अयोध्या दीपोत्सव का सरकारी विज्ञापन बना राजनीति का चर्चा, जानिए क्यों, विपक्ष को मिल सकता है मौका
उत्तर प्रदेश। अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव** से पहले एक सरकारी विज्ञापन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। रविवार को प्रकाशित इस विज्ञापन में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें दिखाई गईं, लेकिन प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम की तस्वीरें गायब थीं। इस बात ने न केवल भाजपा के अंदर चर्चा का विषय बना दिया बल्कि विपक्षी पार्टियों ने इसे लेकर राजनीति में चुटकी लेना भी शुरू कर दिया।
सरकारी विज्ञापन में डिप्टी सीएम की तस्वीर नहीं
सूत्रों के अनुसार, सरकारी विज्ञापन सुबह से ही मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर चर्चा का केंद्र बना हुआ था। जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर आश्चर्य में थे कि क्यों दोनों डिप्टी सीएम की तस्वीरें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के विज्ञापन से गायब थीं। यह सवाल उठता है कि क्या यह अनजाने में हुई चूक थी या इसका कोई रणनीतिक कारण था।
डिप्टी सीएम के अयोध्या न आने की जानकारी
कुछ ही समय बाद, प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की तरफ से यह जानकारी सार्वजनिक की गई कि वे दीपोत्सव में अयोध्या नहीं पहुँचेंगे। हालांकि, इस जानकारी में अयोध्या न आने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजनीति में विपक्ष के लिए मौके पैदा कर देती हैं।
राजनीतिक हलकों की प्रतिक्रिया
विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को तुरंत उठाया और इसे भाजपा में राजनीतिक संदेश के रूप में देखा। बीजेपी के अंदर भी नेताओं के बीच इस विषय पर चर्चा हुई। हालांकि, पार्टी के आलाकमान ने फिलहाल इस पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
सामाजिक और मीडिया प्रभाव
सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हुई। कुछ लोग इसे सरकारी विज्ञापन में चूक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश या रणनीति के रूप में देख रहे हैं। समाचार पत्रों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी यह मुख्य खबरों में शामिल रही, जिससे राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं में यह विषय दिनभर बना रहा।
विश्लेषण
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर सार्वजनिक धारणा और मीडिया कवरेज के माध्यम से चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। सरकारी विज्ञापन में डिप्टी सीएम की तस्वीर न होना और उनका कार्यक्रम में न आना, दोनों मिलकर राजनीतिक अफवाहों और सवालों को जन्म दे रहा है।
इसके बावजूद, पार्टी के वरिष्ठ नेता और आलाकमान ही सबसे अच्छे तरीके से इस विषय का सटीक जवाब देंगे।