Ghaziabad: मासूम बच्चों की ऑन-डिमांड तस्करी का खेल, 5 लाख प्रति बच्चा में सौदा, 4 गिरफ्तार
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Ghaziabad: ऑन‑डिमांड बच्चों की तस्करी: गाजियाबाद से हुआ एक मानवता को शर्मसार करने वाला खुलासा
गाजियाबाद से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बच्चों को ‘ऑन‑डिमांड’ अगवाकर बेचने का काम करता था। इस गिरोह में समाज के अंदरूनी तंत्र से जुड़ी महिलाएं भी शामिल थीं — जिनमें एक नर्स और एक आशा वर्कर भी शामिल हैं। यह गिरोह गरीब और बेसहारा परिवारों के बच्चों को निशाना बनाकर उन्हें निःसंतान दंपतियों को मोटी रकम में बेच देता था।
Ghaziabad: बिकते थे मासूम — तस्वीरें शेयर कर होती थी डील
इस गिरोह का काम करने का तरीका चौंकाने वाला था। पहले वे बच्चों की रेकी करते थे — यानी किसी मोहल्ले या अस्पताल में निगरानी रखकर मासूम बच्चों की पहचान करते थे। उसके बाद उनकी तस्वीरें एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जाती थीं। इन तस्वीरों में बच्चे के लिंग, रंग, उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति का ब्योरा दिया जाता था। उसके आधार पर “ऑन डिमांड” ग्राहक तय किए जाते थे और फिर सौदा फाइनल होता था।
मासूमों की कीमत — इंसानियत का सौदा
इस गिरोह के नेटवर्क के जरिए बच्चों की कीमत 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक निर्धारित की जाती थी। खास बात ये थी कि ग्राहक निःसंतान दंपति होते थे, जो समाज में सम्मानजनक जीवन जी रहे होते, लेकिन बच्चों की कमी के चलते गिरोह के जाल में फंस जाते। सौदा होते ही बच्चों को अगवा कर, उन्हें खरीदार तक पहुंचा दिया जाता था — बिना किसी दस्तावेज, कानून या नैतिकता के।
Ghaziabad: गिरफ्त में आए दलाल — महिलाएं भी थीं शामिल
पुलिस की कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। महिलाओं में एक अस्पताल की नर्स और एक आशा वर्कर भी शामिल हैं, जो न सिर्फ मासूम बच्चों की जानकारी जुटाती थीं, बल्कि उनका अपहरण करने में भी सक्रिय भूमिका निभाती थीं। ये महिलाएं अपने पद का दुरुपयोग कर अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्रों से मासूमों की पहचान कर गिरोह को सूचना देती थीं।
Ghaziabad: पहले भी सामने आ चुके हैं सुराग
इस गिरोह के संबंध पहले भी कुछ बच्चों की गुमशुदगी की घटनाओं से जुड़े माने जा रहे हैं। कई मामलों में बच्चे संदिग्ध परिस्थितियों में अस्पतालों से गायब हुए हैं, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा था। अब इन गिरफ्तारियों के बाद उन मामलों की भी परतें खुलने की उम्मीद है। पुलिस द्वारा गिरोह के मोबाइल फोन और चैटिंग रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जिनसे बच्चों की तस्वीरें, सौदे और ग्राहकों के नाम-पते तक सामने आ सकते हैं।

क्या कहता है समाज — कानून और नैतिकता की गिरावट
यह घटना केवल अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का एक उदाहरण है। बच्चे जिन्हें संरक्षण और प्रेम मिलना चाहिए, वे बाजारू सौदेबाज़ी का हिस्सा बन रहे हैं। अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महिलाओं का इसमें शामिल होना इस गिरावट को और भयावह बना देता है। यह घटना दर्शाती है कि अपराध अब केवल छुपकर नहीं, बल्कि व्यवस्थित रूप से हमारी सामाजिक संरचना के भीतर ही फल-फूल रहा है।
पुलिस की सक्रियता और भविष्य की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस ने अपनी तत्परता और निगरानी से इस गिरोह पर शिकंजा कसते हुए चार आरोपियों को पकड़ लिया है। इनके खिलाफ मानव तस्करी, अपहरण, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी है। पुलिस की कोशिश है कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और ग्राहकों तक भी जल्द से जल्द पहुंचा जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम का बचपन नीलाम न हो।
एक अलर्ट, एक सवाल
यह मामला महज एक गिरोह के भंडाफोड़ तक सीमित नहीं है — यह हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि हम अपने आस‑पास क्या घट रहा है, उस पर नजर रखें। बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक का फर्ज है कि वो सजग और सतर्क रहे। क्योंकि जब बचपन बिकने लगे, तो केवल कानून नहीं, पूरी मानवता कटघरे में होती है।
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