वाराणसी में भीष्म परंपरा: अमर योद्धाओं की स्मृति में विशेष दीप प्रज्वलन

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वाराणसी में भीष्म परंपरा: गंगा सेवा निधि का राष्ट्रवादी संकल्प

वाराणसी में भीष्म परंपरा:  दशाश्वमेध घाट पर, गंगा सेवा निधि द्वारा अमर शहीदों की स्मृति में आकाश दीप जलाने की परम्परा ने इस वर्ष 25 साल पूरे कर लिए। यह आयोजन 18 अक्टूबर 2024 को सायं 5 बजे प्रारम्भ हुआ, जिसमें शहीदों के प्रति आभार और श्रद्धांजलि व्यक्त की गई। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की शुरुआत गणपति वंदना और देशभक्ति गीत से हुई, जहाँ मुख्य अतिथि और विशेष अतिथियों ने शहीदों की वीरता को नमन किया।

वाराणसी में भीष्म परंपरा: राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता का संगम

1999 में कारगिल युद्ध की विजय से प्रेरित होकर, गंगा सेवा निधि ने अमर शहीदों के प्रति श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति को एक साथ जोड़ते हुए आकाश दीप प्रज्ज्वलन की यह परंपरा प्रारम्भ की। कार्तिक मास में काशी के गंगा घाटों पर जलते हुए ये दीपक सदियों से अपने पूर्वजों की स्मृति को आलोकित करने का प्रतीक रहे हैं। गंगा सेवा निधि ने इस परंपरा को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए इसे अमर वीर योद्धाओं की स्मृति में विस्तारित किया।

इस वर्ष, संस्था ने भव्य देव-दीपावली महोत्सव का आयोजन कर भारत के वीर योद्धाओं को “भगीरथ शौर्य सम्मान” से सम्मानित करने की घोषणा की। इस सम्मान के तहत शहीद परिवारों को 1 लाख रुपये सहायता राशि भी दी जाएगी, जिससे समाज में शहीदों के परिवारों की देखभाल का संदेश जाएगा।

वाराणसी में भीष्म परंपरा: कारगिल युद्ध से जुड़ी आकाश दीप की परंपरा

वाराणसी में भीष्म परंपरा: महाभारत के भीष्म ने अपने प्राण त्यागने वाले योद्धाओं की स्मृति में कार्तिक मास में दीप प्रज्ज्वलन किया था, और उसी परंपरा को पुनः जीवित करने के लिए 1999 के कारगिल युद्ध ने गंगा सेवा निधि को प्रेरित किया। यह परंपरा अब 25 सालों से अमर शहीदों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बन चुकी है।

इस वर्ष, 136 BN CRPF के शहीद विनोद कुमार यादव, 61 BN CRPF के शहीद रमेश यादव, और भारतीय थल सेना के शहीद कर्नल एम एन राय जैसे वीर योद्धाओं की स्मृति में आकाश दीप जलाए गए। इन वीरों ने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और इस कार्यक्रम में उनके बलिदान को सम्मानित किया गया।

विशेष अतिथियों और शहीदों के परिवारों का सम्मान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाराणसी के माननीय मेयर श्री अशोक तिवारी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एयर कमाडोर कुणाल काला ने की, जिन्होंने गंगा सेवा निधि की इस पहल की सराहना की। डी.आई.जी. श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी शहीदों के प्रति अपने सम्मान का इज़हार किया। इस अवसर पर शहीदों के परिवारों का विशेष रूप से सम्मान किया गया और उन्हें सहायता राशि प्रदान की गई।

वाराणसी में भीष्म परंपरा: समाजसेवी रतन टाटा को नमन

इस अवसर पर गंगा सेवा निधि ने प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति और समाजसेवी स्वर्गीय रतन नवल टाटा को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके समाज के प्रति योगदान और अमूल्य कार्यों को ध्यान में रखते हुए, संस्था ने पूरे कार्तिक मास में उनके सम्मान में आकाश दीप जलाने का निर्णय लिया।

समापन और भविष्य का संदेश

वाराणसी में भीष्म परंपरा: आकाश दीप प्रज्ज्वलन के 25वें वर्ष में गंगा घाट पर अमर शहीदों को नमन
वाराणसी में भीष्म परंपरा: आकाश दीप प्रज्ज्वलन का भब्य नज़ारा

आकाश दीप कार्यक्रम का समापन कार्तिक पूर्णिमा (15 नवम्बर 2024) को देव-दीपावली महोत्सव के साथ किया जाएगा। गंगा सेवा निधि द्वारा यह प्रयास समाज में वीर योद्धाओं के प्रति सम्मान और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। यह कार्यक्रम न केवल हमारे शहीदों की स्मृति को जीवित रखने का प्रतीक है, बल्कि समाज के हर नागरिक को अपने देश के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाता है।

इस आयोजन के माध्यम से संस्था ने समाज को यह संदेश दिया है कि हमारे शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनकी स्मृति में जलते हुए ये आकाश दीप हमारे राष्ट्र के प्रति समर्पण और श्रद्धा की लौ को हमेशा प्रज्ज्वलित रखते हैं।

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