Bird Flu Control Plan in Pilibhit: DM की अगुवाई में बर्ड फ्लू पर काबू की तैयारी
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: DM की अगुवाई में पीलीभीत ने बर्ड फ्लू रोकथाम के लिए कसी कमर, तैयार हुई ठोस कार्ययोजना
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: पीलीभीत जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जिला टास्कफोर्स की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक गांधी सभागार में हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य कुक्कुट पक्षियों में फैलने वाली गंभीर बीमारी एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के बचाव और नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करना था। यह बीमारी न केवल पक्षियों के लिए, बल्कि मनुष्यों और अन्य पशुओं के लिए भी खतरनाक है। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लेकर बीमारी की रोकथाम के लिए बहुआयामी रणनीतियों पर चर्चा की।
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: रोग की प्रकृति और खतरे की गंभीरता
बैठक के आरंभ में बताया गया कि एवियन इन्फ्लूएंजा एक अत्यंत संक्रामक और तेजी से फैलने वाला पशुजन्य रोग है। यह वायरस पक्षियों की लगभग सभी प्रजातियों को प्रभावित कर सकता है। संक्रमण के बाद लक्षण कुछ घंटों से लेकर तीन दिनों के भीतर सामने आ सकते हैं। बीमारी के प्रमुख लक्षणों में अचानक मृत्यु दर में वृद्धि, आँखों में सूजन, कलगी का नीला पड़ना, हरे या पीले रंग का मल, पैरों में रक्त के थक्के और अंडे देने वाली मुर्गियों में उत्पादन का अचानक रुक जाना शामिल हैं। बीमारी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह पक्षियों से मनुष्यों और अन्य पशुओं में भी फैल सकती है।
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: जिले की वर्तमान स्थिति
जनपद में कुल 9 लेयर कुक्कुट प्रक्षेत्र और लगभग 82 ब्रायलर कुक्कुट प्रक्षेत्र चिन्हित हैं, जिनमें करीब 3 लाख मुर्गियां संरक्षित हैं। अब तक जिले में किसी भी पक्षी में बीमारी के पुष्ट लक्षण नहीं मिले हैं और लैब में भेजे गए नमूनों में भी रोग की पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद प्रशासन ने सतर्क रहते हुए अग्रिम कार्यवाही के रूप में सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं।
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: टास्कफोर्स और टीमों का गठन
जिले में बर्ड फ्लू की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक विशेष टास्कफोर्स का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हैं, जो अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। साथ ही, त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम (किलिंग टीम) और सर्विलांस टीम का भी गठन किया गया है। इन टीमों को बीमारी के किसी भी संभावित प्रकोप पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में राजकीय पशु चिकित्सालय, सदर और तहसील स्तर पर बर्ड फ्लू नियंत्रण केंद्र स्थापित कर दिए गए हैं।
संसाधन और उपकरण की उपलब्धता
जिला प्रशासन ने रोग नियंत्रण के लिए पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट और फेस मास्क की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। कुल 16 सर्विलांस टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जो नियमित रूप से कुक्कुट फार्मों का दौरा कर टीकाकरण, सेनेटाइजेशन और जैव सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रदान कर रही हैं। पशुपालन विभाग प्रतिदिन पक्षियों के सीरम, नेजल और स्वैब नमूनों को परीक्षण के लिए लैब में भेज रहा है।
Bird Flu Control Plan in Pilibhit: बहु-विभागीय समन्वय और निगरानी
जिलाधिकारी ने पशुपालन, वन और सिंचाई विभाग को भौतिक एवं सीरो सर्विलांस जारी रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को रैपिड रिस्पांस टीम के कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने और पर्याप्त मात्रा में एंटीवायरल दवाओं का स्टॉक तैयार रखने को कहा गया है। राजस्व विभाग को किलिंग क्षेत्र का मानचित्र तैयार करने और मृत पक्षियों के दहन या दफन के लिए भूमि चिन्हित करने के निर्देश मिले हैं। वहीं लोक निर्माण विभाग को जेसीबी, फॉगिंग मशीन और स्प्रे मशीन जैसे उपकरणों को तैयार रखने का कार्य सौंपा गया है। पुलिस विभाग को बीमारी से संबंधित प्रतिबंधों का पालन कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
जन-जागरूकता अभियान
बैठक में ग्रामीणों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को निर्देश दिए गए कि यदि एक या अधिक पक्षी मृत पाए जाएं, तो तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दें और मृत पक्षियों को हाथ न लगाएं। पोल्ट्री उत्पादों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। साथ ही, जिले में बाहर से आने वाले पोल्ट्री उत्पादों और मुर्गीदान पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश भी जारी किए गए।
जिले में भले ही अभी तक बर्ड फ्लू का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासन ने किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए व्यापक और संगठित योजना तैयार कर ली है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता, जागरूकता कार्यक्रम और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों के गठन से जिले को पूरी तरह तैयार किया गया है। यह पहल न केवल मौजूदा स्थिति को सुरक्षित बनाए रखने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते रोकने में भी कारगर साबित होगी।
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