Baghpat: मेडिकल छात्र ने यमुना पुल से छलांग लगाई, वीडियो वायरल, तलाश जारी
Baghpat:यमुना की लहरों में समा गया मेडिकल छात्र हिमांशु
मानव जीवन अमूल्य है, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियाँ और मानसिक दबाव इंसान को ऐसे कदम उठाने पर विवश कर देते हैं, जो पूरे समाज को झकझोर देते हैं। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा पर बहती यमुना नदी में घटी एक घटना ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। हरियाणा के पानीपत जनपद के समालखा कस्बे से संबंध रखने वाला मेडिकल छात्र हिमांशु यमुना नदी के पुराने पुल से छलांग लगाकर उसकी उफनती धाराओं में समा गया। इस घटना ने परिवार, समाज और स्थानीय प्रशासन—सभी को गहरी चिंता और पीड़ा में डाल दिया है।
Baghpat:घटना का क्रम
शनिवार की शाम, लगभग पाँच बजे, हिमांशु अपने बैग और टैबलेट फोन के साथ यमुना नदी के पुराने और जर्जर पुल पर पहुँचा। उसने अपना सामान पुल पर ही छोड़ दिया और धीरे-धीरे पुल की क्षतिग्रस्त रेलिंग को पकड़कर नीचे की ओर लटक गया। थोड़ी देर तक लोगों ने उसे इस स्थिति में देखा, फिर अचानक उसने खुद को छोड़ दिया और यमुना की प्रचंड लहरों में कूद पड़ा।
इस घटना का दृश्य वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने अपने कैमरों में कैद कर लिया। चौंकाने वाली बात यह रही कि हिमांशु ने कूदने से पहले अपने दोस्तों को मोबाइल संदेश भेजकर अपनी लोकेशन दी थी और यह संकेत भी दिया था कि वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने जा रहा है।
Baghpat:परिवार और पृष्ठभूमि
हिमांशु बीस वर्ष का था और आयुर्वेद की पढ़ाई कर रहा था। उसका परिवार साधारण और शिक्षित है। पिता जयभगवान सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उसका बड़ा भाई विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। परिजनों के अनुसार, घर में किसी भी प्रकार का तनाव, विवाद या कलह नहीं था। हिमांशु ने कभी ऐसा व्यवहार भी नहीं किया था, जिससे यह आभास हो कि वह मानसिक रूप से विचलित है।
शाम तक जब वह घर नहीं लौटा, तो परिजनों को चिंता हुई। बाद में उन्हें सूचना मिली कि वह यमुना नदी के पुल से छलांग लगा चुका है। यह खबर सुनकर पूरा परिवार घटना स्थल पर पहुँचा और उन्हें गहरा आघात पहुँचा।
Baghpat:बचाव कार्य
जैसे ही युवक के कूदने की सूचना मिली, स्थानीय पुलिस, बाढ़ राहत बल और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुँच गई। नदी में उतरकर कई घंटे तक तलाश की गई, लेकिन तेज धार और गहराई के कारण कोई सफलता नहीं मिली। आसपास मौजूद कुछ युवकों ने भी उसे बचाने की कोशिश की थी, लेकिन लहरों के प्रचंड प्रवाह ने उन्हें नाकाम कर दिया।
रात ढलते ही तलाश और अधिक कठिन हो गई। गोताखोरों ने अगले दिन भी अभियान जारी रखा, परंतु अभी तक हिमांशु का कोई सुराग नहीं लग पाया है।
Baghpat:समाज और मानसिक पहलू
हिमांशु का यह कदम कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ परिवार का कहना है कि उसे किसी प्रकार की समस्या या विवाद का सामना नहीं करना पड़ रहा था, वहीं दूसरी ओर उसके द्वारा दोस्तों को भेजा गया संदेश यह दर्शाता है कि भीतर ही भीतर वह गहरे मानसिक दबाव से गुजर रहा था।
घटना का वीडियो वायरल होना इस त्रासदी को और भी संवेदनशील बना देता है। इससे समाज में चर्चा है कि आज की पीढ़ी मानसिक दबाव और तनाव को सहने के बजाय सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित करने वाले कदम क्यों उठाने लगती है।
यमुना नदी में समाए हिमांशु की यह दुखद कहानी सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि युवा पीढ़ी के भीतर छिपे तनाव और मानसिक दबाव को समय रहते समझना और संभालना कितना आवश्यक है। साथ ही, ऐसे जर्जर और असुरक्षित पुलों पर निगरानी और सुरक्षा उपायों की भी तत्काल आवश्यकता है।
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