गीता ज्ञान यज्ञ एवं संत सम्मेलन में जुटे भक्त और सन्त

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विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी दिव्या गीता ज्ञान कुंज जगदीशपुर रोड बिधनू स्थित आश्रम में दो दिवसीय गीता ज्ञान यज्ञ एवं संत सम्मेलन हजारों संतों एवं भक्तों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ हरिद्वार से आए हुए संत श्री राजेंद्र दास आत्यानंद व ज्ञानेंद दास, बृजकिशोर तिवारी के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। ज्ञान यज्ञ के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर उमेश पालीवाल जी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में होना अति आवश्यक है, जिससे गीता की महत्व एवं ज्ञान को जन जन तक पहुंचाया जा सके ।

गीता पाठ से मिलती है आत्मशांति

आचार्य श्री रामकृष्ण तिवारी में बहुत ही सरल एवं मार्मिक ढंग से गीता के महत्व को बताते हुए कहा कि गीता के पाठ से मानासिक विकार नष्ट होते हैं व आत्म शांति मिलती है गीता का ज्ञान ही है जो भगवान ने स्वयं अपनी वाणी से हमें दिया है इसको आत्मसात कर जीवन जीने से मनुष्य मोक्ष का अधिकारी होता है। स्वामी मुनीषानंद ने कहा कि हमें नित्य गीता का पाठ करना चाहिए। व्यक्ति किसी भी धर्म जाति संप्रदाय का हो गीता ही हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। आश्रम के संरक्षक अशोक तिवारी ‘ब्रह्मनिष्ठ’ में बताया कि आश्रम के माध्यम से आसपास के जिलों में गीता ज्ञान एवं भगवान का नाम लेखन का प्रचार प्रसार 10 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। साथ ही गीता ज्ञान यज्ञ के कार्यक्रम गांव गांव एवं शहर के मोहल्लों मोहल्ले में ऐसा निरंतर प्रयास हो रहा है। अब तक लगभग 451 गीता ज्ञान यज्ञ एवं 41 करोड़ से अधिक राम नाम लेखन का कार्य पूर्ण हुआ है।

प्रमुख लोग रहे मौजूद

आश्रम में लगभग 1000 भक्तों ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉक्टर उमेश पालीवाल, डॉक्टर आरके मिश्रा, अखिलेश शुक्ला, अमरनाथ, परमानंद शुक्ला, स्वामी मुनिपनन्द, साध्वी जी सुमन भारती, स्वामी आत्मानंद, अशोक तिवारी, आचार्य रामकृष्ण तिवारी, शशि भूषण मिश्रा आदि संतों एवं भक्तों ने भाग लिया

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