Bareilly: फिर चर्चा में मौलाना तौकीर रजा, जानिए अदालत में पेशी के दौरान क्या हुआ?

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Bareilly में मौलाना तौकीर रजा की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पेशी, अदालत ने अगली सुनवाई 11 नवंबर तय की, जानिए घटनाक्रम और आरोपों का पूरा ब्यौरा।

Bareilly में फिर चर्चा में मौलाना तौकीर रजा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पेशी के बाद अदालत ने 11 नवंबर को अगली सुनवाई तय की

बरेली: बरेली की अदालत में मंगलवार को एक बार फिर चर्चित धार्मिक नेतृत्वकर्ता मौलाना तौकीर रजा की पेशी हुई। इस बार पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई, जबकि उनके करीबी सहयोगियों को फिजिकली अदालत में उपस्थित कराया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद अगली तारीख 11 नवंबर तय की है।

मौलाना तौकीर रजा पर आरोप है कि उन्होंने 26 सितंबर को जुमा की नमाज के बाद बरेली में भड़काऊ गतिविधियों और दंगे भड़काने में भूमिका निभाई। इस घटना के सिलसिले में उनके खिलाफ सात अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला बेहद संवेदनशील और शहर की कानून व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

पिछले मुकदमों का भी है लंबा इतिहास

मौलाना तौकीर रजा सिर्फ हाल ही की घटना तक ही सीमित नहीं हैं। वह पहले भी 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुकदमों में आरोपी रह चुके हैं। इस मामले में भी उनके खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने गंभीर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की थी।

विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि मौलाना तौकीर रजा का मामला सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवेदनशीलता से भी जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि अदालत ने सुनवाई को विशेष गंभीरता से लेते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी सुनिश्चित की, ताकि किसी भी तरह की शांति भंग की संभावना को रोका जा सके।

अगली सुनवाई में क्या हो सकता है?

11 नवंबर की सुनवाई में अदालत, आरोपियों की भूमिका और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विस्तृत बहस कर सकती है। पुलिस और प्रशासन ने मामले को लेकर सख्त निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू कर रखे हैं। वहीं, शहर में भी आम लोगों और मुस्लिम समुदाय के बीच सावधानी और तनाव देखा जा रहा है।

विशेष रूप से प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि अदालत के निर्णय तक किसी भी तरह का सामाजिक या धार्मिक तनाव न पैदा हो। यह मामला सिर्फ बरेली ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए संवेदनशील उदाहरण बन सकता है।

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