Kishtwar Cloudburst Tragedy: बादल फटने से तबाही — अब तक 65 की मौत, 150 से ज्यादा घायल, 200 से ज़्यादा लापता
Kishtwar Cloudburst Tragedy: बादल फटने से तबाही, 65 की मौत, 150 से ज्यादा घायल, 200 से ज़्यादा लापता
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में 14 अगस्त को आसमान से बरसी आफ़त ने सब कुछ बदल दिया। चाशोती (Chashoti) गाँव में बादल फटने से आई अचानक बाढ़ ने पूरे इलाके को तबाही के मंजर में बदल दिया। तेज़ पानी और मलबे की धारा में घर, सड़कें, पुल, खेत—सब कुछ बह गया। 15 अगस्त की सुबह तक राहत और बचाव कार्य जारी रहे, लेकिन हर घंटे के साथ मृतकों का आंकड़ा बढ़ता गया।
Kishtwar Cloudburst Tragedy:अब तक का हाल
मृतकों की संख्या: अब तक 65 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जिनमें से 21 की पहचान हो गई है।
लापता लोग: 100 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
घायल: 100 से ज़्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
रेस्क्यू: सेना, वायुसेना, NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार मलबा हटाने और लापता लोगों को खोजने में जुटी हैं।
Kishtwar Cloudburst Tragedy:कैसे हुई घटना
बताया जा रहा है कि सुबह के समय अचानक तेज़ बारिश शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में बादल फटने की घटना हो गई। पहाड़ों से पानी और भारी मलबा तेज़ रफ़्तार से नीचे आया और रास्ते में आने वाली हर चीज़ को बहा ले गया। नदी किनारे बसे घरों, दुकानों और खेतों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा। कई लोग नींद से जाग भी नहीं पाए और तेज़ पानी में बह गए।
Kishtwar Cloudburst Tragedy:राहत और बचाव कार्य
रेस्क्यू ऑपरेशन में हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल हो रहा है। सेना के जवान ऊंचे इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। घायलों को तुरंत नज़दीकी अस्पतालों और ज़िला अस्पताल किश्तवाड़ में शिफ्ट किया जा रहा है। राहत सामग्री, खाने-पीने का सामान और दवाइयां भी हेलीकॉप्टर से पहुंचाई जा रही हैं।
Kishtwar Cloudburst Tragedy:सरकार और प्रशासन की सक्रियता
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हालात पर नज़दीकी नज़र बनाए रखी है। दोनों नेताओं ने घटनास्थल का दौरा करने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से लगातार संपर्क में रहते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
जनजीवन पर असर
स्वतंत्रता दिवस के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम और मुख्यमंत्री का “At Home” चाय समारोह रद्द कर दिया गया है। स्थानीय स्कूल और बाज़ार बंद हैं। कई सड़कें मलबे से बंद होने के कारण राहत वाहनों को पहुंचने में मुश्किल हो रही है। मोबाइल कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि लोग लापता परिजनों की जानकारी दे सकें या सहायता मांग सकें।
लोगों की दास्तान
जो लोग इस क़हर से बच निकले, उनके लिए यह ज़िंदगी का सबसे डरावना अनुभव है। कई परिवारों के सदस्य अब भी लापता हैं, जबकि कुछ ने अपनों को अपनी आंखों के सामने बहते देखा। गांवों में मातम पसरा हुआ है और लोग अपनों के बारे में हर खबर का इंतज़ार कर रहे हैं।