फर्रुखाबाद में बाढ़ से शमशान घाट डूबे, लोगों ने सड़क किनारे किए अंतिम संस्कार
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स्थानीय लोगों ने बताई समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि जहां-जहां सड़क पर अभी पानी नहीं पहुंचा है, वहीं पर लोग शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। कंपिल और दूंदेमई के बीच कुछ स्थान अभी सुरक्षित हैं और वहीं पर अस्थायी चिताएं सजाई जा रही हैं। यह नजारा प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
चार घाट है बाढ़ की चपेट में
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते वैकल्पिक श्मशान घाटों की व्यवस्था की होती, तो आज यह समस्या इतनी गंभीर न होती। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है क्योंकि मार्ग कट जाने से स्वास्थ्य सेवाओं और आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है।
फिलहाल, प्रशासन स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और राहत कार्य जारी रखने की बात कह रहा है। लेकिन, स्थानीय लोगों का मानना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव होगा जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहले से सुरक्षित शमशान घाट और सड़कें विकसित की जाएं।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ बेहतर व्यवस्था की भी उतनी ही आवश्यकता है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाना समय की मांग है।