बलिया की बेवफ़ा: नौकरी लगते ही पति का छोड़ा दामन, अब किसी गैर की?
बलिया की बेवफ़ा: नौकरी, प्रेम और टूटते रिश्तों का दर्दनाक सच
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो न केवल रिश्तों की नाजुक डोर को उजागर करती है बल्कि समाज में नौकरी और सफलता के बाद बदलते व्यवहार की भयावह सच्चाई को भी दिखाती है। यह घटना गड़वार थाना क्षेत्र के कोटवा गांव की है, जहां एक पति अपनी पत्नी की बेवफाई, अवैध संबंधों और अत्याचारों से टूटकर न्याय की गुहार लगा रहा है।
बलिया की बेवफ़ा: शादी और सुखी जीवन की शुरुआत
सोनू वर्मा की शादी 8 दिसंबर 2020 को जिगिड़ीसर, थाना खेजुरी निवासी अमृता वर्मा से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों का वैवाहिक जीवन बेहद खुशहाल चल रहा था। अक्टूबर 2021 में दंपति की गोद में बेटी आई, जिससे घर में खुशियों और बढ़ गई।
बलिया की बेवफ़ा:पंचायत सहायक की नौकरी और हालात का बदलना
इसी बीच अमृता वर्मा ने पंचायत सहायक की नौकरी के लिए आवेदन किया और 2021-22 में उसे कोटवा गांव में ही नियुक्ति मिल गई। यहीं से रिश्तों में दरार पड़ने लगी।
पति सोनू वर्मा का आरोप है कि नौकरी लगने के बाद अमृता का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उसने ससुराल में अत्याचार शुरू कर दिया और मुझ पर ध्यान देना छोड़ दिया।
बलिया की बेवफ़ा:अवैध संबंधों का आरोप
सबसे बड़ा आरोप सोनू वर्मा ने अपनी पत्नी पर लगाया है। उनका कहना है कि नौकरी लगने के बाद अमृता के कई पुरुषों से अवैध संबंध बन गए। पति के अनुसार, उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं—ऑडियो रिकॉर्डिंग, मैसेज और अन्य लिखित प्रमाण। इन सबूतों के जरिए वह यह दावा करता है कि उसकी पत्नी अब न केवल उससे दूरी बना रही है बल्कि दूसरे पुरुषों के साथ संबंधों में लिप्त है।
बलिया की बेवफ़ा:मुकदमों की मार और पति की लाचारी
सोनू का कहना है कि उसने कई बार अमृता को समझाने की कोशिश की, यहां तक कि बच्ची के लिए भी समझौते का प्रस्ताव रखा। लेकिन अमृता हर बार पीछे हट गई। इसके उलट उसने पति और ससुराल वालों पर मुकदमे दायर कर दिए—
घरेलू हिंसा का केस
मेंटेनेंस का केस
दहेज उत्पीड़न का केस
पति का कहना है कि दहेज उत्पीड़न केस का सिर्फ नोटिस आया था, लेकिन आगे कोई कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली। इन मुकदमों के चलते सोनू वर्मा पूरी तरह टूट चुका है और खुद को बेहद लाचार मान रहा है।
बच्ची से दूर होने का दर्द
सबसे भावुक पहलू इस पूरे मामले का यह है कि पिता सोनू अपनी बेटी से मिलने तक को तरस रहा है। उसने कई बार अमृता और उसके भाइयों से बच्ची से बात कराने की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। उसके संदेश और फोन कॉल तक का जवाब नहीं दिया गया। यह दर्दनाक स्थिति एक पिता के लिए किसी गहरे घाव से कम नहीं है।
टूटते रिश्ते और अहंकार का असर
पति का साफ कहना है कि नौकरी लगने से पहले दोनों का पारिवारिक जीवन सुखमय था, लेकिन जैसे ही पत्नी को नौकरी मिली, उसके भीतर अहंकार आ गया और रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया। नौकरी का यह गुमान, अवैध संबंधों के आरोप और पति के प्रति गलत व्यौहार ने एक पूरे परिवार की खुशियों को बर्बाद कर दिया।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की निजी समस्या नहीं है, बल्कि समाज के लिए करारा सवाल खड़ा करती है।
क्या नौकरी लगने के बाद स्त्री-पुरुष के रिश्तों में इतना बदलाव आना चाहिए कि परिवार ही टूट जाए?
क्या सफलता का गुमान रिश्तों और जिम्मेदारियों से बड़ा हो सकता है?
क्या अवैध संबंधों की आड़ में परिवार की नींव को हिलाना उचित है?
यह मामला समाज में बढ़ते अहंकार, बदलती मानसिकता और टूटते पारिवारिक मूल्यों का जीता-जागता उदाहरण है।
बलिया का ये मामला एक आक्रामक चेतावनी है और एक लाचार पति की पुकार भी। यह घटना समाज में रिश्तों के साथ खिलवाड़ और विश्वासघात का कड़वा सच सामने लाती है। एक बच्ची अपने पिता के प्यार से दूर हो रही है, जबकि पिता न्याय और अपने हक के लिए दर-दर भटक रहा है।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि नौकरी और सफलता के गुमान में अगर रिश्तों का बलिदान देना पड़े, तो आखिर इस सफलता का मूल्य क्या रह जाता है?
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