Delhi Red Fort Blast: एक और आतंकी दानिश गिरफ्तार, NIA की कार्रवाई जारी
Delhi Red Fort Blast: डॉ. उमर और दानिश का आतंकवादी नेटवर्क उजागर
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 की शाम को हुए भयंकर कार धमाके ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह एक संगठित आतंकवादी साजिश का हिस्सा थी। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस हमले में शामिल था डॉ. उमर उन नबी, जिसे आत्मघाती वाहन हमलावर के रूप में पहचाना गया है। उसके साथ एक और नाम जुड़ा है — दानिश, जो तकनीकी और रणनीतिक रूप से इस साजिश का सहयोगी था।
यह धमाका केवल एक हमले की घटना नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट संकेत देता है कि आतंकवाद अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तकनीक, नेटवर्क और वित्तीय संसाधनों का भी खेल बन गया है।
डॉ. उमर उन नबी — मुख्य आरोपी
धमाके में इस्तेमाल हुई कार उसी कार थी जिसे उमर ने खरीदी थी। डीएनए परीक्षण ने पुष्टि की है कि मलबे में मिले अवशेष उमर से संबंधित थे।
सीसीटीवी फुटेज में उमर को पूरे दिल्ली-एनसीआर में घूमते हुए देखा गया, जिसमें लाल किला और आसपास के संवेदनशील इलाके शामिल थे।
धमाके से पहले उमर ने एक मस्जिद में लगभग 10–15 मिनट बिताए और उसके बाद कार को लाल किले की ओर मोड़ा।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह हमला केवल व्यक्तिगत योजना नहीं था, बल्कि संगठित मॉड्यूल का हिस्सा था।
धमाके के लिए लगभग ₹20 लाख की फंडिंग जुटाई गई थी, जिसमें उमर की प्रमुख भूमिका थी।
उमर की गतिविधियों और कार की मूवमेंट से स्पष्ट है कि यह हमला पूरी तरह से सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था।
दानिश — तकनीकी और रणनीतिक सहयोगी
दानिश को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया गया है। वह उमर का सक्रिय सहयोगी माना जा रहा है।
उसकी भूमिका तकनीकी और रणनीतिक थी। इसमें शामिल हैं ड्रोन मोडिफिकेशन और विस्फोटक उपकरणों की तैयारी।
उमर और दानिश की मुलाकात कुलगाम में हुई थी, जो इस पूरे नेटवर्क की साजिश की रीढ़ साबित हुई।
दानिश की गिरफ्तारी जांच के लिए एक बड़ा मोड़ है। इससे स्पष्ट होता है कि यह हमला सिर्फ एक अकेले हमलावर का काम नहीं, बल्कि एक व्यापक और संगठित आतंकवादी नेटवर्क का परिणाम था।
हमले की गंभीरता और संभावित संकेत
उमर ने यह हमला उस समय किया, जब उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि यह हमला पैनिक और निर्णायक कदम था।
दानिश जैसे तकनीकी सहयोगियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आतंकवाद अब केवल हथियारों और विस्फोट तक सीमित नहीं, बल्कि जटिल तकनीक और रणनीति का खेल बन गया है।
फंडिंग नेटवर्क और हवाला चैनलों के खुलासे से पता चलता है कि यह मॉड्यूल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी संगठित था।
उमर का दिल्ली-एनसीआर में घूमना और धमाके की पूर्व तैयारियों का खुलासा यह दर्शाता है कि हमले को पूर्णत: सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक अंजाम दिया गया था।
यह धमाका केवल लाल किले की सुरक्षा का मामला नहीं है। यह पूरे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। उमर और दानिश जैसे लोग, जो तकनीकी और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, भविष्य में और भी बड़े हमलों की क्षमता रखते हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस नेटवर्क की फंडिंग और हेडलर कौन हैं, और आगे के कदम क्या हो सकते हैं। यह हमले की योजना और कार्यान्वयन दोनों की गहन जांच की मांग करता है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद अब सिर्फ हथियारों का खेल नहीं रहा, बल्कि ज्ञान, तकनीक और नेटवर्क की जटिलताओं का युद्ध बन चुका है।
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