली
घटना के कुछ ही समय बाद, गीता ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और छत पर लगे लोहे के कुंदे से दुपट्टे का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। यह सब कुछ पुलिस और आरोपी के परिवार द्वारा दबाव बनाए जाने के बीच हुआ।
पुलिस का रवैया और जांच की स्थिति
मामले की सूचना मिलते ही थाना बेवर पुलिस, क्षेत्राधिकारी भोगांव सत्य प्रकाश शर्मा और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने दावा किया है कि जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
परंतु सवाल यह है कि –
आरोपी को पुलिस की मौजूदगी में भीड़ कैसे छुड़ाकर ले गई?
पीड़िता को सुरक्षा और मानसिक सहयोग क्यों नहीं दिया गया?
पीड़िता के आत्महत्या करने से पहले किसी अधिकारी ने उसका बयान क्यों नहीं लिया?
परिजनों और ग्रामीणों का बयान
सुशीला देवी (मृतका की मां) –
“मेरी बेटी ने कभी किसी का बुरा नहीं किया। वह अकेली थी, उसी का फायदा उठाकर उस दरिंदे ने उसकी जिंदगी छीन ली। अब हम किसके पास जाएं?”
सूरज (चचेरा भाई) –
“मैंने उसे बचाने की कोशिश की। वो लड़ रही थी, चीख रही थी। लेकिन अब वो चली गई। आरोपी को सब जानते हैं, फिर भी वो बचकर चला गया।”
लखन सिंह (पड़ोसी) –
“गांव में सबने देखा कि आरोपी पकड़ा गया था। पर उसके घरवालों ने भीड़ जुटाकर उसे छुड़ा लिया। पुलिस मूकदर्शक बनी रही।”
सत्य प्रकाश शर्मा (सीओ भोगांव) –
“घटना की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
समाज के लिए गंभीर संदेश
यह घटना सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं है, बल्कि यह समाज और प्रशासन दोनों की असफलता का प्रतीक है। एक युवती जिसने बलात्कार सहा, समाज की शर्मिंदगी झेली और फिर न्याय के नाम पर बेबसी – ऐसे में आत्महत्या उसकी मजबूरी थी या समाज की हार?
न्याय की उम्मीद या एक और दबा हुआ केस?
आज गीता नहीं रही, लेकिन उसकी कहानी हर उस लड़की की कहानी बन गई है, जो अपनी अस्मिता की रक्षा में तिल-तिल मरती है। प्रशांत पांडे जैसे लोग सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि समाज की सोच का विकृत चेहरा हैं। प्रशासन और पुलिस को यह तय करना होगा कि क्या वो न्याय दिलाएंगे या सिर्फ कार्रवाई की रस्म निभाएंगे।
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