भीलवाड़ा हत्याकांड: जहाजपुर में तनाव,10 थानों की फोर्स तैनात
भीलवाड़ा हत्याकांड: भीलवाड़ा में सीताराम की हत्या के बाद गुस्से में जनता। मुआवजा, बुलडोजर और इंसाफ की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज। जानिए अब तक क्या-क्या हुआ।
हत्या के बाद भीलवाड़ा में उबाल: सड़क पर आक्रोश, इंसाफ की मांग में डटा परिवार
भीलवाड़ा हत्याकांड: सीताराम की पीट-पीटकर हत्या के बाद उग्र प्रदर्शन, मोहर्रम ताजिया पर भी रोक, बुलडोजर की मांग ने पकड़ी रफ्तार
मारपीट से हत्या तक: कैसे भड़का भीलवाड़ा
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर कस्बे में शुक्रवार शाम जो हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। टोंक जिले के छावनी क्षेत्र से आए चार युवक—सीताराम कीर, सिकंदर, दिलखुश और दीपक—एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए कार से जहाजपुर पहुंचे थे। लौटते वक्त उनकी कार एक ठेले से टकरा गई। यह मामूली घटना देखते ही देखते जानलेवा बन गई।
विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि देखते ही देखते तकिया मस्जिद क्षेत्र में करीब 20 लोग जुटे और चारों युवकों पर हमला कर दिया गया। सबसे ज्यादा निशाने पर आए सीताराम कीर (उम्र 25 वर्ष)। भीड़ ने उन्हें कार से खींचकर सड़क पर फेंका और पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, उनकी सांसे थम चुकी थीं।
भीलवाड़ा हत्याकांड: प्रदर्शन, शोक और आक्रोश: इंसाफ की लड़ाई
हत्या के बाद शनिवार सुबह से सीताराम के परिवार और समाज के लोग सरकारी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन पर बैठ गए। न सिर्फ न्याय की मांग की गई, बल्कि मुआवजे और कड़ी कार्रवाई की भी आवाज उठी। पीड़ित परिवार ने सरकार से 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग की है।
जहाजपुर कस्बा पूरी तरह बंद रहा। व्यापारी, नागरिक, सामाजिक संगठन सभी इस नृशंस हत्या के विरोध में एकजुट हो गए।
भीलवाड़ा हत्याकांड: ताजिया जुलूसों पर रोक, तनाव की आंच
कस्बे में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए 5 और 6 जुलाई को मोहर्रम पर निकलने वाले ताजिया जुलूसों पर रोक लगा दी है। यह एक अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण कदम है, ताकि किसी भी संभावित सांप्रदायिक तनाव को टाला जा सके।
भीलवाड़ा हत्याकांड: पुलिस की कार्रवाई: अब तक 36 पर मुकदमा, भारी फोर्स तैनात
पुलिस ने इस मामले में 16 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पूरे इलाके में 10 थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई है। हालात को काबू में रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स और खुफिया एजेंसियां भी एक्टिव मोड में हैं।
भीलवाड़ा हत्याकांड: सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है:
क्या महज एक सड़क दुर्घटना इतनी घातक हो सकती है?
इतने कम समय में इतनी बड़ी भीड़ कैसे इकट्ठी हुई?
क्या यह सुनियोजित था या भीड़ मानसिकता का परिणाम?
क्या प्रशासन पहले से ऐसी जगहों को संवेदनशील घोषित कर सकता है?
आगे क्या? इंसाफ की राह कठिन, लेकिन ज़रूरी
सीताराम की हत्या अब केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवस्था पर गहरा सवाल बन चुकी है। समाज को भरोसा चाहिए कि कानून कमजोर नहीं, और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या परिवार की मांगों पर सरकार कोई ठोस निर्णय लेती है।
जनहित में अपील:
RocketPostLive परिवार की ओर से राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपील है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में कोई कोताही न बरती जाए।
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