Baghpat Accident: 3 की मौके पर मौत – 12 गंभीर घायल
Baghpat Accident: सब्जी लेकर जा रहे व्यापारीयों की पिकअप पलटी , 3 की मौके पर मौत – 12 गंभीर घायल
शाम का सफर जो आखिरी पड़ाव बन गया
बागपत जनपद के डोला गांव से दिल्ली-आजादपुर मंडी के लिए निकले कुछ साधारण सब्जी व्यापारी आज अपनी रोज़ की मेहनत की कमाई मंडी तक पहुँचाने की राह में थे। लेकिन नियति ने उनकी ज़िंदगी और उनके परिवारों की खुशियों को अचानक ही छीन लिया।
मेरठ-बागपत हाईवे (NH 304B) पर कोतवाली क्षेत्र के पास उनका पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।
हादसे की वजह
जानकारी के मुताबिक, डोला गांव के ये व्यापारी सुबह-शाम की तरह सब्जियों की खेप लेकर आजादपुर मंडी के लिए निकले थे। लेकिन हाईवे के एक मोड़ पर अचानक वाहन ने नियंत्रण खो दिया और पलट गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के वक्त सड़क पर अंधेरा छाया हुआ था। कई दिनों से उस हिस्से की स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी थीं, जिससे वाहन चालक के लिए स्थिति और भी खतरनाक हो गई।
संभावित कारण
प्राथमिक जांच में हादसे के पीछे कई प्रमुख वजहें सामने आई हैं:
वाहन में अधिक सवारियों का होना – पिकअप वाहन में तय सीमा से ज्यादा लोग सवार थे, जिससे नियंत्रण खोना आसान हो गया।
तेज़ रफ्तार और कम दृश्यता – रात के अंधेरे में वाहन तेज़ चल रहा था, जिससे मोड़ पर अचानक नियंत्रण खो गया।
सड़क पर अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था – खराब स्ट्रीट लाइट और अंधेरा, हादसे का प्रमुख कारण बना।
हाईवे पर भारी वाहनों का अव्यवस्थित प्रवाह – ट्रक और दूसरे भारी वाहन भी तेज़ रफ्तार में सड़क पर मौजूद थे, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ गई।
इन सभी कारणों ने मिलकर इस त्रासदी को भयावह रूप दे दिया।
हाईवे की अव्यवस्थाओं ने बढ़ाई मुश्किल
मेरठ-बागपत हाईवे लंबे समय से कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
भारी ट्रैफिक और ओवरलोडिंग: हाईवे पर लगातार भारी वाहनों का आवागमन, छोटे वाहन चालक के लिए खतरे का कारण।
सड़क की घिसावट और गड्ढे: रास्ते पर गहरे गड्ढे और खराब सतह वाहन पलटने का प्रमुख कारण।
अपर्याप्त सुरक्षा और संकेतक: मोड़ और खतरनाक हिस्सों पर चेतावनी संकेतक न के बराबर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो स्थायी प्रकाश व्यवस्था ठीक की गई है और न ही स्पीड कंट्रोल के प्रभावी इंतज़ाम किए गए हैं।
सवालों के घेरे में प्रशासन
यह हादसा केवल एक वाहन दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन गया है।
अगर हाईवे पर रात में लाइटें नहीं जलतीं — तो रखरखाव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
अगर छोटे व्यापारी असुरक्षित ढंग से परिवहन कर रहे हैं — तो निगरानी तंत्र कहाँ है?
क्या हमारे किसान और व्यापारी, जो सब्जियों के सहारे शहरों को जीवन देते हैं, खुद सुरक्षित हैं?
हादसा यह दिखाता है कि केवल सड़क दुर्घटना को दुर्भाग्य कहकर टालना पर्याप्त नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की चूक को उजागर करता है।
आगे क्या?
अब सवाल उठता है कि:
क्या प्रशासन इस हादसे के बाद सड़क सुरक्षा की समीक्षा करेगा?
क्या मेरठ-बागपत हाईवे पर नियमित सड़क निरीक्षण और मॉनिटरिंग बढ़ाई जाएगी?
क्या ग्रामीण व्यापारियों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित होगी?
यह हादसा इस बात की चेतावनी है कि अब “दुर्घटना” शब्द को सामान्य मानना बंद करना होगा। यह केवल एक व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का नतीजा है।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि चेतावनी है — उस व्यवस्था के लिए जो हर रोज़ ऐसे हादसों की कीमत जनता से वसूलती है।
डोला गांव के वे व्यापारी, जो अपनी मेहनत की फसल लेकर मंडी तक पहुँचने का सपना लिए थे, अब अपने घर तक भी नहीं लौट पाए। उनके पीछे रह गई मातम की खामोशी और सवाल:
“क्या कभी हमारे किसान और व्यापारी सुरक्षित सफर कर पाएंगे?”