Delhi Blast Case: अमित शाह की एक बैठक… और देशभर में मचा हड़कंप, ED की 25 जगहों पर रेड

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Delhi Blast Case में अमित शाह की बैठक के बाद देशभर में हड़कंप, ED ने 25 जगहों पर रेड कर व्हाइट कॉलर टेरर फंडिंग की जांच तेज कर दी है।

Delhi Blast Case की सबसे बड़ी कार्रवाई: “व्हाइट कॉलर टेररिज़्म” की पड़ताल शुरू

दिल्ली ब्लास्ट केस में दहला देने वाला खुलासा!
अमित शाह की एक बैठक… और देशभर में मचा हड़कंप!
ED ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर कसा शिकंजा, 25 ठिकानों पर एक साथ धावा—भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने आतंक के नेटवर्क पर ऐसा वार किया है, जिसकी गूंज सीधे आतंकी फंडिंग की रीढ़ तक जा रही है!
 

दिल्ली के दिल को दहला देने वाले 10 नवंबर के ब्लास्ट के बाद अब जांच एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जिसने पूरे देश की जड़ों को हिला दिया है। सिर्फ धमाका ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपा शिक्षा संस्थानों, NGOs और निजी व्यापारियों के जरिए चलने वाला व्हाइट कॉलर आतंकी फंडिंग नेटवर्क अब खुलकर सामने आ रहा है।
और इस पूरे जाल के केंद्र में है — फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी।

शनिवार सुबह 5 बजे, जब देश अभी जाग ही नहीं रहा था, उसी समय ED की टीमें तीन राज्यों — दिल्ली, हरियाणा और मध्यप्रदेश — में 25 जगहों पर एक साथ रेड करने उतरीं।
यह कोई साधारण कार्रवाई नहीं थी… यह सीधा हमला था उस “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” पर, जिसके जरिए आतंकियों को फंडिंग और सहयोग मिलने का शक है।

अमित शाह की सीधी चेतावनी: “पाताल में भी छुपोगे… तो भी निकाल लाएंगे!”

सूत्रों के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई की रूपरेखा उस हाई-लेवल मीटिंग में तैयार हुई जिसमें गृह मंत्री अमित शाह, IB, NIA और ED के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।
इस मीटिंग में दिल्ली ब्लास्ट के बाद मिले नए इनपुट्स ने सभी को चौंका दिया।
टेरर फंडिंग… हवाला… और शिक्षा संस्थानों के जरिए पैसा पहुंचाने वाले व्हाइट कॉलर नेटवर्क पर बेहद गहन चर्चा हुई।

अमित शाह ने साफ निर्देश दिया:

दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े हर आर्थिक लिंक की गहराई से जांच करो।

आतंकी फंडिंग की एक भी कड़ी बचनी नहीं चाहिए!

इसी आदेश के बाद ED को ग्रीन सिग्नल दिया गया और “ऑपरेशन फंड-ट्रैक” शुरू हो गया।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैसे आई रडार पर?

ED को पिछले कुछ दिनों से लगातार यह संकेत मिल रहे थे कि फरीदाबाद के इस संस्थान का टेरर मॉड्यूल से सीधा या अप्रत्यक्ष आर्थिक रिश्ता हो सकता है।
कई संदिग्ध लेन-देन, फंड मूवमेंट, NGO कनेक्शन और व्हाइट कॉलर बिजनेस लिंक पहले से ही निगरानी में थे।

जावेद अहमद सिद्दीकी — यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चेयरमैन

करोड़ों की यूनिवर्सिटी खड़ी करने के लिए पैसा कहां से आया?

कई वित्तीय गड़बड़ियां सामने।

धोखाधड़ी मामलों में जेल जा चुके हैं।

दिल्ली ब्लास्ट केस में समन भेजा गया, मगर हाजिर नहीं हुए

इन सब पर ईडी की “लाल नजर” काफी समय से थी।

रेड कैसे हुई? 25 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

शनिवार सुबह 5 बजे

दिल्ली के ओखला स्थित यूनिवर्सिटी मुख्यालय

फरीदाबाद का मुख्य कैंपस

ट्रस्टियों और मैनेजमेंट के घर, दफ़्तर, निजी ठिकाने
एक साथ छापेमारी शुरू की गई।

ईडी टीमें अभी भी यहाँ क्या कर रही हैं?

संदिग्ध दस्तावेजों की जब्ती

फंडिंग रिकॉर्ड की जांच

डिजिटल डाटा की कॉपी

नकदी, लेजर, चैट, बैंक ट्रांजैक्शन की स्कैनिंग

हवाला लिंक की छानबीन

यह हमला सिर्फ यूनिवर्सिटी पर नहीं, बल्कि आंतक के व्हाइट कॉलर सपोर्ट सिस्टम पर है।

फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल कितना बड़ा?

पिछले हफ्ते जांच से पता चला कि
यह नेटवर्क सिर्फ जमीन पर काम करने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं था…
बल्कि शिक्षा संस्थानों, NGOs, प्राइवेट बिजनेस और बिचौलियों के जरिए फंडिंग की एक लंबी चेन चल रही थी।

यही कारण है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी सीधे रडार पर आ गई।

दिल्ली ब्लास्ट: 15 की मौत, NIA की एंट्री, और अब “व्हाइट कॉलर” साजिश

लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 15 हो चुकी है।
जांच NIA को सौंप दी गई है।
और अब दावा है कि इस पूरे धमाके की साजिश अल-फलाह यूनिवर्सिटी से रची गई थी।

हालांकि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कहा है —
“कैंपस में कोई आतंकी गतिविधि नहीं हुई।”

लेकिन ईडी की रेड इस बयान को कितना सही या गलत साबित करेगी…
यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।

असली खेल क्या है?

यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं… बल्कि आतंक की आर्थिक जड़ें काटने की लड़ाई है।

टेरर मॉड्यूल

व्हाइट कॉलर फंडिंग

यूनिवर्सिटी/NGO/बिजनेस नेटवर्क

हवाला चैनल

यह एक लंबी चेन है
और ईडी का दावा है —
“जैसे-जैसे कड़ियां खुलेंगी, वैसे-वैसे इस नेटवर्क का असली चेहरा सामने आएगा।”

भारत की एजेंसियाँ अब “आर्थिक आतंकवाद” की रीढ़ पर वार कर रही हैं

ये रेड केवल सबूत जुटाने के लिए नहीं हैं…
ये साफ संदेश हैं — “अब आतंकवाद को फंड देने वाले छुप नहीं पाएंगे।”

इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि दिल्ली ब्लास्ट सिर्फ शुरुआत थी… पर्दे के पीछे बहुत कुछ है जो अब सामने आने वाला है।
भारत अब उन ‘सफेदपोश’ चेहरों को बेनकाब करने में जुट गया है जो आतंकियों को ताकत दे रहे हैं — और यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।

Delhi Red Fort Blast: एक और आतंकी दानिश गिरफ्तार, NIA की कार्रवाई जारी

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