Cyber Fraud: एक आधार पर ज्यादा सिम खरीदने पर 3 साल की जेल, 50 लाख का जुर्माना — बिक जाएगी घर-ज़मीन

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Cyber Fraud: एक आधार पर ज्यादा सिम खरीदने पर 3 साल की जेल, 50 लाख का जुर्माना — बिक जाएगी घर-ज़मीन

Cyber Fraud: अब एक ही आधार पर खरीदीं तो— नियम बने सख्त, नौ से अधिक सिम पर पुख्ता रोक और और भारी जुर्माना

मोबाइल के जमाने में हर किसी के पास 2–3 सिम होना आम बात है। लेकिन कुछ चालाक लोग फर्जी दस्तावेज़ और किसी के आधार कार्ड की नकल कर के दर्जनों सिम निकाल लेते थे और उनका इस्तेमाल ठगी, कॉल-फ्रॉड और साइबर अपराधों में करते थे। अब केंद्र ने इस खेल पर कड़ा रुख कर लिया है — नए नियमों के अनुसार एक व्यक्ति केवल नौ सिम तक ही अपने नाम पर रख सकेगा; अगर नौ से अधिक सिम लेकर दुरुपयोग किया गया तो तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

Cyber Fraud:मामला क्या है — सरल भाषा में समझिए

पहले कुछ लोगों ने फर्जी कागजात या किसी और का आधार कार्ड कॉपी करके बहुत सारी सिम अपने नाम पर निकाली।

इन सिमों का इस्तेमाल बैंक फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, फेक कॉल सैंटर और दूसरे अपराधों में किया जाता रहा।

कई जगहों पर एक ही आईडी पर 100–200 सिम तक पायी गई और कुछ मामलों में 50 सिम एक ही आईडी से एक्टिव थे।

अब दूरसंचार नियमों में बदलाव कर के इस पर रोक लगायी गयी है — सख्ती से जाँच और सख्त सज़ा का प्रावधान किया गया है।

Cyber Fraud:नियम क्या कहता है — सीधे और सटीक शब्दों में

एक व्यक्ति अधिकतम नौ सिम ही अपने नाम पर रख पाएगा।

अगर किसी ने नौ से अधिक सिम ले रखे हों और उनका दुरुपयोग पाया गया, तो उसकी जिम्मेदारी तय होगी।

दुरुपयोग साबित होने पर तीन साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

दूरसंचार कंपनियों और विभाग को सिम जारी करने से पहले कठोर पहचान की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।

Cyber Fraud:क्यों यह ज़रूरी है — संक्षेप में कारण

ठगी और फ्रॉड रोकना: फर्जी सिम से पैसे चुराने वाले कॉल-फ्रॉड और बैंक धोखाधड़ी करते हैं।

साइबर अपराध पर लगाम: सिम के ज़रिये कई साइबर अपराध होते हैं — पहचान छिपाकर अपराध करना आसान होता है।

तुरंत ट्रेसिंग संभव हो: जब सिम कम होंगी और पहचान पुख्ता होगी तो किसी अपराध का पता लगाना आसान होगा।

Cyber Fraud:अब टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी क्या है

सिम जारी करते समय वे ग्राहकों की पहचान और दस्तावेज़ों की सख्त सत्यापन करेंगे।

किसी भी संदिग्ध दस्तावेज़ या पहचान पर सिम जारी नहीं की जाएगी।

यदि सिस्टम में किसी एक आधार पर नौ से अधिक सिम दिखें तो ऑटो अलर्ट जायेगा और जांच होगी।

आम नागरिक को क्या करना चाहिए — आसान और क्रमबद्ध गाइडलाइन

अपना सिम-रोल चेक करें: अपने नाम पर कितने सिम हैं, यह पता लगाएं — अपने टेलीकॉम प्रोवाइडर से या आधिकारिक पोर्टल/कस्टमर केयर पर पूछकर।

अनजान सिम मिले तो तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आपके नाम पर कोई सिम है जिसे आपने नहीं लिया, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने व सेवा प्रदाता को सूचित करें।

Aadhaar/ID का दुरुपयोग लगे तो शिकायत दें: आधार की नकल या फोटो बदलकर सिम निकलवाये जाने की आशंका हो तो रिपोर्ट दर्ज करायें।

सबूत संभाल कर रखें: कॉल-रिकॉर्ड, सिम नंबर, और टैक्स/बिल जैसी चीज़ें संभालकर रखें — जांच में काम आएँगी।

दो-तीन सिम से ज़्यादा न रखें: ज़रूरत से ज़्यादा सिम रखना जोखिम भी बढ़ाता है — अनुशंसित है कि गैरज़रूरी सिम बंद करवा दें।

अगर आप पीड़ित हैं — कदम-दर-कदम क्या करें

तुरंत अपने नेटवर्क प्रदाता से संपर्क कर संदिग्ध सिम ब्लॉक कराएँ।

पास के पुलिस स्टेशन में शिकायत (FIR) दर्ज कराएं।

यदि बैंक फ्रॉड हुआ है तो बैंक को नोटिफाई कर ट्रांजैक्शन रोकने का अनुरोध करें।

साइबर सेल या टेलीकॉम नियामक को भी मामले की सूचना दें।

फायदे और सीमाएँ — उम्मीदें और हकीकत

फायदे: अपराधियों की संख्या घटेगी, फ्रॉड का शिकार कम होंगे और जालसाजों का पता लगाने में समय कम लगेगा।
सीमाएँ: तकनीकी रूप से पहचान छिपाने वाले अभी भी नए तरीके अपनाने की कोशिश कर सकते हैं — इसलिए लगातार निगरानी और डिजिटल फॉरेंसिक जरूरी रहेगा।

क्या बदलेगा और क्या सतर्क रहें

सरकार ने नियम कड़े कर दिए हैं ताकि सिम से जुड़ा अपराध रोका जा सके। अब कोई भी मनमाने तरीके से अपनी आईडी पर 10, 20 या 50 सिम नहीं निकलवा पाएगा — और अगर निकाली भी तो दुरुपयोग पर कड़ी सज़ा होगी। आम लोगों को भी चाहिए कि वे अपनी पहचान और सिमों का हिसाब रखें, संदिग्ध गतिविधि का तुरंत रिपोर्ट करें और केवल आधिकारिक चैनलों से ही शिकायत दर्ज कराएँ।

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