Delhi Blast: आतंकी उमर का स्लीपर सेल नेटवर्क खड़ा करने का षड्यंत्र, जानिए ”दोस्ती के जाल से ब्रेनवॉश” तक
Delhi Blast: सोशल मीडिया दोस्ती से ब्लास्ट तक, उमर का स्लीपर सेल नेटवर्क खड़ा करने का षड्यंत्र
दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में जिस डॉ. उमर उन नबी पर मुख्य साजिशकर्ता होने का शक है, उसकी जांच अब एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। शुरुआती रपटों में सामने आया है कि उमर ने सोशल मीडिया के ज़रिए दोस्ती का जाल बिछाया, जिसे बाद में ब्रेनवॉश और स्लीपर सेल नेटवर्क के संचालन में इस्तेमाल किया गया। यह हमला सिर्फ एक ‘इंस्टेंट बम’ नहीं, बल्कि गहरे, लंबे समय से तैयार किये गए आतंकी मॉड्यूल की परतों में गूंज रहा है।
स्लीपर सेल की गहराई — कैसे उमर ने बनाया इनफिल्ट्रेशन नेटवर्क
जांच एजेंसियों को उमर के मोबाइल और सीसीटीवी फुटेज में ऐसे सुराग मिले हैं, जो यह बताते हैं कि वह सिर्फ एक हमला करने वाला अपराधी नहीं था, बल्कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे चरमपंथी नेटवर्क का सक्रिय एजेंट था।
सुरक्षा फोर्सेज़ के अनुसार, वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं के साथ दोस्ती करता था, उन्हें धीरे-धीरे चरमपंथी विचारों की ओर मोड़ता था और फिर उन्हें ‘स्लीपर’ एजेंट के रूप में तैनात करता था।
फुटेज और पूछताछ में यह भी पाया गया है कि उमर ने दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया—जिसमें से एक को उसने विस्फोट से पहले कहीं छुपा दिया था। यह उसकी ट्रेल मिटाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ब्लास्ट का दिन — कैसे सामने आया खौफनाक चेहरा
10 नवंबर को, लाल किले मेट्रो स्टेशन के नजदीक, एक आई-20 कार में जोरदार विस्फोट हुआ। जांच में यह सामने आया है कि उसी कार को चला रहा था उमर उन नबी।
एक सीसीटीवी फुटेज में, उमर को डॉक्टर की वेशभूषा — सफेद कोट और गले में स्टेथोस्कोप — में देखा गया। यह रूपांतरण उसकी साजिश की रणनीति की परत खोलता है, क्योंकि उसने डॉक्टर का चेहरा अपनाकर अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की।
विस्फोट के बाद कार में मिली लाश की पहचान उसकी मां के डीएनए सैंपल के मिलान से की गई है, जिससे उसकी संलिप्तता लगभग पक्की हो गई है।
नेटवर्क का विस्तार और आतंकी साजिश की परतें
जांच में यह पाया गया है कि यह हमला एक बड़े डॉक्टर-नेतृत्व वाले आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा था। इसमें अन्य डॉक्टरों और पेशेवरों को शामिल किया गया था, जो चरमपंथी विचारधाराओं को फैलाने का काम कर रहे थे।
यह साजिश सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है — उमर के कनेक्शन जम्मू-कश्मीर और अन्य इलाकों में भी फैले पाए गए हैं।
संभावनाएं यह भी जताई जा रही हैं कि उमर को ट्रेनिंग जैश-ए-मोहम्मद हैंडलर्स से मिली थी, और विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री उसकी प्लानिंग का हिस्सा थी।
वजीरपुर से दिल्ली तक, संदिग्ध हलचलें
जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी रिकॉर्ड्स के आधार पर पाया है कि ब्लास्ट से पहले उमर वजीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया गया था।
वह एक चाय स्टॉल पर कुछ मिनटों तक खड़ा रहा, लेकिन न तो उसने चाय पी, न कुछ खरीदा। यह गतिविधि एजेंसियों को गहरे शक में डाल रही है कि वह किसी से मिलने या इलाके का निरीक्षण करने आया था।
कार्रवाई और प्रतिक्रिया
इस मामले की जांच में कई एजेंसियाँ शामिल हैं, खासकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)।
धमाके के बाद सुरक्षा बलों ने उमर के घर को ध्वस्त करने का निर्णय लिया, जिससे यह संदेश दिया गया कि आतंकवाद समर्थित गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उसके खिलाफ UAPA और विस्फोटक अपराधों के तहत केस दर्ज किया गया है, जिससे यह साफ होता है कि इस हमले की जड़ें गहरी और संगठित थीं।
उमर उन नबी का पूरा मामला यह दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया के ज़रिए दोस्ती, फिर विचारधारा की खुराक, और अंत में आतंक की राह — यह सब कितने खतरनाक तरीके से एक साथ जुड़ जाते हैं।
उसका नेटवर्क, उसके स्लीपर सेल और उसके आतंकवादी हैंडलर्स एक ऐसी साजिश की तस्वीर पेश करते हैं जिसे मिटाने में सुरक्षा एजेंसियों को समय और संसाधन दोनों झोंकने पड़े।
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