ट्रंप के H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी का बम फुस, लेकिन GST 2.0 राहत ने संभाला भारतीय शेयर बाजार
ट्रंप के H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी का झटका, लेकिन GST 2.0 राहत ने संभाला भारतीय शेयर बाजार
सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरे संकेतों का रूप लेकर आया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीज़ा पर अचानक भारी शुल्क वृद्धि की घोषणा ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। खासतौर पर आईटी कंपनियों के शेयर बुरी तरह प्रभावित हुए। लेकिन इसी बीच भारत में लागू हुई GST 2.0 राहत ने बाजार को नई ऊर्जा दी और गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी दर्ज की गई।
H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी का असर
ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की कि अब नए H-1B वीज़ा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क देना होगा। यह खबर भारतीय आईटी सेक्टर के लिए किसी झटके से कम नहीं थी क्योंकि अधिकांश कंपनियां अमेरिकी प्रोजेक्ट्स के लिए इसी वीज़ा पर निर्भर रहती हैं।
इस फैसले के बाद आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में अचानक भारी गिरावट आई।
निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ और शुरुआती कारोबार में निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
कंपनियों और निवेशकों के बीच यह आशंका बढ़ी कि बढ़ी हुई लागत आने वाले प्रोजेक्ट्स की लाभप्रदता को कम कर सकती है।
GST 2.0 से मिली राहत
उसी दिन भारतीय बाजार को राहत की खबर मिली। केंद्र सरकार ने GST ढांचे में बड़ा सुधार करते हुए GST 2.0 लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
पहले चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर अब दो मुख्य स्लैब 5% और 18% किए जाने की योजना है।
कई उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं पर कर घटाने से बाजार में उम्मीद बनी कि कीमतें कम होंगी और मांग बढ़ेगी।
घरेलू खपत पर आधारित सेक्टरों में निवेशकों ने भरोसा जताया और धीरे-धीरे बाजार में रिकवरी का दौर शुरू हो गया।
GST 2.0: बाजार की प्रतिक्रिया
दिन की शुरुआत में बाजार दबाव में था। आईटी कंपनियों के शेयरों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। लेकिन जैसे-जैसे GST राहत की खबर स्पष्ट हुई, निवेशकों का भरोसा लौटा और बाजार ने तेजी पकड़ी।
उपभोक्ता वस्तु, खुदरा और बैंकिंग सेक्टर में खरीदारी बढ़ी।
धीरे-धीरे निवेशकों ने देखा कि घरेलू मांग पर आधारित कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
इस संतुलन ने बाजार को न सिर्फ गिरावट से बाहर निकाला, बल्कि मजबूती की ओर बढ़ा दिया।
GST 2.0: विश्लेषण
आईटी सेक्टर की चुनौती: नए H-1B शुल्क से प्रोजेक्ट लागत बढ़ेगी और अमेरिकी क्लाइंट्स से कारोबार प्रभावित हो सकता है। कंपनियों को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी।
GST का दीर्घकालीन फायदा: कर ढांचा सरल होने से उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, कीमतों पर नियंत्रण होगा और बाजार में स्थिरता आएगी।
निवेशक दृष्टिकोण: फिलहाल आईटी सेक्टर जोखिम भरा है, जबकि उपभोक्ता उत्पाद, बैंकिंग और घरेलू खपत से जुड़े सेक्टरों में निवेशकों के लिए अच्छे अवसर मौजूद हैं।
एक ओर ट्रंप का H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी वाला फैसला भारतीय आईटी सेक्टर के लिए चिंता का सबब बना, तो दूसरी ओर GST 2.0 राहत ने बाजार को गिरावट से संभाला। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि वैश्विक नीतियों का असर भारतीय बाजार पर कितना गहरा पड़ता है, लेकिन घरेलू सुधार भी उतनी ही ताकत से बाजार को संतुलित कर सकते हैं। आगे आने वाले दिनों में आईटी सेक्टर की चुनौतियाँ बनी रहेंगी, लेकिन GST सुधार से घरेलू मांग में मजबूती और बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है।
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